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होलिका दहन का शुभ मुहूर्त और पूजन तिथी क्यों है खास ?

सनातन धर्म में होली पूजन और होलिका का बहुत महत्व होता है कहते है इस दिन बुराई पर अच्छाई पर जीत हुई थी , इसलिए ये त्यौहार मनाया जाता है लेकिन क्या आप जानते कि यहीं पूजन आपको ऊपर भी उठा सकता है और समाज में नीचे भी गिरा सकता है, इसलिए होली मनाने से पहले होलिका दहन को पूरे विधि-विधान के साथ किया जाना बेहद ही जरुरी होता है तो हर जानकारी जानने के लिए देखिए धर्म ज्ञान की ये ख़ास रिपो

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हिन्दू धर्म में होलिका दहन को लेकर बहुत सारी कथाएँ जुड़ी हैं, इसलिए होलिका दहन को एक त्योहार के रूप में मनाया जाता है। वैसे तो हर त्योहार को पूरे विधि विधान के साथ पूजा जाता है, इसलिए होलिका दहन से पहले आपको ये जानना बेहद ही ज़रूरी है कि इस बार होलिका दहन 13 मार्च को मनाया जाएगा और होली का त्योहार 14 मार्च को बड़े ही धूम-धाम से मनाया जाएगा। तो चलिए जानते हैं होलिका दहन का शुभ मुहूर्त क्या है।

होलिका दहन का शुभ मुहूर्त

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हिन्दू पंचांग के अनुसार होलिका दहन फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है, जिसे हम घरेलू भाषा में छोटी होली भी कहते हैं और अगले दिन होली मनाई जाती है। लेकिन इस बार होली दहन पर भद्रा का साया रहने वाला है, जिसको लेकर लोगों के बीच असमंजस की स्थिति पैदा हो रही है। शुभ महूर्त - ज्योतिषाचार्यों के अनुसार 13 मार्च की सुबह 10 बजकर 35 मिनट से शुरू होकर 14 मार्च दोपहर 12 बजकर 25 मिनट तक पूर्णिमा तिथि रहने वाली है, और इसलिए 13 मार्च को ही होलिका दहन मनाया जाएगा। इसके साथ ही आपको बताते चलें कि इस बार होलिका दहन का शुभ मुहूर्त 13 मार्च को रात 11 बजकर 30 मिनट से शुरू होकर रात 1 बजे तक रहने वाला है।

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होलिका पूजन का शुभ मुहूर्त

होली मनाने से पहले ये जानना बेहद ही खास होता है कि होली पूजन का शुभ मुहूर्त 13 मार्च को सुबह 10 बजकर 35 मिनट से शुरू होगा। बताया जा रहा है कि यही वो समय है जब पूर्णिमा तिथि शुरू होगी, और इसके साथ ही 13 मार्च को दोपहर 01 बजकर 30 मिनट तक राहुकाल भी रहने वाला है। तो इस समय होली पूजन से बचें और होली पूजन 03 बजे के बाद करें। होली पूजन और होलिका दहन के बाद ही होली मनाई जा सकती है, इसलिए इस मुहूर्त को ध्यान में रखकर ही पूजा करें।

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ये तो रही होलिका दहन और होलिका पूजन की बात, तो अब बात कर लेते हैं कि...

होलिका दहन के दौरान किन चीजों को ध्यान रखें

होलिका दहन इसलिए किया जाता है क्योंकि इस दिन हिरण्यकश्यप की बहन होलिका आग में जलकर राख हुई थी, इसलिए इसे बुराई पर अच्छाई का प्रतीक भी माना जाता है। वहीं हमें होलिका दहन के दौरान कुछ चीजों को भी ध्यान में रखना चाहिए।

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वैसे होलिका दहन के दौरान कई चीजों को जलती अग्नि में डाला जाता है, लेकिन डालते वक्त ये ध्यान रखें कि कोई भी चीज जूठी या गंदी न हो।

टूटी गेहूं की बालियाँ

होलिका दहन की जलती आग में टूटी हुई गेहूं की बालियाँ न डालें। ध्यान रखें कि बालियाँ सुखी और मुरझाई न हों। अगर आप ऐसा करते हैं, तो न केवल दुर्भाग्य के शिकार हो सकते हैं, बल्कि आपको रोज़ी-रोटी का संकट भी झेलना पड़ सकता है।

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गिला नारियल

वैसे गीला नारियल पूजा में हमेशा इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन होलिका दहन में इसका इस्तेमाल करना वर्जित है। गीला नारियल डालने से घर की सुख-समृद्धि खत्म होती है और साथ ही घर में दरिद्रता का वास भी होता है।

टूटा-फूटा समान

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टूटा-फूटा सामान डालना भी होलिका दहन में वर्जित है, जैसे कि टूटा सोफ़ा, टूटा पलंग, या फिर टूटी अलमारी। ऐसा करने से शनि देव और राहु-केतु अशुभ फल देते हैं, जो हमारे लिए नुकसानदायक हो सकता है, और शनि देव का क्रोध तो आप जानते ही हैं, इसलिए इन सभी चीजों को डालने से बचना चाहिए।

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