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महाकाल की गर्भगृह में अब VIP कल्चर पर लगेगी रोक या फिर ?

एक बार फिर क्षिप्रा किनारे बसी उज्जैन नगरी में विद्यमान कालों के काल महाकाल का धाम मीडिया की सुर्खियों में है, भांग का मुखौटा टूटने और स्वर्ण ध्वज के गिरने के बाद भूमंडल के इस स्वामी की गर्भगृह पर बवाल मचा हुआ है. कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया जा चुका है, लेकिन क्या VIP कल्चर के आगे महाकाल के आम भक्तों को न्याय मिल पाएगा?

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महाकाल लोक में मचा ऐसा बवाल, गर्भगृह में आई विवादों की सुनामी, ख़तरे में नेताओं और रसूखदारों की VIP एंट्री. अब जाकर आम भक्तों को मिलेगा इंसाफ़. एक बार फिर क्षिप्रा किनारे बसी उज्जैन नगरी में विद्यमान कालों के काल महाकाल का धाम मीडिया की सुर्खियों में है, भांग का मुखौटा टूटने और स्वर्ण ध्वज के गिरने के बाद भूमंडल के इस स्वामी की गर्भगृह पर बवाल मचा हुआ है. कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया जा चुका है, लेकिन क्या VIP कल्चर के आगे महाकाल के आम भक्तों को न्याय मिल पाएगा? देखिए धर्म ज्ञान पर.

कॉरिडोर बन जाने के बाद राजा विक्रमादित्य के इतिहास को समेटे उज्जैन नगरी अब चमक और दमक रही है, यहाँ क्षिप्रा किनारे बसा महाकालेश्वर धाम, जहां बसते हैं भूमंडल के स्वामी, और ऐसा कोई देव नहीं जो यहाँ आया नहीं और ऐसा कोई इंसान नहीं जिसे महाकाल ने अपनाया नहीं. यही वह पवित्र स्थल है, जहां विद्यमान है दुनिया का इकलौता दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग, और यही वह धरा है जहां से संपूर्ण सृष्टि का समय निर्धारित होता है. विश्व की यह इकलौती ऐसी धरा है, जहां भस्म से कालों के काल महाकाल का श्रृंगार होता है, और अब महाकाल की इसी नगरी से तबाही के संकेत भी मिल रहे हैं. गर्भगृह के भीतर बवाल मच रहा है, स्वर्ण शिखर के गिरने और भांग के मुखौटे टूटने के बाद गर्भगृह को लेकर छिड़ी जंग अदालत की चौखट पर पहुँच चुकी है. महाकाल लोक में नेताओं और रसूखदारों को मिलने वाला VIP कल्चर विवादों में आ गया है.

कालों के काल महाकाल के इस धाम में प्रत्येक क्षण उनके भक्तों का सैलाब उमड़ता है, उनकी सिर्फ़ एक झलक पाने के लिए आम भक्तों को घंटों का इंतज़ार करना पड़ता है. फिर भी गर्भगृह से एक निर्धारित दूरी के बाद महाकाल के दर्शन होते हैं, और जब इन दर्शनों पर VIP एंट्री का साया पड़ता है, तो भक्तों के मन में आक्रोश स्वाभाविक है. इसी कारण VIP कल्चर के खिलाफ हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में याचिका दायर की गई.

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मामले में याचिकाकर्ता ने सवाल उठाया कि सैकड़ों किलोमीटर दूर से आए भक्तों को केवल बाहर से दर्शन कराए जाते हैं, जबकि नेताओं और अधिकारियों के लिए गर्भगृह खोल दिया जाता है. आख़िर यह VIP कल्चर किस नियम के तहत है. आम तौर पर मंदिर की गर्भगृह में जिन चेहरों को महाकालेश्वर ज्योर्तिलिंग का रुद्राभिषेक करते देखा जाता है, उनमें नेता, अभिनेता, उद्योगपति और रसूखदार परिवारों से आने वाली हस्तियाँ शामिल होती हैं, इसके पीछे की वजह VIP कल्चर है.

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याचिकाकर्ता का आरोप है कि आम श्रद्धालु घंटों लंबी लाइन में लगने के बाद भी केवल दूर से भगवान के दर्शन कर पाते हैं, जबकि VIP व्यक्तियों को सीधे गर्भगृह में प्रवेश देकर पूजा-अर्चना का अवसर दिया जाता है.

हाल ही में इस मामले ने तब तूल पकड़ा जब गर्भगृह में सावन के चौथे सोमवार को कथावाचक डॉ. पुंडरिक गोस्वामी महाराज पहुंचे. उन्होंने यहां करीब आधे घंटे तक पूजा-अर्चना की. इस दौरान पुजारी परिवार की महिलाएं भी बड़ी संख्या में मौजूद थीं, जो जलाभिषेक कर रही थीं. हालांकि उन्हें अनुमति थी या नहीं, इस पर जिम्मेदारों ने चुप्पी साध रखी है. इतना ही नहीं, आरोप है कि बीजेपी विधायक गोलू शुक्ला और उनके बेटे रुद्राक्ष भी मंदिर नियमों का उल्लंघन कर जबरन गर्भगृह में घुसे. सावन के दूसरे सोमवार को भस्म आरती से पहले उन्होंने जबरन गर्भगृह में प्रवेश किया.

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इन्हीं सब को देखते हुए याचिकाकर्ता का सवाल है कि महाकाल सबके हैं, तो फिर गर्भगृह में VIP कल्चर क्यों है. याचिका में ना सिर्फ VIP कल्चर को खत्म करने की माँग की गई है, बल्कि सभी भक्तों को समान अवसर मिले इस पर भी ज़ोर दिया गया है. याचिका में यह भी कहा गया है कि अगर VIP कल्चर को ख़त्म नहीं किया जा सकता, तो आम श्रद्धालुओं के लिए भी निश्चित समय पर गर्भगृह खोला जाए. इसके लिए मंदिर संचालन समिति कोई शुल्क निश्चित कर सकती है.

हालाँकि इस मामले में लंबी बहस के बाद फ़ोर्ट ने फ़ैसला सुरक्षित रख लिया है, और अब ना सिर्फ बाबा के VIP भक्त बल्कि आम भक्तों की निगाहें भी कोर्ट के फ़ैसले पर टिकी हैं. सौ बात की एक बात यह है कि VIP कल्चर के चलते गर्भगृह में विवादों की सुनामी तो आ गई है, लेकिन अब इस सुनामी में कौन बहेंगे, महाकाल के आम भक्त या VIP भक्त. यह तो वक़्त बताएगा.

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