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जगन्नाथ पुरी धाम की तीसरी सीढ़ी का रहस्य? पंडित श्री काशी नाथ मिश्र जी

जगन्नाथपुरी से जुड़ी तीसरी सीढ़ी का रहस्य आज भी लोगों को भयभीत करता है. आलम यह है कि खुद देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मंदिर की तीसरी सीढ़ी पर कदम नहीं रखते हैं. इसके पीछे का कारण क्या है, जानते हैं परम पूजनीय पंडित श्री काशी नाथ मिश्र जी से.

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अब जब ममता दीदी के गढ़ में पुरी जैसा जगन्नाथ मंदिर विद्यमान हो चुका है, तो फिर मंदिर की तीसरी सीढ़ी से पीएम मोदी को ख़ौफ़ क्यों? आज ये सवाल इसलिए क्योंकि जगन्नाथ पुरी धाम की तीसरी सीढ़ी की हिस्ट्री आज भी एक मिस्ट्री बनी हुई है. बंगाल के दीघा में 250 करोड़ की लागत से बना जगन्नाथ मंदिर भक्तों के लिए खोला जा चुका है. देखने में यह मंदिर जगन्नाथ पुरी की फ़ोटोकॉपी है और इसका सारा खर्च ममता सरकार की पॉकेट से गया है, जिस कारण भाजपा टीएमसी पर हमलावर है. लेकिन पुरी के मंदिर की नकल किये जाने से क्या प्रभु जगन्नाथ को बंगाल लाया जा सकता है?

20 एकड़ में फैले दीघा के जगन्नाथ मंदिर से अब हर साल रथयात्रा निकाली जाएगी. लेकिन इस मंदिर में ना ही पुरी की तरह ब्रह्म पदार्थ है, ना ही अरुण स्तंभ, ना ही लकड़ी से निर्मित ईश्वरी प्रतिमाएँ. ऐसे में मंदिर को धाम का दर्जा दिया जाना कितना उचित है, यह अपने आप में बड़ा सवाल है. और इन सवालों के बीच जगन्नाथ पुरी से जुड़ी तीसरी सीढ़ी का रहस्य आज भी लोगों को भयभीत करता है. आलम यह है कि खुद देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मंदिर की तीसरी सीढ़ी पर कदम नहीं रखते हैं. इसके पीछे का कारण क्या है, जानते हैं परम पूजनीय पंडित श्री काशी नाथ मिश्र जी से.

दरअसल मंदिर के मुख्य द्वार यानी सिंह द्वार से जुड़ी 22 सीढ़ियों में से नीचे से ऊपर की ओर आती तीसरी सीढ़ी पर कोई भी भक्त कदम नहीं रखता है. भक्त भूलवश इस पर पैर न रखे, इसके लिए इस तीसरी सीढ़ी को अन्य सीढ़ियों की तुलना में काला रंग किया गया है. और इसी सीढ़ी पर यमशिला मौजूद है. कहते हैं महाप्रभु के दर्शनों के बाद इस तीसरी सीढ़ी पर पैर रखने की मनाही है. ऐसा इसलिए क्योंकि व्यक्ति के पुण्य उसी वक़्त क्षीण हो जाते हैं. इसके पीछे की पौराणिक मान्यता यह कहती है कि जब भगवान जगन्नाथ के दर्शन कर लोग पाप मुक्त होने लगे थे, तो यमराज भगवान जगन्नाथ के पास पहुंचे और कहा, "भगवान, आपने पाप मुक्ति का यह बहुत ही सरल उपाय बता दिया है. लोग आपके दर्शन कर बड़ी आसानी से पाप मुक्त हो जाते हैं और कोई भी यमलोक नहीं आता."

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यमराज की यह बात सुनकर भगवान जगन्नाथ ने कहा, "आप मंदिर के मुख्य द्वार की तीसरी सीढ़ी पर अपना स्थान ग्रहण करें. इसे 'यमशिला' के नाम से जाना जाएगा. जो कोई भी मेरे दर्शन के बाद उस शिला पर पैर रखेगा, उसके सारे पुण्य क्षीण हो जाएंगे और उसे यमलोक जाना पड़ेगा."। भगवान जगन्नाथ ने यमराज को यह वचन दिया और आज भी वे इस नियम से बंधे हुए हैं. यही कारण है कि पूरी दुनिया महाप्रभु के दर्शन तो करती है, लेकिन दर्शनों के उपरांत तीसरी सीढ़ी पर पैर नहीं रखती. यही वजह है कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस तीसरी सीढ़ी को छूते तक नहीं हैं.

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