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पुरी में प्रभु जगन्नाथ की दुनिया में अब क्या लिये जाएँगे गोवा वाले मज़े ?

पुरी में मौजूद प्रभु जगन्नाथ के भव्य मंदिर से महज़ 2 किलोमीटर की दूरी पर पुरी तट को क्या गोवा बनाने की तैयारी हो रही है, सच क्या है, देखिए इस वीडियो में।

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शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती, इस नाम से पूरा दुनिया वाक़िफ़ है, क्योंकि आम जनमानस इनकी कई बातों का अनुसरण करता है। कई दफ़ा अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहते हैं। बीते दिनों राम लला की प्राण प्रतिष्ठा में ना जाकर मीडिया की सुर्खियों में आ गये थे। न्यौते में सिर्फ़ एक व्यक्ति को साथ लाने पर काफ़ी भड़के थे। यहाँ तक कि प्राण प्रतिष्ठा की प्रक्रिया में पीएम मोदी की मौजूदगी पर भी सवाल उठाए थे और इस बात पर भी संदेह जताया था कि प्राण प्रतिष्ठा में शास्त्रों के नियमों का उल्लंघन हो सकता है। हालांकि बाद में इस पर सफ़ाई देते हुए उन्होंने कहा था कि:"मैं संत हूँ, सोच-समझकर राष्ट्र हित में कदम उठाता हूँ। राम और मोदी से मुझे कोई द्वेष नहीं है। वहाँ जाना पद के विपरीत था। अहंकार की बात नहीं है, पद की रक्षा करना हमारा दायित्व है।"

स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने भारत को हिंदू राष्ट्र बनाए जाने की माँग की है। खुलकर कहा कि हिंदू सिर्फ धर्म नहीं बल्कि जीवन शैली है, जो मानवता का पाठ पढ़ाती है। सहिष्णुता, अहिंसा, और समर्पण सिखाती है। ऐसे में देश जिस तरह से बदल रहा है, उससे कहा जा सकता है कि आने वाले साढ़े तीन सालों यानी साल 2025 के अंत तक सभी भारतवासी सकारात्मक सोच रखने लगेंगे। नकारात्मक विचारों को छोड़कर देश हित में काम करेंगे। धर्म से नहीं बल्कि विचारों और स्वभाव से हिंदू हो जाएंगे और भारत हिंदू राष्ट्र बन जाएगा।

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हालांकि देश की मौजूदा राजनीति को देखते हुए स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने यह भी कहा कि सदन में किसी भी विषय का कभी भी आँख मूंदकर विरोध नहीं होना चाहिए। अगर विपक्ष मज़बूत होता है, तो सत्तापक्ष को सावधान होकर शासन करना चाहिए, विपक्ष का बलवान होना ज़रूरी है।

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भारत के मुसलमान का सच बताते हुए उन्होंने कहा कि "अल्लाह" शब्द संस्कृत से लिया गया और इन सभी के पूर्वज श्रीहरि विष्णु हैं।शंकराचार्य ने पीएम मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि वह व्यक्ति अपना घर भरने वाला नहीं है। उनकी ख्याति चारों तरफ फैल रही है। इसके अलावा, वह देश को लूटने वाले नहीं हैं।

पुरी-कोणार्क समुद्र तट पर बीच शैक बनाने के ओडिशा सरकार के प्रस्ताव का विरोध किया। प्रस्ताव के विरोध के साथ ही यहाँ श्री जगन्नाथ मंदिर के पास करीब 40 सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों ने प्रदर्शन किया।

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नई आबकारी नीति में भाजपा सरकार के प्रस्ताव का विरोध करते हुए आंदोलनकारियों ने तीर्थ नगरी और समुद्र तट पर पूर्ण शराबबंदी की भी मांग की। राज्य सरकार के प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देते हुए शंकराचार्य ने संवाददाताओं से कहा, “जगन्नाथ धाम आध्यात्मिक खोज और आत्म-खोज का स्थान है, मनोरंजन का नहीं। पुरी बीच भजन, कीर्तन, और धार्मिक प्रवचनों के लिए समर्पित स्थान होना चाहिए। इसे मौज-मस्ती के लिए गंतव्य के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।”

समुद्र तट पर पर्यटकों को शराब परोसना शामिल है, लेकिन शंकराचार्य ने कहा कि इससे तीर्थ नगरी की आध्यात्मिक पवित्रता को नुकसान पहुंचेगा और जगन्नाथ संस्कृति का नाम खराब होगा। उन्होंने कहा कि दुनिया भर से लोग पर्यटक नहीं, बल्कि भक्त के रूप में पुरी आते हैं।

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शंकराचार्य ने 2021 में पिछली बीजद सरकार के इसी तरह के प्रस्ताव का भी विरोध किया था, जिसके बाद यह विचार साकार नहीं हो सका। मान्यता कहती है कि पुरी समुद्र को देवी लक्ष्मी का मायका माना जाता है और श्री नारायण हर अमावस्या के दिन वहाँ आते हैं। उन्होंने कहा कि समुद्र तट पर शराब की बिक्री अस्वीकार्य है।पुरी तट को एक अत्यंत महत्‍वपूर्ण हिंदू तीर्थ स्‍थल भी माना जाता है। पुरी तट को भगवान जगन्नाथ का निवास स्थल भी माना जाता है और शायद इसी कारण यहाँ अनेक तीर्थयात्री समुद्र में स्नान करने के लिए आते हैं। मंदिर से महज़ 2 किलोमीटर की दूरी पर पुरी तट मौजूद है।

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