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8 जुलाई के दिन क्या PM Modi ख़ुद अपने हाथों से खोलेंगे प्रभु जगन्नाथ का रत्न भंडार

आँखें फटी की फटी रह जाएगी, अब खुलेंगे रत्न भंडार के कपाट, दो हफ़्तों के इंतज़ार के बाद बेशुमार दौलत भ्रम है या फिर सच्चाई ? देखिये सिर्फ़ धर्म ज्ञान पर

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चुनावी रण में रत्न भंडार के मसले को चमकाया गया और अब जब ओड़िसा में भाजपा की सरकार बन गई है, उसके बाद भी रत्न भंडार चर्चा में है। ओडिशा ही नहीं, बल्कि पूरे देश-दुनिया में रहने वाले महाप्रभु के भक्त इस प्रतीक्षा में हैं, कि अब कब बंद तहख़ाने का ताला खुलेगा, ताकी महाप्रभु के ख़ज़ाने के दर्शन हो सके। इन सबके बीच खबर उड़ी कि दो दफ्ते बाद रत्न भंडार खोला जाएगा, ASI अधिकारी डी.बी गरनायक के हवाले से ये कहा गया कि 8 जुलाई के दिन 3 दशकों से बंद पड़ा रत्न भण्डार खोला जाएगा हालाँकि ये भ्रम है या फिर सच्चाई, इसको लेकर प्रदेश के क़ानून मंत्री का क्या कहना है ? क्या ये मान लिया जाए, दो हफ़्ते बाद ख़ुद पीएम मोदी प्रभु जगन्नाथ के ख़ज़ाने की तिजोरी खोलेंगे..क्या है ये पूरा मामला, आईये आपको बताते हैं।

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ओड़िसा में समुद्र किनारे बसी जगन्नाथपुरी धाम की मिस्ट्री और हिस्ट्री , आज भी उनके भक्तों के लिए दुनियाभर के वैज्ञानिकों के लिए बुद्धिजीवियों के लिए और नास्तिकों के लिए एक मिस्ट्री बनी हुई है। मंदिर की चौखट से लेकर शिखर ध्वज तक चार दिशाओं में स्थापित मंदिर के चारों द्वार और मंदिर के भीतर प्रभु जगन्नाथ का धड़कता दिल यानी ब्रह्म पदार्थ। एक-एक कदम पर प्रभु जगन्नाथ की ये दुनिया चमत्कारों से भरी पड़ी है और इसी दुनिया में बंद तहख़ानों के पीछे प्रभु जगन्नाथ का ख़ज़ाना मौजूद है, जिसे 3 दशकों से जनता की आँखों से छुपा कर रखा गया है। चाबी खो जाने का बहाने बनाकर 1985 से ही रत्न भंडार को खोला नहीं गया। ये जग-जाहिर है कि मंदिर की गर्भगृह में स्थापित रत्न भंडार, जिसमें मंदिर की क़ीमती संपत्ति है..इसमें दो कक्ष मौजूद हैं..बाहरी कक्ष को समय-समय पर देवताओं के अनुष्ठान के लिए खोला जाता है, इसी में प्रभु के क़ीमती वस्त्र और उपयोग होने वाले क़ीमती आभूषण मौजूद हैं।

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इसके बाद आंतरिक कक्ष हैं, जिसमें बहुमूल्य वस्त्र, आभूषण और धातुएँ मौजूद है, जो राजा-महाराजाओं द्वारा महाप्रभु को चढ़ाया गया है। 1926 में यही रत्न भंडार खोला गया। दूसरी बार 1978 में रत्न भंडार खोला गया और फिर 1985 में आख़िरी बार रत्न भंडार के कपाट खोले गये। इसके बाद 2018 में मंदिर का रत्न भंडार खोलने की कोशिश हुई, लेकिन सफल नहीं हो पाए क्योंकि चाबी खो जाने की बात सामने आई। 46 साल पहले बंद रत्न भंडार में मौजूद क़ीमती ज़ेवरात का मूल्यकांन किया गया। अब जब ओड़िसा में भाजपा की सरकार है, बीते दिनों कोरोना काल से बंद पड़े मंदिर के तीनों द्वार खोले गये।इस कारण एक बार फिर रत्न भंडार को खोले जाने की माँग उठी और इसी माँग के बीच ASI के हवाले से ख़बर सामने आई कि दो हफ़्ते बाद यानी 8 जुलाई को मंदिर का ख़ज़ाना लोगों के सामने बाहर लाया जाएगा।

बताया गया कि कोर कमेटी एवं तकनीकी कमेटी के सदस्य की उपस्थिति में रत्न भंडार खोला जाएगा। रत्न भंडार के बाहरी पार्श्व की दीवार की लेजर स्कैनिंग की गई है।स्कैनिंग से दीवार में दरार होने की बात पता चली है। इससे रत्न भंडार के अंदर पानी रिसाव कर रहा है।जांच के लिए एएसआई की तरफ से 14 सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। 

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ASI की तरफ़ से जैसे ही रत्न भंडार को खोले जाने की ये ख़बर सामने आई, भक्तों के चेहरे खिल उठे…हालाँकि प्रदेश के क़ानून मंत्री हरिचन्दन ने इन जानकारी को झूठी बताई। साफ़ कर दिया कि रत्न भंडार खोलने को लेकर छत्तीस नियोग बैठक में कोई निर्णय नहीं लिया गया है। इस संदर्भ में जिस भी ASI अधिकारी ने जो भ्रम फैलाया है, उसके ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी। अब जो कि 8 जुलाई में अभी समय है, इसलिए लोग यही उम्मीद लगाए हुए हैं कि क्या पता ASI की कहीं बातें सच निकलें और दो हफ़्ते बाद रत्न भंडार के दर्शन उन्हें हो पाए। चुनाव बीच रत्न भण्डार खोले जाने की गारंटी पीएम मोदी ने दी थी, लेकिन वो समय कब आएगा।अब ये देखने वाली बात है। 

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