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वैश्विक जंग के बीच काशी में सौहार्द की होली, हिंदू-मुस्लिम महिलाओं ने उड़ाया गुलाल, लगाया गले

वैश्विक तनाव के बीच वाराणसी होली के रंगों ने विश्व शांति का संदेश दिया. हिन्दू-मुस्लिम महिलाओं ने होली खेलकर नफरत को दकिनार किया और खून की होली खेलने वालों को खास संदेश दिया.

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ईरान और इजरायल नफरत की आग में जलकर खून की होली खेल रहे हैं और इधर काशी में मुस्लिम महिलाओं ने रंगों और गुलालों की होली खेलकर विश्व शांति का पैगाम दिया. मुस्लिम महिला फाउण्डेशन और विशाल भारत संस्थान के संयुक्त तत्वाधान में लमही के सुभाष भवन में गुलालोत्सव का आयोजन किया गया. 

ढोल की थाप पर होली के गीत, हंसी ठिठोली और जी भर के गारी और हवाओं में उड़ता गुलाल किसी भी धार्मिक नफ़रत को खत्म करने की कूवत रखता है. मुस्लिम देश धार्मिक नफरत के शिकार हैं और एक दूसरे को खत्म करने पर आमादा है. सड़कों पर बिखरा खून इतिहास भूगोल सब बदल रहा है. काशी की मुस्लिम महिलाओं ने होली खेलकर नफरत, हिंसा और कट्टरता को खत्म कर विश्व शांति का संदेश दिया. 

हिंदू महिलाओं ने मुस्लिम महिलाओं को लगाया सौहार्द का रंग

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महिलाओं ने कहा कि काश मुस्लिम देश भी होली मनाते तो गले मिलने की उम्मीद होती. भारत की संस्कृति रंगों की होली खेलकर गले मिलने का संदेश देती है, वहीं उनकी संस्कृति गला काटकर खून की होली खेलने को ही मजहब समझते हैं. हिन्दू महिलाओं ने अपने हाथों से मुस्लिम महिलाओं के चेहरे पर गुलाल लगाया, तो मुस्लिम महिलाएं कहा पीछे रहने वाली थीं, उन्होंने ने भी हवा में गुलाल उड़ाकर सबको सराबोर कर दिया. 

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गुलालोत्सव और होली की पोटली कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बड़कू हनुमान जी आश्रम के पीठाधीश्वर पंडित रिंकू महाराज ने अनाज बैंक की ओर से 300 बांसफोर, नट, मुसहर और मुस्लिम परिवार की महिलाओं को होली की पोटली और साड़ी वितरित कर होली की खुशी बढ़ा दी. 

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शुक्र है हम भारत में रहते हैं…

इस मौके पर मुस्लिम महिलाओं की सर्वोच्च नेता हनुमान चालीसा फेम नाज़नीन अंसारी ने कहा कि शुक्र है कि हम भारत में रहते हैं, जहां की संस्कृति में रंगों और गुलालों की होली खेली जाती है, वरना मुस्लिम देशों में तो खून की होली खेलने को ही मजहब बताते हैं. मुस्लिम देश भगवान राम और कृष्ण के मार्ग पर चले तभी उनके देश में शांति आएगी. हिंसा, कट्टरपंथ और नफरत ने पूरी दुनियां को सिर्फ आतंकवाद दिया है. प्यारे देश भारत ने सभी को शांति का मंत्र दिया है. एकता और भाईचारे के साथ प्रेम पर आधारित है हमारे देश के त्योहार, मजहब से चाहे कोई हों, लेकिन पूर्वजों और परम्पराओं से एक हैं. हम धर्म के नाम पर नफरत फैलाने वालों को कड़ी चुनौती देते हैं कि अभी भी वक्त है सुधर जाओ वरना मुस्लिम देशों के हालात देख लो. रंगों की होली खेलना हराम नहीं है, बल्कि खून की होली खेलना हराम है। रंगों की होली खेलने वाला मोहब्बत फैलाता है, इसलिए वो जन्नत जाएगा. खून की होली खेलने वाला नफरत फैलाता है, इसलिए जहन्नुम जाएगा. 

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इस खास मौके पर पंडित रिंकू महाराज ने कहा कि काशी की चिंता युद्धों में खत्म हो रही मानवता को लेकर है. मानवीय संवेदना तो तभी बचेगी जब हमारे जीवन में रंग होगा. विशाल भारत संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ० राजीव ने कहा कि होली का त्योहार नफरत को खत्म करके गले मिलने के लिए ही मनाया जाता है. विश्व शांति के लिए त्योहारों का बहुत महत्व है. होली का चलन अन्य देशों में होने से वहां नफरत की प्रवृत्ति कम होगी. 

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