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जयपुर का रहस्यमयी अंबिकेश्वर महादेव मंदिर, जहां श्रीकृष्ण, शिव और महालक्ष्मी का मिलता है एक साथ आशीर्वाद

यह मंदिर सिर्फ चमत्कार से ही नहीं, बल्कि रहस्यों से भी भरा है. मंदिर की अनोखी बात यह भी है कि मंदिर जमीन से 22 फीट नीचे की तरह बनाया गया है. मंदिर को देखकर ऐसा लगता है कि पहले खुदाई की गई और फिर मंदिर का निर्माण कराया गया.

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हर मंदिर का अपना इतिहास होता है, जो उसे विशेष बनाती है. पौराणिक कथा और मान्यता के आधार पर मनोकामना पूर्ति के लिए लोग अलग-अलग मंदिरों में जाते हैं, लेकिन जयपुर में एक ऐसा मंदिर है, जहां भगवान श्री कृष्ण, महादेव और महालक्ष्मी तीनों का आशीर्वाद एक साथ मिल जाता है. 

यह मंदिर इतना अद्भुत है कि साल के कुछ महीने इसका आधार पानी में डूबा रहता है, लेकिन फिर भी मंदिर की मजबूती पर रत्ती भर भी प्रभाव नहीं पड़ा. जयपुर में कई प्राचीन मंदिर हैं, लेकिन हम आमेर से कुछ दूर मौजूद अंबिकेश्वर महादेव मंदिर की बात कर रहे हैं, जो अपने आप में अलग इतिहास समेटे हुए है.

द्वापर युग से जुड़ी मान्यता

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मंदिर का कनेक्शन द्वापरयुग से जुड़ा है. स्थानीय मान्यता है कि अंबिकेश्वर महादेव वही मंदिर है, जहां भगवान श्री कृष्ण का मुंडन हुआ था. मान्यता की वजह से भक्त दूर-दूर से अपने बच्चों का मुंडन इसी मंदिर में करवाने के लिए आते हैं.

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मंदिर के गर्भगृह में बाबा भोलेनाथ अंबिकेश्वर महादेव के रूप में विराजमान हैं. खास बात ये है कि शिवलिंग जमीन की सतह पर नहीं, बल्कि जमीन से थोड़ा नीचे की तरफ स्थापित है. मंदिर का जुड़ाव आमेर से भी है. माना जाता है कि 7 हजार साल से भी ज्यादा पुराने इस मंदिर का नाम अंबिकेश्वर होने की वजह से ही जिले को आमेर नाम मिला.

पानी में डूबता है मंदिर का आधार

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वास्तुशैली की बात करें तो मंदिर 14 खंभों पर टिका है. मंदिर महालक्ष्मी के महालक्ष्मी यंत्र पर बना है, जो दिखने में चौकोर टुकड़े की तरह लगता है. बीते काफी वर्षों से मंदिर में पानी भरने लगा है, जिसे वहां के स्थानीय लोग ईश्वर का चमत्कार मानते हैं क्योंकि पानी शिवलिंग के पास से जमीन के ऊपर की तरफ बढ़ने लगता है, लेकिन पानी आने का कोई कारण नहीं जानता. हालांकि हर साल मंदिर में पानी नहीं भरता, लेकिन बीते 30 सालों में मंदिर में 4 बार पानी भर चुका है. पानी भरने के बाद भी मंदिर में भक्तों की संख्या में कोई गिरावट नहीं आती.

जमीन से 22 फीट नीचे बना मंदिर

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यह मंदिर सिर्फ चमत्कार से ही नहीं, बल्कि रहस्यों से भी भरा है. मंदिर की अनोखी बात यह भी है कि मंदिर जमीन से 22 फीट नीचे की तरह बनाया गया है. मंदिर को देखकर ऐसा लगता है कि पहले खुदाई की गई और फिर मंदिर का निर्माण कराया गया. सावन के महीने और महाशिवरात्रि पर मंदिर में विशेष अनुष्ठान होते हैं और भक्त बाबा अंबिकेश्वर के दुर्लभ मंदिर के दर्शन के लिए आते हैं.

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