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एक्शन मोड़ में स्वामी रामभद्राचार्य, अब किनसे बदला लिया जाएगा?

आँखों की रोशनी के बिना भी जगद्गुरु मन की आँखों से भविष्य की घटनाओं को भाँप लेते हैं. यही कारण है कि उनकी ज़ुबान से निकली भविष्यवाणी हमेशा सत्य साबित हुई है. लेकिन इस बार उनकी वाणी से प्रतिशोध की अग्नि भड़की है. सवाल यह है कि प्रधानमंत्री मोदी के आने वाले 76वें वर्ष में जगद्गुरु किसका बदला लेने की भविष्यवाणी कर रहे हैं?

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सियासी गलियारे से लेकर संत समाज तक जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य की पकड़ कितनी मज़बूत है, इसका अंदाजा इसी से लगाइए. जब पहली दफ़ा बतौर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शपथ ली, उस समारोह में स्वामी रामभद्राचार्य की उपस्थिति दर्ज थी. जगद्गुरु के किताब विमोचन कार्यक्रम में पीएम मोदी चित्रकूट पहुँचे थे. आज भी देश के प्रधानमंत्री या फिर यूपी के मुख्यमंत्री जब कभी चित्रकूट का दौरा करते हैं, तो जगद्गुरु के दर्शन करने और उनके निवास स्थान जरूर जाते हैं.

पीएम मोदी और जगद्गुरु के बीच अगर दोस्ती का भाव है, तो महंत से मुख्यमंत्री बने योगी आदित्यनाथ के लिए जगद्गुरु गुरु के समान हैं. आँखो की रोशनी के बिना भी जगद्गुरु मन की आँखों से भविष्य में होने वाली घटनाओं को भाँप लेते हैं. इसी कारण उनकी ज़ुबान से निकली भविष्यवाणी सदैव सत्यता की कसौटी पर खरी उतरती है. हालाँकि इस बार उनकी ज़ुबान से प्रतिशोध की अग्नि भड़की है. पीएम मोदी के आने वाले 76वें वर्ष में जगद्गुरु किसका बदला लेने की भविष्यवाणी कर रहे हैं, यही जानने के लिए देखिए धर्म ज्ञान.

आज भी आम जनमानस को स्वामी रामभद्राचार्य की आध्यात्मिक और साहित्यिक यात्रा प्रेरित करती है. अपने अंधेपन को चुनौती देते हुए उन्होंने शास्त्र ज्ञान के मार्ग पर चलकर एक अलग पहचान बनाई. इसका सबसे बड़ा सबूत उस समय सामने आया, जब देश की सर्वोच्च अदालत में जगद्गुरु ने 441 शास्त्र प्रमाण के साथ राम जन्मभूमि पर मंदिर होने का सबूत दिया था. इसके बाद न्यायाधीशों ने माना कि वास्तव में स्वामी रामभद्राचार्य में दैवीय शक्ति है.

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75 वर्ष की आयु तक पहुँचते-पहुँचते स्वामी रामभद्राचार्य ने समाज, ज़रूरतमंदों और दिव्यांग लोगों के लिए असाधारण कार्य किए हैं. इसी कारण भारत सरकार ने उन्हें पद्मभूषण से सम्मानित किया. 22 भाषाओं के ज्ञाता और 100 से अधिक ग्रंथों के रचनाकार स्वामी रामभद्राचार्य अब जबरन धर्मांतरण के ख़िलाफ़ खुलकर आवाज़ उठा रहे हैं. धर्मांतरण और लव जिहाद जैसे गंभीर मुद्दों पर बोलते हुए जगद्गुरु ने समाधान का आश्वासन दिया है. उन्होंने साफ़ कहा कि देश में बढ़ता जबरन धर्मांतरण समाज को तोड़ने का काम कर रहा है और यह किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है. स्वामी रामभद्राचार्य ने स्पष्ट चेतावनी दी—“हम इसका बदला लेंगे. सनातन धर्म के साथ खिलवाड़ करने वालों को प्रसाद ज़रूर देंगे.” उन्होंने हिंदू बेटियों से अपील करते हुए कहा कि वे सतर्क रहें और लव जिहाद जैसे प्रपंचों से बचें. जगद्गुरु का संदेश था कि अब समय आ गया है जब बेटियों को रानी लक्ष्मीबाई की तरह साहसी बनना होगा.

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गौर करने वाली बात यह है कि जगद्गुरु द्वारा जबरन धर्मांतरण के ख़िलाफ़ बदला लेने की बात ऐसे समय में सामने आई है, जब कुछ ही दिनों बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 75वाँ जन्मदिन आने वाला है. विरोधियों की नज़र 17 सितंबर पर टिकी हुई है. 75 का आँकड़ा विपक्षी खेमे में खलबली मचा रहा है. राजनीतिक गलियारे में पीएम मोदी की रिटायरमेंट को लेकर सुगबुगाहट तेज़ है, जबकि हक़ीक़त में ऐसा कुछ नहीं है. 17 सितंबर के बाद भी पीएम मोदी प्रधानमंत्री पद पर बने रहेंगे और वह भी नई ऊर्जा के साथ. ज्योतिषों ने भी पीएम मोदी के 76वें वर्ष को चुनौतीभरा और यादगार बताया है. ऐसे में जबरन धर्मांतरण के ख़िलाफ़ जगद्गुरु की यह दहाड़ विघटनकारी ताक़तों के लिए काल साबित होती दिख रही है.

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