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डाकुओं का वो मंदिर जहां आज भी क्यों चढ़ाई जाती है ढाई प्याले शराब ?

ऐसे ही कई एक प्राचीन परंपरा को अपने अंदर छुपाए हुए एक मंदिर राजस्थान के नागौर जिले में स्थित भंवाल माता मंदिर है. जहां प्रसाद में लड्डू या फल नहीं बल्कि शराब चढ़ाया जाता है. क्या है इस मंदिर का रहस्य क्यों यहां प्रसाद में फल चढ़ाया जाता है चलिए जानते है.

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राजस्थान में कई रहस्यमयी मंदिर हैं. इसीलिए इसे अध्यात्म और धर्म की नगरी भी कहा जाता है. राजस्थान में कई ऐसे मंदिर हैं जिनमें अनोखी कहानियों के साथ-साथ लोगों की आस्था और विश्वास से जुड़ी कई मान्यताएं भी हैं. ऐसे ही कई प्राचीन परंपराओं को अपने अंदर छुपाए हुए एक मंदिर राजस्थान के नागौर जिले में स्थित है. भंवाल माता मंदिर में जहां प्रसाद में लड्डू या फल नहीं, बल्कि शराब चढ़ाई जाती है. क्या है इस मंदिर का रहस्य, क्यों यहां प्रसाद में शराब चढ़ाई जाती है, चलिए जानते हैं.

राजस्थान के नागौर जिले में स्थित है भंवाल माता मंदिर. यह मंदिर अपने ढाई प्याला शराब चढ़ाने की अनूठी प्रथा के लिए जाना जाता है. इस मंदिर में मां भंवाल की पूजा की जाती है. माता भंवाल को मां काली का शक्तिशाली रूप माना जाता है. इस मंदिर में देश ही नहीं, विदेशों से भी लोग पहुंचते हैं. जो भी यहां पहुंचता है, यहां की शराब चढ़ाने की परंपरा को जानकर हैरान रह जाता है. क्या है इसके पीछे की कहानी, हम आपको बताते हैं.

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क्या है मंदिर की प्रथा

यहां आने वाले भक्त चांदी के प्याले को शराब से भरकर भंवाल देवी मां के सामने कर उन्हें प्रसाद ग्रहण करने के लिए आग्रह करते हैं. ऐसी मान्यता है कि देर में प्याले से शराब गायब हो जाती है. ऐसा तीन बार किया जाता है. कहा जाता है कि तीसरी बार प्याला आधा भरा रह जाता है क्योंकि माता ढाई प्याला शराब ही ग्रहण करती हैं.

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कैसे बना था मंदिर

कथा के अनुसार एक डाकुओं के दल ने एक गांव को लूटकर भाग रहे थे. तभी राजा के सैनिकों से बचकर माता के मंदिर में छुप गए. तभी डाकुओं ने मां के सामने अरदास लगाई. तब भंवाल माता ने राजा की फौज को भेड़-बकरियों में बदल दिया. उसके बाद डाकुओं ने माता का विशाल मंदिर बनवाया और पूजा-अर्चना करने लगे. मंदिर में लगे प्राचीन शिलालेख के अनुसार यह मंदिर 12वीं शताब्दी से भी पुराना है. इसके अलावा यह मंदिर लाल पत्थरों से निर्मित है. इस मंदिर की गिनती राजस्थान के प्रसिद्ध शक्तिपीठों में होती है.

इस मंदिर में दो माताओं के मंदिर विराजमान हैं

मंदिर में पूजा के लिए गर्भगृह में माता की दो मूर्तियां स्थापित हैं. दाएं ओर ब्रह्माणी माता हैं, जिन्हें मीठा प्रसाद चढ़ाते हैं. बाएं ओर दूसरी प्रतिमा काली माता की है, जिनको शराब चढ़ाई जाती है. लाखों भक्त यहां अपनी मन्नत लेकर आते हैं.

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यहां एक और नियम भी है. जो भक्त माता के समक्ष जाते हैं, उनके पास अगर बीड़ी, सिगरेट, जर्दा, तंबाकू और चमड़े की चीज़ हो तो मां प्रसाद ग्रहण नहीं करती हैं. भंवाल माता मंदिर में यह प्रथा विशेष रूप से नवरात्रि और अन्य शुभ अवसरों पर प्रचलित है. यहां आए हर भक्त का कहना है कि सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है.

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