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देवभूमि को बचाने के लिए नागा साधुओं की फ़ौज ने मोर्चा सँभाला

देवभूमि को भारत के मुसलमान से ख़तरा नहीं है, लेकिन इस्लाम की आड़ में जो रोहिंग्या मुसलमान है। वो देवभूमि की डेमोग्रैफी के लिए ख़तरा बन चुके हैं.और इसी ख़तरे को भाँपते हुएकिस प्रकार से देवभूमि से इन घुसपैठियों का सफ़ाचट करने के लिए नागा साधुओं की फ़ौज ने मोर्चा सँभाल लिया है। इसका खुलासा किया है।

देवभूमि को बचाने के लिए नागा साधुओं की फ़ौज ने मोर्चा सँभाला
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सुकून की जिस तलाश में पर्यटक पहाड़ों का रूख किया करते हैं, आज उन्हीं पहाड़ों में अशांति फैला हुई है और अशांति भी ऐसी है कि दिन पर दिन हिंसक होती जा रही है। देवभूमि उत्तराखंड में बवाल मचा हुआ है..पहाड़ी वासी सड़कों पर उतर आए हैं। केदारघाटी से लेकर रुद्रप्रयाग तक भाईजान के लिए नो एंट्री का बोर्ड लगा हुआ है। अल्मोडा में बाहरी दुकानदारों का विरोध किया जा रहा है। दीवाली नजदीक है और ऐसे में कहा ये जा रहा है कि बाहरी राज्यों से आए दुकानदारों के व्यापार करने से स्थानीय लोगों का बिज़नेस ठप्प हो जाता है। इस कारण इन बाहरी व्यापारियों में भाईजान का बहिष्कार है। दूसरी तरफ़ चमोली में तो मुस्लिम समुदाय के बहिष्कार की माँग की जा रही है। ख़ास कर रोहिंग्या मुसलमानों को लेकर स्थानीय निवासियों का ग़ुस्सा सातवें आसमान पर है लेकिन क्या आप जानते हैं, देवभूमि की इन अशांत तस्वीरों के पीछे की वजह क्या है ? दरअसल देवभूमि उत्तराखंड घुसपैठिये और रोहिंग्या मुसलमानों का अड्डा बन चुकी है। ना ही देवभूमि का ख़ुद का कोई भू क़ानून है और ना ही उम्मीद जितनी विकास की बहार पहाड़ों से पहाड़ वासियों का पलायन , यहाँ की संस्कृति और डेमोग्राफी के लिए ख़तरा बन चुकी है और ये ख़तरा कितना गंभीर है, इसका अंदाज़ा इसी से लगाइये…ख़ुद देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 7 साल पहले ये कहना पड़ा कि पहाड़ का पानी और जवानी पहाड़ के काम आएं इसका बीड़ा हमने उठाया है।

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तीर्थों की देवभूमि उत्तराखंड की पिक्चर में पथराव, आगज़नी और गोलीबारी दिखने लगी है। रुद्रप्रयाग के पड़ोसी ज़िले चमोली में नाबालिग से हुई छेड़छाड़ से सांप्रदायिक तनाव फैला, हल्द्वानी के बनभूलपुरा में अवैध मदरसे के तोड़े जाने पर भारी हिंसा हुई। इसी हिंसा में कई लोगों की मौत हुई और 100 से ज़्यादा गाड़ियों को फूंक दिया गया और अब तो केदारघाटी से समूचे उत्तराखंड को मिटाने की साज़िश हो रही है, जिसका खुलासा गौरक्षा विभाग के प्रदेशाध्यक्ष भगवाधारी बाबा मणिमहेश गिरि ने किया। उत्तराखंड के स्थानीय नागरिकों की आबादी में गिरावट दर्ज की गई, जबकी मुस्लिम आबादी 16 फ़ीसदी की वृद्धि दर दर्ज की गई। जनगणना कहती है, 2001 में मुस्लिमों की 1 लाख आबादी बसती थी, जो आज 14 लाख के आँकड़े को भी पार कर चुकी है..देवभूमि को भारत के मुसलमान से ख़तरा नहीं है, लेकिन इस्लाम की आड़ में जो रोहिंग्या मुसलमान है। वो देवभूमि की डेमोग्रैफी के लिए ख़तरा बन चुके हैं और इसी ख़तरे को भाँपते हुए किस प्रकार से देवभूमि से इन घुसपैठियों का सफ़ाचट करने के लिए नागा साधुओं की फ़ौज ने मोर्चा सँभाल लिया है। इसका खुलासा किया है भगवाधारी बाबा मणिमहेश गिरि  जी ने ।

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