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द्वारिका के अस्तित्व से जुड़ा द्वारिकाधीश मंदिर का 52 गज का ध्वज

अनगिनत वर्षों से ढाल बनकर जो 52 गज का ध्वज अभी तक मंदिर शिखर पर लहरा रहा है, उसके पीछे की जीवित भविष्यवाणी क्या कहती है? किस प्रकार ख़ुद पर बिजली का संकट लेकर 52 गज के ध्वज ने आने वाली तबाही के संकेत दिये और 52 गज के इस ध्वज को दिन रात 5 दफ़ा बदलने की परंपरा क्या भगवान के घर से चली आ रही है? जानने के लिए देखिये धर्म ज्ञान.

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अब जब द्वारिकाधीश की चौखट पर 24 वर्षों की बुकिंग चल रही है, तो फिर हमारा, आपका या फिर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का नंबर कब आएगा? अनगिनत वर्षों से ढाल बनकर जो 52 गज का ध्वज अभी तक मंदिर शिखर पर लहरा रहा है, उसके पीछे की जीवित भविष्यवाणी क्या कहती है? किस प्रकार ख़ुद पर बिजली का संकट लेकर 52 गज के ध्वज ने आने वाली तबाही के संकेत दिए, और 52 गज के इस ध्वज को दिन-रात 5 दफ़ा बदलने की परंपरा क्या भगवान के घर से चली आ रही है? जानने के लिए देखिए धर्म ज्ञान.

महापुरुषों की धरती गुजरात, एक ऐसा समृद्ध राज्य, जहां की संस्कृति, विरासत, पहनावा, खानपान और बोली भारत की असल पहचान है. गांधी और पटेल की इस धरती से ही अंबानी परिवार आता है. देश का सबसे बड़ा डायमंड हब यहाँ मौजूद है. सबसे ज़्यादा एयरपोर्ट यही मिलते हैं. सबसे ज़्यादा शाकाहारी लोगों यही रहते हैं. सबसे ज़्यादा एशियाई शेर यहाँ मिलते हैं. सबसे बड़ा सॉल्ट डेसर्ट यहाँ है और तो और सप्त पुरियों में से एक  द्वारिकाधीश की नगरी द्वारिका भी यहीं मिलती है, इस मंदिर की चौखट पर जो आता है, वो ख़ुद को धन्य समझता है. आज भी प्रभु का ये धाम समुद्र में समाया हुआ है. मंदिर का प्रवेश द्वारा मोक्ष की ओर ले जाता है और दूसरा द्वार स्वर्ग द्वार कहा जाता है. द्वारिकाधीश का ये दिव्य धाम जितना चमत्कारी है, उतनी ही रोचक इसकी कहानियाँ इसी मंदिर के शिखर पर लहराता 52 गज का ध्वज रोज़ाना पाँच दफ़ा बदला जाता है. मंदिर की इस पताका के लिए कहा जाता है, जब तक इस धरती पर सूर्य चंद्रमा रहेंगे. तब तक द्वारिकाधीश का नाम रहेगा, उनकी ये पताका लहराती रहेगी. आपको ये जानकर हैरानी होगी कि मंदिर शिखर पर लहराता ये ध्वज इतना बड़ा है कि इसे आप 10 किलोमीटर दूरी से भी लहराते हुए देख सकते हैं. इस ध्वज की ख़ासियत ऐसी है कि हवा की दिशा जो भी हो, झंडा हमेशा पश्चिम से पूर्व की ओर ही लहराता है. जो कि ध्वजा भक्तों की ओर से अर्पित किया जाता है, जिस कारण वेटिंग पीरियड 24 सालों का है. जिसकी जानकारी ख़ुद द्वारिका वासी देते हैं. 

अब अगर आपके मन में ये सवाल हो कि इसे 52 गज ध्वज क्यों कहते हैं..तो इसके पीछे का रहस्य ये है कि द्वारिका में 56 यादवों ने शासन किया. जिसमें भगवान कृष्ण, बलराम, अनिरुद्ध और प्रद्ध्युम्न के अलग-अलग मंदिर यहाँ बने हैं. जिन पर ध्वज लहराते हैं. और बाक़ी बचे 52 यादवों के प्रतीक के रूप में ये धर्म ध्वजा द्वारिकाधीश के मुख्य मंदिर के शिखर पर लहराती है. कहा तो ये भी जाता है कि 12 राशि, 27 नक्षत्र, 10 दिशाएँ, सूर्य, चंद्र और श्री द्वारिकाधीश मिलकर 52 होते हैं. इसलिए इस धर्म ध्वजा को 52 गज का ध्वजा कहा जाता है. आपको ये जानकर हैरानी होगी कि इसी 52 गज के ध्वज ने कोरोना से मचने वाले हाँककर के समय रहते ही संकेत दे दिये थे. साल 2021 दोपहर ढाई बजे अचानक से बादल गरजे. मौसम ने करवट ली और आकाशीय बिजली सीधी 52 गज की ध्वजा पर गिरी जिसके चलते ध्वजा को नुक़सान पहुँचा. कहते हैं इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ , जब मंदिर के किसी हिस्से पर बिजली गिरी लेकिन मंदिर परिसर में एक भी श्रद्धालु को नुक़सान नहीं पहुँचा. हालाँकि इस घटना के कुछ ही दिनों बाद कोरोना का प्रचंड रूप देखने को मिला। लोगों का यही मानना था कि द्वारिकाधीश ने ना सिर्फ ख़ुद पर प्राकृतिक क़हर लिया है, बल्कि भविष्य में होने वाले विनाश के भी संकेत दिये हैं.

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