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क्या ममता बनर्जी का पश्चिम बंगाल से होगा सियासी सफाया, या फिर बनेंगी चौथी बार मुख्यमंत्री?

चुनावी डुगडुगी अगले साल 2026 में बजनी है, लेकिन NRC नाम का फंदा अभी से TMC का गला घोंट रहा है. ऐसे में आज का सबसे बड़ा सवाल यह है: क्या बंगाल में दीदी का समय अब खत्म होने वाला है? इसी मुद्दे को लेकर राष्ट्रभक्त, विश्वविख्यात सुदर्शनचक्र ज्योतिषाचार्य श्री संत बेत्रा अशोका जी और आध्यात्मिक दुनिया का सबसे चर्चित चेहरा, स्वामी योगेश्वरानंद गिरी महाराज, इन दो शख्सियतों की सांकेतिक भविष्यवाणियां किस प्रकार पश्चिम बंगाल की दिशा और दशा, दोनों को बदलने जा रही हैं, इसी पर देखिए हमारी आज की विशेष रिपोर्ट.

क्या ममता बनर्जी का पश्चिम बंगाल से होगा सियासी सफाया, या फिर बनेंगी चौथी बार मुख्यमंत्री?
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इन दिनों बंगाल की क्वीन कही जाने वाली मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तमतमाई हुई हैं। चुनाव आयोग पर भड़की दीदी ग़ुस्से में हैं, या फिर यूं कहें कि चुनाव से पहले 'मां, माटी, मानुष' की देवी भयभीत हैं. चुनावी डुगडुगी अगले साल 2026 में बजनी है, लेकिन NRC नाम का फंदा अभी से TMC का गला घोंट रहा है. ऐसे में आज का सबसे बड़ा सवाल यह है, क्या बंगाल में दीदी का टाइम ओवर हो चुका है? इसी को लेकर राष्ट्रभक्त, विश्वविख्यात सुदर्शनचक्र ज्योतिषाचार्य श्री संत बेत्रा अशोका जी और आध्यात्मिक दुनिया का सबसे चर्चित चेहरा, स्वामी योगेश्वरानंद. इन दो शख्सियतों की सांकेतिक भविष्यवाणी किस प्रकार पश्चिम बंगाल की दिशा और दशा, दोनों को बदलने जा रही है ,इसी पर देखिए हमारी आज की विशेष रिपोर्ट.

चुनाव से ठीक पहले चुनाव आयोग ने जब वोटरों का एफिडेविट मांगा, तो पश्चिम बंगाल में राजनीतिक भूचाल आ गया. एक्टिव मोड में आईं ममता दीदी ने चुनाव आयोग की इस कार्रवाई को भाजपा की साज़िश करार दिया और SIR की तुलना NRC से कर डाली. दरअसल, चुनाव आयोग ने बिहार और पश्चिम बंगाल दोनों ही प्रदेशों में SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) कराने का निर्देश दिया है, ताकि सभी पात्र नागरिकों का नाम मतदाता सूची में शामिल हो सके, मतदाता सूची में पारदर्शिता लाई जा सके और फर्जी वोटर बेनकाब हो सकें. लेकिन चुनाव आयोग का यह फरमान दीदी को कबूल नहीं है. उन्होंने चुनाव आयोग के इन नियमों को NRC से भी ज़्यादा खतरनाक बता दिया है. दीदी का मानना है कि ये नए नियम मुस्लिम समुदाय, प्रवासी मज़दूरों और ग्रामीण वोटरों को मतदाता सूची से हटाने की साज़िश हैं. लेकिन क्या सच में ऐसा है? आंकड़े बताते हैं कि बांग्लादेश सीमा से सटे मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर 24 परगना जैसे जिलों में बड़ी संख्या में बंगाली-भाषी मुस्लिम और हिंदू शरणार्थी रहते हैं. यह बात किसी से छिपी नहीं है कि ममता बनर्जी की जीत के पीछे मुस्लिम वोट बैंक की अहम भूमिका रही है. माना जाता है कि बांग्लादेश से अवैध रूप से भारत में आकर बसे अधिकतर लोग आज टीएमसी के कोर वोटर हैं. ऐसे में अगर राज्य में SIR प्रक्रिया सख्ती से लागू की जाती है, तो क्या दीदी का यही वोट बैंक खतरे में पड़ जाएगा?

इन हालातों में सबसे बड़ा सवाल यही है, क्या NRC पश्चिम बंगाल का भविष्य बनेगा, या फिर बंगाल चौथी बार भी दीदी को ही चुनेगा? इस मुद्दे पर देखिए भविष्यवाणी नीचे दिए गए वीडियो में

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