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मार्गशीर्ष माह की शुरुआत में गंगा स्नान और दान क्यों है जरुरी? जानिए कैसे श्रीकृष्ण-मां लक्ष्मी की पूजा से मिलेगी सुख-समृद्धि!

मार्गशीर्ष माह की शुरुआत जैसे ही होती है, तो ऐसा कहा जाता है कि देवताओं की ऊर्जा पृथ्वी पर अधिक बढ़ जाती है. इस माह में किया गया स्नान, दान और व्रत कई गुना फल देता है. पुराणों में वर्णित है कि इस समय भगवान कृष्ण और मां लक्ष्मी की पूजा करने से भाग्य चमक उठता है और घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है. ऐसे में आप किस तरह शुभ मुहूर्त पर पूजन कर सकते हैं. किन मंत्रों का जाप कर सकते हैं. चलिए जानते हैं.

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मार्गशीर्ष के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि गुरुवार को मार्गशीर्ष और मासिक कार्तिगाई है. इस दिन सूर्य तुला राशि में और चंद्रमा सुबह 11 बजकर 27 मिनट तक मेष राशि में रहेगा. इसके बाद वृषभ राशि में गोचर करेंगे. द्रिक पंचांग के अनुसार, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 43 मिनट से शुरू होकर दोपहर 12 बजकर 26 मिनट तक रहेगा और राहुकाल का समय दोपहर 1 बजकर 26 मिनट से शुरू होकर 2 बजकर 48 मिनट तक रहेगा. 

मार्गशीर्ष माह की शुरुआत में व्रत क्यों रखना चाहिए? 

मार्गशीर्ष माह- स्कंद, नारद और शिव पुराण में मार्गशीर्ष माह का उल्लेख मिलता है, जिसमें इस माह में धार्मिक अनुष्ठान और दान पुण्य का वर्णन किया गया है. स्कंद पुराण में मार्गशीर्ष में व्रत और ब्राह्मणों को भोजन कराने के महत्व के बारे में बताया गया है, जबकि शिव पुराण में अन्नदान और चांदी के दान को महत्वपूर्ण बताया गया है.

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भगवान कृष्ण और मां लक्ष्मी की पूजा क्यों करनी चाहिए?  

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इस माह में भगवान कृष्ण और मां लक्ष्मी की उपासना करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है. इस माह में स्नान, पूजा, जप-तप और दान करने का विधान है, जिससे घर में सुख-समृद्धि का आगमन होता है. साथ ही सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करने से सभी तरह के दोषों से मुक्ति मिलती है. मार्गशीर्ष माह सतयुग के आरंभ का प्रतीक भी है, जिससे इस माह की महत्ता और भी बढ़ जाती है.

इस दौरान गंगा स्नान करने से क्या लाभ होता है? 

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मान्यता है कि इस महीने में गंगा स्नान, श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ, 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का जाप और भगवान श्री कृष्ण की उपासना करना विशेष फलदायी माना जाता है. संध्याकाल में भी भगवान की उपासना करना अनिवार्य है. साथ ही बाल-गोपाल को भोग लगाते समय तुलसी का पत्ता जरूर शामिल करें. ऐसा करना शुभ माना जाता है. 

हर महीने क्यों मनाया जाता है मासिक कार्तिगाई? 

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मासिक कार्तिगाई- पुराणों के अनुसार मासिक कार्तिगाई, जिसे मासिक कार्तिगाई दीपम भी कहते हैं. यह त्योहार हर महीने तब मनाया जाता है, जब चंद्र मास के दौरान कार्तिगाई नक्षत्र प्रबल होता है. यह भगवान शिव और उनके पुत्र भगवान मुरुगन (कार्तिकेय) को समर्पित है. इसे अंधकार पर प्रकाश की विजय के रूप में मनाया जाता है. मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव की पूजा करने और दीप जलाने से जीवन से नकारात्मकता दूर होती है.

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