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18 Sep को दिखने वाला चंद्रग्रहण हिंदू राष्ट्र के लिए घातक होगा साबित
साल के आख़िरी चंद्रग्रहण की चपेट में दुनिया, ग्रहण के साये में चंद्रमा की आभा, अब मचने वाली है कैसी तबाही ?
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ग्रहण की छाया जिस किसी पर पड़ी, उसका अनिष्ट ही हुआ, एक बार फिर साल का अंतिम चंद्रग्रहण चर्चा में है। चंद्रमा पर लगने जा रहा ग्रहण अपने पीछे क्या तबाही छोड़ेगा। जो कि ग्रहण में ही पितृपक्ष की शुरुआत है, ऐसे में क्या सूतक मान्य होगा और सबसे बड़ा सवाल ये कि दुनिया को दिखने वाला चंद्रग्रहण क्या भारत से दिखाई देगा ? 18 सितंबर को लगने वाले चंद्रग्रहण का सच क्या है।
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धर्म ग्रंथों में ग्रहण का साया कभी भी शुभ नहीं माना गया, हमेशा ग्रहण का प्रभाव देखा गया है, ग्रहण की वजह से तबाही मची है। ऐसे इसलिए क्योंकि ज्योतिष दुनिया में सूर्य पिता कहलाए गये और चंद्रमा माँ के समान मानी गई और जब-जब ग्रहण के साये में सूर्य और चंद्रमा आए। दुनिया ने कंपन महसूस की प्राकृतिक आपदाओं ने कोहराम मचाया और देखते ही देखते ग्रहण के साये में मानवजाति का नुक़सान हुआ। विज्ञान भले ही ग्रहण को एक खगोलीय घटना के चश्मे से देखे, लेकिन धर्म ग्रंथों से लेकर ज्योतिष विद्या में ग्रहण को अशुभता से जोड़ा गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि ग्रहों के राजा सूर्य जिन्हें आत्मा, पिता, मान-सम्मान और पद प्रतिष्ठा का कारक माना गया है, तो वहीं चंद्रमा को मन से जोड़ा गया है। माँ के समान माना गया है, शीतला से जोड़ा गया है और जब इन्हीं पर राहूँ-केतु की छाया पड़ती है तो आम जनमानस के जीवन में उथल-पुथल मचनी शुरु हो जाती है। ताज़ा उदाहरण 2019 के आखिर में पड़ने वाले दो ग्रहण का ले लीजिये 14 दिसंबर को सूर्यग्रहण और 26 दिसंबर को चंद्रग्रहण था। एक बार फिर दुनिया ग्रहण की चपेट में है। इस बार साल का अंतिम चंद्रग्रहण इसी महीने 18 सितंबर की तारीख़ पर लगने जा रहा है। ग्रहण सुबह के ठीक 6 बजकर 12 मिनट से शुरू हो जाएगा और लगभग 10 बजकर 18 मिनट तक रहेगा। ज्योतिष दृष्टि से ग्रहण मीन राशि में लगेगा। जिस कारण देशभर के ज्योतिष मीन, धनु, मेष और कन्यां को इस दिन सर्तक रहने की नसीहत दे रहे है लेकिन सबसे दिलचस्प बात ये कि साल का यही अंतिम चंद्रग्रहण भारत में दिखाई नहीं दे रहा है, जिस कारण इसका सूतक मान्य नहीं होगा।
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दक्षिणी अमेरिका, हिंद महासागर, अफ्रीका, आर्कटिक यूरोप, अटलांटिक महासागर और अंटार्कटिका, दुनिया के इन हिस्सों में चंद्रग्रहण साफ़ दिखाई देगा। 18 सितंबर को चंद्रमा का एक हिस्सा पृथ्वी की छाया से होकर गुज़रेगा और रात के 10 बजे तक चंद्रमा का आधा हिस्सा गायब दिखेगा।जो कि धर्म ग्रंथों में चंद्रग्रहण को राहूँ-केतु से जोड़ा गया है, इस कारण गर्भवती महिलाओं को इस दिन विशेष सावधानी बरतने की नसीहत भी दी जाती है। धार्मिक मान्यताएँ यहीं कहती है कि गर्भ में पल रहे शिशु पर ग्रहण का दुष्प्रभाव पड़ता है, जिस कारण ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को घर से बाहर निकलने किसी भी प्रकार की नुकीली चीजें रखने और ग्रहण काल में सोने की मनाही होती है।