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2025 के आख़िरी सूर्यग्रहण में कौन सी 1 राशि सबसे ज़्यादा परेशान रहेगी ?

पिछले 6 महीनों में 6 बड़े हादसे भारत के सामने हैं, ऐसे में 3 महीने बाद का साल का अंतिम सूर्य ग्रहण क्या भारतीयों के लिए ख़तरनाक है ? ये जानने के लिए देखिये धर्म ज्ञान.

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धर्म ग्रंथों में ग्रहण का साया कभी भी शुभ नहीं माना गया…हमेशा ग्रहण का प्रभाव देखा गया है, क्योंकि ग्रहण की वजह से तबाही मची है.इसके पीछे का ज्योतिष पहल कहता है,  सूर्य पिता कहलाए गये और चंद्रमा माँ के समान मानी गई और जब-जब ग्रहण के साये में सूर्य और चंद्रमा आए.दुनिया ने कंपन महसूस की प्राकृतिक आपदाओं ने कोहराम मचाया और देखते ही देखते ग्रहण के साये में मानवजाति का विनाश हुआ.विज्ञान भले ही ग्रहण को एक खगोलीय घटना के चश्मे से देखें, लेकिन धर्म ग्रंथों से लेकर ज्योतिष विद्या में ग्रहण को अशुभता से जोड़ा गया है और ऐसा इसलिए क्योंकि ग्रहों के राजा सूर्य, जिन्हें आत्मा, पिता, मान-सम्मान और पद प्रतिष्ठा का कारक माना गया है, तो वहीं चंद्रमा को मन से जोड़ा गया है.माँ के समान माना गया है, शीतला से जोड़ा गया है और जब इन्हीं पर राहूँ-केतु की छाया पड़ती है…तो आम जनमानस के जीवन में उथल-पुथल मचनी शुरु हो जाती है ताज़ा उदाहरण 2019 के आखिर में पड़ने वाले दो ग्रहण का ले लीजिये…14 दिसंबर को सूर्यग्रहण और 26 दिसंबर को चंद्रग्रहण था..शास्त्रों अनुसार पौष मास पर आए गए दो ग्रहण एक पख्वाड़े में सूर्य और चंद्र अगर एक साथ आ जाए, तो धरती पर एक बड़ी आपदा आती है।नतीजतन 3 महीने बाद कोरोना ने दुनिया में दस्तक दी और उसके बाद ही लोगों के मरने का सिलसिला शुरु हो गया।इस कड़ी में क्या 2025 के अंतिम सूर्य ग्रहण को नकारात्मक दृष्टि से देखा जाना चाहिए या नहीं ?

देश पिछले 6 महीनों में 6 बड़े हादसे झेल चुका है.जनवरी में महाकुंभ भगदड़, फ़रवरी में दिल्ली रेलवे स्टेशन भगदड़, मार्च में पटाखा फ़ैक्ट्री में अग्निकांड, अप्रैल में पहलगाम आतंकी हमला, मई में आईपीएल बेंगलुरु भगदड़ और जून में अहमदाबाद प्लेन क्रैश और अब जब जुलाई की शुरुआत हो रही है, तो ऐसे में अभी से आम जनमानस ग्रहण की काली छाया से भयभीत है.दरअसल लगभग 3 महीने बाद 21 और 22 सितंबर को साल का आख़िरी सूर्यग्रहण लगने जा रहा है.हालाँकि ये ग्रहण भारतीयों को नहीं दिखेगा, जिस कारण सूतक भी मान्य नहीं होगा.लेकिन ज्योतिष चश्मे से ग्रहण का असर देखा जाता है।जो कि इस ग्रहण को आंशिक बताया जा रहा है और ज्योतिषीय स्थिति में ग्रहण कन्या राशि में 29 डिग्री और 5 मिनट तक रहेगा.इसलिए ग्रहण की काली छाया कन्या राशि पर अत्याधिक प्रभावी रहेगी.मतलब ये कि ग्रहण काल तक कन्या राशि की परेशानियाँ बनी रहेगी और ग्रहण का इसका नकारात्मक  प्रभाव पड़ेगा.ज्योतिष कहती है, सूर्य ग्रहण व्यक्ति को मानसिक और भावनात्मक चोट पहुँचाता है.व्यक्ति के अंदर भ्रम और अनिश्चितता बनी रहती है।इससे मानसिक भटकाव, चिंता और निर्णय लेने में कठिनाई होती है.स्वास्थ्य पर इसका सीधा असर पड़ता है, क्योंकि सूर्य को जीवन शक्ति का कारक माना गया है.और जब ग्रहण ही व्यक्ति की जीवन शक्ति पर लगे, तो इसका सीधा असर आंखें, हृदय और पाचन तंत्र पर पड़ता है.

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ऐसा नहीं है कि ग्रहण का संबंध सिर्फ़ ज्योतिष से देखा जाता है, बल्कि इसके पीछे की पौराणिक कथा मत्स्य पुराण में मौजूद है, जिसके अनुसार कहा जाता है।एक बार स्वरभानु नाम का राक्षस अमृत पीने की लालसा में रूप बदलकर सूर्य और चंद्र के बीच  बैठ गया लेकिन भगवान विष्णु ने उसे पहचान लिया, लेकिन तब तक स्वरभानु अमृत पी चुका था और अमृत उसके गले तक आ गया था.तभी भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन से राक्षस का सिर धड़ से अलग कर दिया, लेकिन यह राक्षस अमृत पी चुका था इसलिए मरकर भी जीवित रहा.इसका सिर राहु कहलाया और धड़ केतु।कथा के अनुसार, उस दिन से जब भी सूर्य और चंद्रमा पास आते हैं, राहु-केतु के प्रभाव से ग्रहण लग जाता है.

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