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आखिर क्यों करवा चौथ में इस्तेमाल होता है मिट्टी का करवा? जानें इससे जुड़ी पौराणिक कथा और उपाय

Karwa Chauth 2025: सनातन धर्म में करवा चौथ का बहुत महत्व है. इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत कर चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करती हैं. ऐसे में आपने अक्सर देखा होगा कि इस दौरान मिट्टी के करवे का ही उपयोग किया जाता है. लेकिन ऐसा क्यों किया जाता है?

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करवा चौथ का दिन सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद ही खास होता है क्योंकि इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखकर अपने खुशहाल वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं. लेकिन आपने हमेशा देखा होगा कि जब भी महिलाएं चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करती हैं तो मिट्टी के करवे का ही उपयोग करती हैं. ऐसा क्यों किया जाता है? क्या आपके मन में भी सवाल उठ रहा है तो चलिए जानते हैं…

माना जाता है कि मिट्टी के करवे का उपयोग करके ही वैवाहिक जीवन में मिठास और खुशहाली आती है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मां सीता और माता द्रौपदी ने भी करवा चौथ के दौरान चंद्रदेव को अर्घ्य देने के लिए मिट्टी के करवों का ही उपयोग किया था. इसलिए भी महिलाएं इन मान्यताओं के चलते मिट्टी के करवे का इस्तेमाल करती हैं.

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सनातन धर्म में करवा किस चीज का प्रतीक?

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हिंदू धर्म में करवा पंच तत्वों का प्रतीक माना गया है. जो कि जल, मिट्टी, अग्नि, वायु और आकाश से मिलकर बना है. इसका उपयोग जीवन को सुखी और समृद्ध बनाता है. साथ ही मिट्टी के करवे को पवित्रता का प्रतीक भी माना जाता है. ऐसे में इसका इस्तेमाल पूजा में सकारात्मक ऊर्जा को भी बढ़ाता है. पति-पत्नी के रिश्तों में प्रेम, समर्पण और त्याग की भावना भी बढ़ती है.

करवा चौथ से जुड़ी पौराणिक कथा

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दरअसल करवा चौथ व्रत की कथा महाभारत काल से जुड़ी हुई है. पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, जब पांडवों के जीवन पर संकट के काले बादल मंडरा रहे थे तब भगवान कृष्ण ने माता द्रौपदी को करवा चौथ व्रत रखने की सलाह दी थी. इसके बाद द्रौपदी ने पूरे नियम के साथ करवा चौथ की पूजा की. इस व्रत के प्रभाव से पांडवों के जीवन पर से सभी संकट दूर हो गए थे. इसके अलावा करवा चौथ के व्रत से जुड़ी एक और पौराणिक कथा बेहद प्रचलित है. जैसे कि एक बार देवताओं और असुरों के बीच भीषण युद्ध छिड़ गया. युद्ध में सभी देवताओं को संकट में देख उनकी पत्नियां विचलित होने लगीं. इसके बाद वे सभी भगवान ब्रह्मा के पास पहुंचीं और उनसे गुहार लगाई. तब ब्रह्मा जी ने पत्नियों को करवा चौथ व्रत रखने को कहा. सभी ने कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को करवा चौथ का व्रत किया. करवा माता ने देवताओं के प्राणों की रक्षा की और वे युद्ध में विजय हुए.

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करवा चौथ में इन उपायों से बढ़ेगी नजदीकियां!

  • चंद्रमा को अर्घ्य देते समय ‘ॐ सोमाय नमः’ मंत्र का जाप जरूर करें. इससे वैवाहिक जीवन में शांति बनी रहती है.
  • करवा चौथ के दिन पूर्ण श्रृंगार करने से सौभाग्य बढ़ता है और वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है.
  • इस दौरान आप लाल रंग के कपड़े जरूर पहनें. इससे प्रेम बढ़ता है साथ ही यह शुभ भी माना जाता है.
  • इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा भी जरूर करें. इससे आपका रिश्ता मजबूत होगा.
  • इस दिन अपने बड़ों का आशीर्वाद भी जरूर लें.
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