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क्या हज़ार साल पुराने शिव मंदिर बनेंगे थाईलैंड-कंबोडिया के युद्ध का कारण?

कभी सीरिया पर इज़रायल की बमबारी शुरू हो जाती है. तो कभी भारत-पाकिस्तान आपस में भिड़ते दिखते हैं. हालात इतने भयावह हैं कि दिनों-दिन युद्ध का दायरा बढ़ता जा रहा है. बीते 72 घंटों के अंदर कंबोडिया और थाईलैंड एक-दूसरे के खून के प्यासे बन चुके हैं. लगभग 1 हज़ार साल पुराने दो शिव मंदिरों के चक्कर में दोनों के बीच मौत की एयरस्ट्राइक अब शुरू हो चुकी है.

क्या हज़ार साल पुराने शिव मंदिर बनेंगे थाईलैंड-कंबोडिया के युद्ध का कारण?
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आधा साल बीत चुका है, लेकिन 2025 में युद्ध की चिंगारी बुझने का नाम नहीं ले रही है. युद्ध के मैदान में कभी रूस-यूक्रेन का खूनी संघर्ष दिखता है, तो कभी इज़रायल और ईरान के बीच मौत की एयरस्ट्राइक नज़र आती है. कभी सीरिया पर इज़रायल की बमबारी शुरू हो जाती है, तो कभी भारत-पाकिस्तान आपस में भिड़ते दिखते हैं. हालात इतने भयावह हैं कि दिनों-दिन युद्ध का दायरा बढ़ता जा रहा है. बीते 72 घंटों के अंदर कंबोडिया और थाईलैंड एक-दूसरे के खून के प्यासे बन चुके हैं. लगभग 1 हज़ार साल पुराने दो शिव मंदिरों के चक्कर में दोनों के बीच मौत की एयरस्ट्राइक अब शुरू हो चुकी है.

दुनिया के नक़्शे पर मौजूद कंबोडिया और थाईलैंड, दो ऐसे मुल्क हैं, जिनकी आपसी दुश्मनी की जड़ 1 हज़ार साल पुराना शिव मंदिर है. ना ही इन देशों की गिनती हिंदू राष्ट्र में होती है और ना ही इन मुल्कों की जनसंख्या हिंदू बहुल है. फिर भी दो प्राचीन शिव मंदिरों के कारण इनके बीच पनपी दुश्मनी में बंदूकें चलती हैं, सैनिक शहीद हो जाते हैं, आम नागरिक मारे जाते हैं, लोग अपना घर छोड़ने पर मजबूर हो जाते हैं और अब तो मौत की एयरस्ट्राइक भी शुरू हो चुकी है. जंग के इन हालातों में प्राचीन शिव मंदिरों का क्या चक्कर है, पहले वो समझते हैं…

दरअसल भारत-पाकिस्तान की तरह थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सीमा विवाद है और इसी विवाद का केंद्र है 9वीं सदी का एक हिंदू मंदिर, जिसका नाम प्रेह विहेयर है और जो जटाधारी भगवान शिव को समर्पित है. मंदिर का इतिहास खमेर सम्राट सूर्यवर्मन से जुड़ा है, जिन्होंने मंदिर की नींव कंबोडिया के सीमावर्ती प्रांत में रखी, जिसका कुछ हिस्सा थाईलैंड की सीमा में भी आता है. कंबोडिया ने इस विवाद में आग में घी डालने का कार्य तब किया, जब प्रेह विहेयर मंदिर को UNESCO की वर्ल्ड हेरिटेज साइट में शामिल करवाया. तभी से इन दो मुल्कों के बीच 2008 से 2011 के बीच कई बार झड़पें हुईं. इसी कड़ी में एक और प्राचीन शिव मंदिर का नाम आता है और वो है ता मुएन थॉम मंदिर, जिसे थाईलैंड के नक़्शे में दिखाया जाता है, जबकि कंबोडिया इसे अपना मानता है. मतलब ये कि ता मुएन थॉम मंदिर दोनों देशों की सीमा के उस हिस्से में आता है जो ठीक से तय नहीं है. यही वजह है कि इस पर दोनों देश अपना दावा करते हैं. ता मुएन थॉम मंदिर की बात करें, तो 1000 साल पुराने इस मंदिर का निर्माण खमेर राजा द्वितीय ने करवाया. मंदिर की विशेषता इसकी गर्भगृह है, जहां चट्टान को ही शिवलिंग रूप में तराशा गया है.

अब ये पूरा विवाद भीषण युद्ध में बदल चुका है. आलम ये है कि गोलीबारी शुरू हो चुकी है. थाईलैंड के खुद के 13 नागरिक मारे गए हैं और एक जवान शहीद हो गया है. जबकि कंबोडिया ने दावा किया है कि उसके 14 सैनिक समेत 32 नागरिक मारे गए हैं. दोनों ही मुल्कों के बीच मिसाइलों से लेकर फाइटर जेट से जंग लड़ी जा रही है. हालाँकि दोनों तरफ़ की इसी हिंसक कार्रवाई को देखते हुए विश्व ताक़तें युद्धविराम कराए जाने की कोशिश में हैं, लेकिन कोशिशें अब तक असफल दिख रही हैं.

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