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बाड़मेर का रहस्यमयी किराडू मंदिर, राजस्थान का खजुराहो और साधु का श्राप
किराडू मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है बल्कि एक रहस्यमयी व ऐतिहासिक अनुभव है. आज भी सुबह पूरा परिसर चहल-पहल वाला लगता है लेकिन जैसे ही शाम होती है, लोग जल्दी-जल्दी बाहर निकलने लगते हैं. कोई भी यहां शाम के बाद ठहरना नहीं चाहता.
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बाड़मेर के रेगिस्तान में एक ऐसा मंदिर है, जहां शाम होते ही लोग भाग जाते हैं और पूरा मंदिर वीरान हो जाता है. यह है किराडू मंदिर. यह कोई साधारण मंदिर नहीं है, बल्कि पांच मंदिरों की एक श्रृंखला है. इसमें से एक भगवान विष्णु को समर्पित है और बाकी चार महादेव को.
राजस्थान का रहस्यमयी खजुराहो
इस मंदिर की खूबसूरती देखकर आपको लगेगा कि यह राजस्थान का खजुराहो है. हर दीवार, हर खंभा और हर छत पर नक्काशी इतनी अद्भुत है कि आप घंटों वहीं ठहरे रहना चाहेंगे. हालांकि इस मंदिर में शाम के बाद ठहरना वर्जित है. कहा जाता है कि कोई भी अगर रात तक रुका, वह वापस नहीं आया. लोगों का कहना है कि यह सब साधु के श्राप की वजह से है.
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स्थानीय लोगों का कहना है कि काफ़ी समय पहले एक साधु अपने शिष्यों के साथ किराडू आए. कुछ दिन वे वहीं रहे और फिर देश भ्रमण पर निकल पड़े लेकिन अचानक उनके शिष्य बीमार पड़ गए. गांव के लोग उनकी मदद नहीं करना चाहते थे लेकिन एक कुम्हारिन ने उनकी पूरी देखभाल की. जब साधु वापस आए और शिष्यों को इस हालत में देखा, तो उनका गुस्सा सातवें आसमान पर था. उन्होंने श्राप दिया कि जहां मानवता नहीं है, वहां के लोग भी न रहें, जिसके बाद गांव के लोग पत्थर बन गए.
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जहां से शाम होते ही भागने लगते हैं लोग
साधु ने उस कुम्हारिन को चेताया कि वह शाम से पहले वहां से निकल जाए और रास्ते में कभी पीछे मुड़कर न देखे लेकिन जैसे ही वह कुम्हारिन पीछे मुड़ी, वह भी पत्थर में बदल गई. तभी से यह माना जाता है कि जो कोई भी यहां शाम के बाद रुका, वह पत्थर बन जाता है.
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किराडू मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है बल्कि एक रहस्यमयी व ऐतिहासिक अनुभव है. आज भी सुबह पूरा परिसर चहल-पहल वाला लगता है लेकिन जैसे ही शाम होती है, लोग जल्दी-जल्दी बाहर निकलने लगते हैं. कोई भी यहां शाम के बाद ठहरना नहीं चाहता.