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चंद्र ग्रहण के साये में होली की धूम क्या तबाही का मंजर दिखाएगी ?

फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि, प्रत्येक वर्ष आने वाली इसी तिथि पर होली मनाई जाती है। रंगों की होली खेलकर वसंत ऋतु के आगमन का स्वागत किया जाता है। हर्षोल्लास के इस मौक़े पर परंपराएं निभाई जाती है। विश्व जगत पर सनातन का रंग चढ़ता है। कई मायनों में ख़ास रहने वाली होली इस बार चंद्रग्रहण के साये में है, जिस कारण लोग चिंतित है। ग्रहण के साये में मनाई जाने वाली होली ख़ुशियाँ लेकर आएगी या फिर मनहूसियत को दावत देगी, अगर आप भी इसी कश्मकश में है।

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रंगों का पर्व होली , जो देता है एकता-भाईचारा का संदेश रंगों का पर्व होली, प्रतीक है बुराई पर अच्छाई की जीत का,.रंगों का पर्व होली, उत्सव है प्रेम का, फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि, प्रत्येक वर्ष आने वाली इसी तिथि पर होली मनाई जाती है। रंगों की होली खेलकर वसंत ऋतु के आगमन का स्वागत किया जाता है। हर्षोल्लास के इस मौक़े पर परंपराएं निभाई जाती है। विश्व जगत पर सनातन का रंग चढ़ता है। कई मायनों में ख़ास रहने वाली होली इस बार चंद्रग्रहण के साये में है, जिस कारण लोग चिंतित है। ग्रहण के साये में मनाई जाने वाली होली ख़ुशियाँ लेकर आएगी या फिर मनहूसियत को दावत देगी, अगर आप भी इसी कश्मकश में है। 

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14 मार्च को ही होली मनाई जाएगी और 14 मार्च को साल का पहला चंद्रग्रहण लगेगा। मतलब ये कि होली पर ग्रहण का काला साया रहेगा। इस बार की होली में ब्लड मून दिखेगा मतलब चंद्रमा पर खूनी रंग चढ़ेगा। खगोलीय घटना में से एक चंद्र ग्रहण में  जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है, जिससे सूर्य की रोशनी चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाती है। इस स्थिति में पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है, जिससे वह कुछ समय के लिए आंशिक या पूर्ण रूप से ढक जाता है। जब चंद्रमा पूरी तरह से पृथ्वी की छाया में आ जाता है, तब इसे पूर्ण चंद्रग्रहण कहा जाता है और जब यह आंशिक रूप से ढका होता है तब इसे आंशिक चंद्र ग्रहण कहा जाता है। इसी कड़ी में जब पूर्णिमा तिथि का पूर्ण चांद पृथ्वी और सूर्य एक सीध में होते हैं, तब चंद्रमा रंग बदलते हुए पृथ्वी की छाया में चला जाता है, जिसे ब्लड मून कहा जाता है। अबकी बार की होली में यही ब्लड मून दिखाई देगा, लेकिन किन देशों में ये जानने के लिए बने रहिये धर्म ज्ञान के साथ।

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दरअसल 14 मार्च को लगने वाला चंद्रग्रहण सुबह 9 बजकर 27 मिनट से दोपहर 3 बजकर 30 मिनट तक रहेगा, यानी की 6 घंटे 3 मिनट तक ग्रहण की छाया बनी रहेगी हालाँकि चंद्रग्रहण भारत में कहीं दिखाई नहीं देगा।यूरोप, आंशिक ऑस्ट्रेलिया, उत्तरी-दक्षिण अमेरिका, प्रशांत व अटलांटिक महासागर, उत्तरी व दक्षिणी ध्रुव सहित एशिया-अफ्रीका के कुछ हिस्सों में दुनिया इसे अपनी नंगी आँखों से देख पाएगी। अब जब भारत में चंद्र ग्रहण दिखाई ही नहीं देगा, तो ना ही सूतक लगेगा , न ही मंदिर के कपाट बंद होगा और ना ही वैदिक पूजा-पाठ पर किसी तरह का रोक टोक रहेगी।

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सौ बात की एक बात ये कि होली के मौक़े पर भारत को छोड़कर जिन-जिन देशों में चंद्रमा पर ग्रहण लगेगा, वहाँ चंद्रमा पर खूनी रंग चढ़ा हुआ दिखेगा यानी की ब्लड मून। ज्योतिषों की मानें, तो जहां -जहां ब्लड मून दिखेगा। वहाँ प्रकृति आपदा के होने की संभावना है, लेकिन भारत में इससे कही कोई तबाही नहीं आने वाली है।

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