Advertisement
शुक्रवार व्रत क्यों है खास? जानें लक्ष्मी कृपा पाने का शुभ समय और सही विधि!
आज के दौर में हर कोई चाहता है कि उसके पास अच्छा घर हो, बड़ी गाड़ी हो और बहुत सारा पैसा हो. साथ ही मां लक्ष्मी की कृपा भी बनी रहे. लेकिन कई बार लोगों को पता नहीं होता कि अपनी इन इच्छाओं की पूर्ति के लिए क्या करना चाहिए. तो ऐसे में शुक्रवार का व्रत आपके लिए लाभदायक हो सकता है. इस व्रत को कैसे, कब शुरू करना है चलिए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं…
Advertisement
मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 21 नवंबर दोपहर 2 बजकर 47 मिनट तक रहेगी. इसके बाद द्वितीया तिथि शुरू हो जाएगी. इस दिन सूर्य और चंद्रमा वृश्चिक राशि में रहेंगे. द्रिक पंचांग के अनुसार, शुक्रवार को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 46 मिनट से शुरू होकर दोपहर 12 बजकर 28 मिनट तक रहेगा और राहुकाल का समय सुबह 10 बजकर 47 मिनट से शुरू होकर दोपहर 12 बजकर 7 मिनट तक रहेगा. इस दिन कोई विशेष पर्व नहीं है, लेकिन वार के हिसाब से आप शुक्रवार का व्रत रख सकते हैं.
शुक्र ग्रह को मजबूत करने के लिए क्या करें?
ब्रह्मवैवर्त और मत्स्य पुराण के अनुसार, शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी और संतोषी माता और शुक्र ग्रह की आराधना करनी चाहिए. इस तिथि पर विधि-विधान से पूजा करने से जातक के जीवन में सुख-समृद्धि, धन-धान्य और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती हैं.
Advertisement
शुक्रवार का व्रत कैसे शुरु करें?
Advertisement
यह व्रत शुक्र ग्रह को मजबूत करने और उससे जुड़े दोषों को दूर करने के लिए भी रखा जाता है. इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर माता रानी भक्तों की हर मनोकामना पूरी करती हैं और सभी कष्ट दूर हो जाते हैं. अगर कोई भी जातक व्रत शुरू करना चाहता है तो किसी भी माह के शुक्ल पक्ष के पहले शुक्रवार से कर सकता है. आमतौर पर 16 शुक्रवार तक व्रत रखने के बाद उद्यापन किया जाता है.
किस तरह करें शुक्रवार को पूजा अर्चना?
Advertisement
यह भी पढ़ें
इस दिन विधि-विधान से पूजा करने के लिए जातक सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें. पूजा स्थल पर गंगाजल छिड़कें. एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछा लें और उस पर माता लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें. दीप जलाएं और फूल, चंदन, अक्षत, कुमकुम और मिठाई का भोग लगाएं. ‘श्री सूक्त’ और ‘कनकधारा स्तोत्र’ का पाठ करें. मंत्र जप करें, 'ऊं श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' और 'विष्णुप्रियाय नमः' का जप भी लाभकारी है.