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अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बॉर्डर से भारत का क्या है खास कनेक्शन?

या आप जानते हैं अफ़ग़ानिस्तान की इसी मिट्ठी पर अफ़ग़ान-पाक बार्डर सनातन का सबसे बड़ा केंद्र है और इसी केंद्र से दुनिया के 6 देशों में तबाही मच सकती है , जिस कारण ये बॉर्डर पीएम मोदी की थर्ड आई में होगा ?

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अशरफ़ गनी अफ़ग़ानिस्तान से क्या भागे, मुल्क पर तालिबान का क़ब्ज़ा हो गया. भले ही अशरफ़ घनी की नज़रों में तालिबान की वापसी का कारण अमेरिका हो, लेकिन तालिबान के शासन को मान्यता देने वाला पहला देश अमेरिका नहीं, बल्कि रूस है.हालाँकि तालिबान की वापसी से मुल्क में शांति अब तक नहीं आ पाई और इसके पीछे का कारण सदियों पुराना गांधारी का दिया हुआ श्राप बताया जाता है, जो आज तक अफगानी लोग भुगत रहे हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं अफ़ग़ानिस्तान की इसी मिट्ठी पर अफ़ग़ान-पाक बार्डर सनातन का सबसे बड़ा केंद्र है और इसी केंद्र से दुनिया के 6 देशों में तबाही मच सकती है , जिस कारण ये बॉर्डर पीएम मोदी की थर्ड आई में होगा ?

जिस अफ़ग़ानिस्तान को हड़पने का ख़्वाब पाकिस्तानी हुकूमत आज भी देखती है..उसका संबंध भारत से अबका नहीं, बल्कि 5 हज़ार साल पुराना है.कहते हैं महाभारत युद्ध की नींव अफ़ग़ानिस्तान से ही रखी गई, क्योंकि आज का अफ़ग़ानिस्तान महाभारत काल में गांधारी साम्राज्य था…यहीं पर आज से 5500 साल पहले राजा सुबाला ने राज किया ,  उन्ही की बेटी का नाम गंधारी था जिनकी शादी हस्तिनापुर के राजा धृतराष्‍ट्र से हुई. गांधारी के भाई शकुनी थे और अपने पिता की मृत्‍यु के बाद गांधार साम्राज्‍य की सत्‍ता उनके हाथ में आई. जो कि रणभूमि में गांधारी को अपने 100 पुत्रों को खोना पड़ा , जिस कारण उन्होंने ख़ुद के भाई शकुनी को ये श्राप दिया कि जिस तरह तुमनें हस्तिनापुर में गृह युद्ध और विनाश करवाया, उसी तरह तुम्हारे अपने राज्य गांधार जो कि आज का अफगानिस्तान, उसमें कभी शांति नहीं रहेगी.हालाँकि कुछ लोग ऐसा भी मानते हैं कि महाभारत के युद्ध के बाद पांडवों से हार के बाद कौरव वंश के कई लोग गांधार में रहने लगे थे, बाद में वो धीर-धीरे इराक और सऊदी अरब में चले गए थे. फिर जैसे-जैसे बौद्ध धर्म का यहाँ प्रसार हुआ,  गांधार में भगवान शिव की पूजा बंद हो गई. इसके बाद मौर्य साम्राज्‍य के राजाओं का गांधार पर राज हो गया. इसके बाद फिर यहां पर मुगलों का हमला हुआ. गजनवी ने 11वीं सदी में इस पर कब्‍जा किया, जिसके बाद अफगानिस्‍तान एक मुस्लिम देश में तब्दील हो गया. लेकिन क्या आप जानते हैं, इसी अफ़ग़ानिस्तान की धरती पर पाकिस्तान से सटा बार्डर सनातन का सबसे बड़ा केंद्र है , जहां से 6 मुल्कों में तबाही मच सकती है.

दरअसल अफ़ग़ान-पाकिस्तान बॉर्डर पर दुर्गम - रहस्यमयी पर्वत श्रृंखला फैली हुई है और हिंदू कुश पर्वत के नाम से जानी जाती है. इसी हिंदू कुश पर्वत पर भारत की नज़रें रहती हैं, क्योंकि इस पर्वत का पौराणिक इतिहास सनातन से जुड़ा है और ज़िक्र धर्म ग्रंथों में मौजूद है.इन्हीं पर्वत श्रृंखला पर भगवान राम के पुत्र कुश ने तपस्या की, यही से उन्हें अमृत दीक्षा मिली . जिस कारण ये पर्वत हिंदू कुश कहलाया मतलब भारत का अंतिम सिरा. आज भी इसी हिंदू कुश पर्वत पर ऋशि-मुनियों की मौजूदगी का एहसास होता है और यही से पूरे अफ़ग़ानिस्तान में प्राचीन हिंदू मंदिरों के सबूत मिलते हैं और आज का यही हिंदू कुश पर्वत 10 प्रमुख नदियों का स्तोत्र है और 200 करोड़ लोगों की लाइफ़ लाइन.

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हिंदू कुश पर्वत पर बिछी ग्लेशियर की यही चादर 6 मुल्कों की ज़िंदगी है और आज इसी ज़िंदगी पर ख़तरे के बादल भी मंडरा रहे हैं, क्योंकि धरती का तापमान बढ़ रहा है.अनुमान लगाया गया है कि

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हिंदू कुश हिमालय और काकेशस में 75% बर्फ पिघल सकती है.यूरोपियन आल्प्स, रॉकीज़  और आइसलैंड जैसे क्षेत्रों में 2 डिग्री बढ़ोतरी होने पर 85-90% बर्फ खत्म हो जाएगी. स्कैंडिनेविया में तो सारी बर्फ गायब हो सकती है.

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ख़तरा इस बात का है कि बर्फ पिघलने से नदियों में पहले बाढ़ आएगी, फिर पानी की कमी होगी, फिर समुद्र का स्तर बढ़ेगा, जिससे तटीय इलाकों में खतरा बढ़ेगा और फिर पानी की कमी से फसलों और जैव-विविधता पर बुरा असर पड़ेगा…मतलब ये कि अगर हिंदू कुश का ग्लेशियर अत्याधिक पिघलता हैं, तो बाढ़ के कारण भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान और चीन में विध्वंसकारी पिक्चर नज़र आ सकती है.पानी से लेकर खेती और ऊर्जा पर संकट के बादल मंडरा सकते हैं. और इन्हीं सब हालातों को देखते हुए अफ़ग़ान-पाक बॉर्डर पर मोदी सरकार की नज़र रहती है, ताकी समय रहते भविष्य ने आने वाले ख़तरे को भाँप सके. भविष्य में क्या हो सकता है, ये तो जान लिया, लेकिन अतीत में 9 साल पहले जब अफ़ग़ानिस्तान की धरती उनकी नई संसद का उद्घाटन जब पीएम मोदी के हाथों हुआ, तब का क्या माहौल था…उन पुराने लम्हों की एक झलक ज़रूर देखियेगा.

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