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संतान प्राप्ति के लिए ऋषि पंचमी का व्रत होता है बेहद खास, लेकिन इस दौरान भूलकर भी न करें ये 9 गलतियां वरना हो सकता है अनर्थ
मंदिर में सप्त ऋषियों की तस्वीर जरूर लगा लें. उसके बाद उनकी तस्वीर के सामने फूल, दिया और धूप जलाकर साफ पानी से भरा एक कलश स्थापित करें.
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हर वर्ष भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को आने वाला ये व्रत सनातन धर्म में खास महत्व रखता है. व्रत को ऋषि पंचमी व्रत के नाम से जाना जाता है. मान्यता है कि इस दिन व्रत को करने से जाने-अनजाने में हुई गलतियों का प्रायश्चित हो जाता है. साथ ही जो महिलाएं संतान की प्राप्ति करना चाहती हैं वो इस व्रत को जरूर करें. लेकिन इस बार इस व्रत को करने का शुभ मुहूर्त क्या है? किस विधि से पूजा-अर्चना करनी चाहिए? साथ ही किन गलतियों को करने से बचना चाहिए ताकि इस व्रत का नकारात्मक प्रभाव हमारे जीवन पर न पड़े. जानें सब कुछ...
ऋषि पंचमी का शुभ मुहूर्त
हिन्दू पंचांग के अनुसार इस बार ऋषि पंचमी की शुभ तिथि 27 अगस्त को दोपहर 3 बजकर 44 मिनट से शुरू होकर 28 अगस्त शाम 5 बजकर 56 मिनट तक रहने वाली है. इसलिए उदया तिथि के अनुसार ये व्रत 28 अगस्त को ही रखा जायेगा. वहीं इस व्रत में पूजन का शुभ मुहूर्त 28 अगस्त को सुबह 11 बजकर 5 मिनट से लेकर दोपहर 1 बजकर 39 मिनट तक रहने वाला है.
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ऋषि पंचमी पर किस तरह करें पूजन?
इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि कर लें. मंदिर की सफाई के बाद सभी देवी-देवताओं पर गंगाजल छिड़क दें. मंदिर में सप्त ऋषियों की तस्वीर जरूर लगा लें. उसके बाद उनकी तस्वीर के सामने फूल, दिया और धूप जलाकर साफ पानी से भरा एक कलश स्थापित करें. उसके बाद आप अपनी इच्छानुसार पूजा कर सकते हैं. फिर कथा पढ़ें और उसके बाद अपने मंगल की प्रार्थना कर पूजा में चढ़ाया हुआ प्रसाद अपने परिवार में बांट दें.
व्रत के दौरान भूलकर भी न करें ये 9 गलतियां
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- पूजा करते समय शरीर और मन साफ रखें.
- किसी को भी अपशब्द न कहें.
- साधु-संतों को भोजन ज़रूर कराएं.
- पूरा दिन शांत रहकर इस व्रत की कथा सुनें.
- पूरे दिन में कभी भी मांसाहारी भोजन भूलकर भी न करें.
- पूजा जिस तरह से बताई गई है उसी तरह करें.
- घर में अशांति बिल्कुल भी ना फैलाएं.
- व्रत के दौरान झूठ बोलने से भी बचें.
- इस दौरान दूसरों की बुराई करने से भी बचें.