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इस्लाम के गढ़ Saudi Arab में आई कैसी मुसीबत अचानक वहां से क्यों भागने लगे मुसलमान ?

हिलने लगा है Islam का गढ़, सऊदी अरब पर सबसे बड़ी आफ़त ! सऊदी छोड़कर क्यों भागे मुसलमान ? सऊदी अरब का सच क्या है ?

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खाड़ी देशों की दुनिया में सऊदी अरब इकलौता ऐसा इस्लामिक देश है, जहां की ज़मीन पर जन्नत का दरवाज़ा खुलता है। यहाँ का मक्का मदीना मुसलमानों का एक ऐसी तीर्थ स्थल है, जहां जाने की हसरत दुनिया के हर मुसलमान के दिल में होती है। इस्लाम की दुनिया में मक्का मदीना क्या मायनें रखता है, इसका अंदाज़ा इसी से लगाइये, आज से लगभग 1400 साल पहले मक्का की बुनियाद रखने वाले कोई और नहीं बल्कि ख़ुद पैग़ंबर मोहम्मद रहे चारों तरफ़ मस्जिदों से घिरे मक्का में होने वाली हज यात्रा में लाखों की संख्या में मुसलमानों की भीड़ उमड़ती है। यहाँ आकर अल्ला की इबादत करना, मक्का में मौजूद पैगंबर के पद चिन्हों के दर्शन करना, शैतान को पत्थर मारना हज यात्रा का हिस्सा बनना प्रत्येक मुसलमान की दिली ख्वाहिश होती है लेकिन सऊदी की धरती पर अचानक से ऐसा क्या हो गया है , जो आज ख़ुद के मुल्क से मुसलमान भाग रहे हैं। क्या ये क्राउन प्रिंस सलमान पर अल्लाह का कोई अज़ाब  है या फिर भ्रम फैलने की कोशिश ?  सच क्या है, इस पर देखिये हमारी ये ख़ास रिपोर्ट 

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आज का सऊदी अरब अब पहले जैसा नहीं रहा क्योंकि जिस सऊदी अरब ने दशकों से ख़ुद को कट्टरता की बेड़ियों में जकड़ा हुआ था। उन बेढ़ियों को क्राउन प्रिंस मोहम्मन बिन सलमान ने काटा है। अलग-थलग रहने वाले सऊदी अरब को धार्मिक और समाजिक बंधनों से मुक्त किया है। आज का सऊदी अरब प्रिंस सलमान के विजन 2030 पर चल रहा है। मुल्क की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्हें डाइविंग से लेकर शैक्षिक और यात्रा विकल्पों में आज़ादी दी गई। एक नये बदलाव की सोच रखने वाले सऊदी प्रिंस सलमान आज के सऊदी अरब को तरक़्क़ी की पटरी पर दौड़ा रहे हैं..दिन पर दिन आधुनिक बना रहे हैं। टूरिज़्म को बढ़ावा दे रहे हैं, मदीना में सिनेमाघर खोल दिया है, संस्कृति और मनोरंजन को बढ़ावा दे रहे हैं। अब सऊदी में 21 साल से ज्यादा की महिलाओं को घर से बाहर निकलने की स्वतंत्रता है हालाँकि मुल्क के जिन मौलवी और कट्टरपंथी ताक़तों को प्रिंस सलमान के फ़ैसलों से परेशानी हो रही है। जो लोग इसका विरोध कर रहे हैं, उन पर सख़्त कार्रवाई हो रही है। प्रगतिशील सऊदी अरब को आधुनिकता का मुखौटा पहनाने के बीच जो कोई भी आ रहा है, उसे प्रिंस सलमान किसी भी क़ीमत पर छोड़ नहीं रहे हैं और शायद यही कारण है, जिसके चलते ख़ुद के मुल्क को सऊदी मुसलमान छोड़ रहे हैं। 

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दरअसल एक न्यूज़ वैबसाइट पर प्रकाशित एक रिपोर्ट में ये दावा किया गया है कि सऊदी अरब में मुसलमानों का पलायन हो रहा है, बक़ायदा आँकड़ा दिया है, ये बताया गया है कि  "2013 से 2023 के बीच देश छोड़ने वालों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है. 2013 में जहां 575 सऊदी नागरिकों ने 14 देशों से शरण मांगी थी, वहीं 2023 में यह संख्या बढ़कर 2,100 हो गई है।" 

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इन आँकड़ों की और इस पूरी ख़बर की पुष्टि हम नहीं करते हैं, लेकिन अगर इसमें कही 1 प्रतिशत भी सच्चाई है, तो क्या इसे अल्लाह का अज़ाब समझना चाहिए। सबसे बड़ा सच यही है कि परिर्वतन प्रकृति का नियम है। इसमें कोई शक नहीं है कि आज का सऊदी अरब अपनी कट्टरवादी सोच को पीछे छोड़कर नये बदलावों के साथ आगे बढ़ रहा है, जिसका विरोध होगा और ये लाज़मी भी है..लेकिन अगर मुल्क की बेहतरी के लिए परिवर्तन किया गया है, तो इसमें गलत क्या है। सऊदी अरब में होने वाले बदलाव क्या बेहतरी के लिए हैं। 


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