Advertisement

Loading Ad...

उज्जैन का रहस्यमयी बोरेश्वर महादेव मंदिर, जहां दर्शन मात्र से मिलते हैं 12 ज्योतिर्लिंगों के पुण्य

मंदिर के गर्भगृह में मौजूद भगवान बोरेश्वर महादेव स्वयंभू हैं. मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसकी जलाधारी है, जिसमें कितना भी जल अर्पित किया जाए, उसका स्तर कभी न बढ़ता है और न ही घटता है. हमेशा समान बना रहता है.

Loading Ad...

उज्जैन और काशी को बाबा महाकाल की धरती के रूप में पूजा जाता है, जहां हर मंदिर से कोई न कोई धार्मिक महत्व जरूर जुड़ा है. 

उज्जैन की धरती पर बाबा महाकाल के अलावा, भगवान शिव का एक अन्य अद्भुत रूप मौजूद है, जहां सिर्फ दर्शन मात्र से 12 ज्योतिर्लिंग के दर्शन का फल मिलता है. यही कारण है कि भक्त उज्जैन के रहस्यमयी मंदिर में भगवान के दर्शन करने के लिए आते हैं.

दंगवाड़ा गांव में स्थित है अनोखा बोरेश्वर महादेव मंदिर

Loading Ad...

उज्जैन जिले के दंगवाड़ा गांव में बोरेश्वर महादेव मंदिर स्थित है, जो बाकी शिव मंदिरों से काफी अलग है. हर मंदिर में जहां भोलेनाथ 'शिवलिंग' के रूप में विराजमान हैं, वहीं बोरेश्वर महादेव मंदिर में भगवान शिव 'बोर' के आकार की आकृति में स्थापित हैं. ये देखने में बेलन की तरह लंबा और गोल लगता है. शिवलिंग जमीन के ऊपर की तरफ नहीं बल्कि नीचे की तरफ धंसे हुए हैं. यह मंदिर अत्यंत प्राचीन और रहस्यमयी धार्मिक धरोहर है, जिसकी जड़ें ताम्र पाषाण काल से लेकर गुप्त काल तक फैली हुई मानी जाती हैं.

Loading Ad...

स्वयंभू शिवलिंग और अद्भुत जलाधारी का रहस्य

मंदिर के गर्भगृह में मौजूद भगवान बोरेश्वर महादेव स्वयंभू हैं. मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसकी जलाधारी है, जिसमें कितना भी जल अर्पित किया जाए, उसका स्तर कभी न बढ़ता है और न ही घटता है. हमेशा समान बना रहता है. मान्यता है कि यहां 12 ज्योतिर्लिंगों का समावेश है. माना जाता है कि मंदिर में रात के समय चमत्कार होते हैं, जैसे रात्रि में नंदी महाराज मंदिर में दर्शन करने के लिए आते हैं और मंदिर की घंटियां भी खुद-ब-खुद बजने लगती हैं. यही कारण है कि भक्तों के लिए यह मंदिर श्रद्धा, आस्था और रहस्य का केंद्र है.

Loading Ad...

मंदिर के पास से चंबल नदी भी गुजरती है, जो शिवलिंग की आधी परिक्रमा करती है. नदी भी भगवान शिव के सोमसूत्र का पालन करती है और आधी परिक्रमा ही करती है.

रात्रिकालीन चमत्कार और नंदी महाराज की मान्यता

यह भी पढ़ें

महाशिवरात्रि के दिन मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ आती है क्योंकि महाशिवरात्रि पर बोरेश्वर महादेव का विशेष शृंगार होता है और बाबा की सवारी भी निकलती है, जो नगर में चक्कर लगाकर वापस मंदिर में आती है. माना जाता है कि महादेव स्वयं भक्तों को नगर में आशीर्वाद देते हैं. वहीं सावन के महीने में हर सोमवार को बाबा की सवारी निकलती है. इस विशेष सवारी का हिस्सा बनने के लिए दूर-दूर से भक्त आते हैं.

LIVE
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...