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श्री वीरभद्र स्वामी मंदिर: हवा में झूलता है मंदिर का खंभा, अद्भुत है मंदिर की वास्तुकला, जानें इतिहास

भारत एक ऐसा देश है जहां कई मंदिर अपने अंदर कई रहस्यों को समेटे हुए हैं. चाहें बात असम के कामाख्या देवी मंदिर की जाएं या फिर राजस्थान के मेहंदीपुर बालाजी मंदिर की. ये मंदिर अपनी अलौकिक मान्यताओं, चमत्कारों और अनसुलझे रहस्यों के कारण पूरे भारत में प्रसिद्ध हैं. ऐसा ही एक मंदिर स्थित है आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले में. ये मंदिर अपने रहस्यमयी खंभे के लिए जाना जाता है. पूरी जानकारी के लिए आगे पढ़ें…

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सनातन धर्म में भगवान शिव की महिमा का बखान सदियों से किया जा रहा है. भगवान शिव का आदि और अंत किसी को नहीं पता, इसलिए उन्हें सृष्टि के सृजनकर्ता और विनाशक दोनों रूपों में देखा जाता है. समय आने पर उन्होंने अपने कई अंश विकसित किए, जिनमें से एक हैं वीरभद्र भगवान. ऐसे में आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले के पास लेपाक्षी गांव में भगवान वीरभद्र का ऐसा मंदिर है, जहां खंभे हवा में झूलते रहते हैं.

लेपाक्षी मंदिर कब और किसने बनाया था?

ये मंदिर शक्ति का प्रतीक है और मंदिर की भारतीय वास्तुकला देखने लायक है. बताया जाता है कि मंदिर का निर्माण 16वीं शताब्दी के आसपास में विजयनगर साम्राज्य के विरुपन्ना नायक और वीरन्ना नायक दो भाइयों ने करवाया था. मंदिर का निर्माण ग्रेनाइट चट्टानों से किया गया है और पत्थर पर बारीक नक्काशी की गई है और देवी-देवताओं की प्रतिमा को उकेरा गया है, जो महाभारत और रामायण की कहानी को दिखाते हैं. इस मंदिर को लेपाक्षी मंदिर और हैंगिंग टेम्पल के नाम से भी जाना जाता है.

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लेपाक्षी मंदिर में किसकी पूजा की जाती है? 

मंदिर में भगवान शिव के रौद्र रूप भगवान वीरभद्र की पूजा की जाती है और उनकी प्रतिमा को मंदिर के गर्भगृह में रखा गया है. मंदिर के इतिहास के बारे में बात करें तो इसको लेकर कई किंवदंतियां मौजूद हैं.

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रामायण काल से जुड़ा है लेपाक्षी मंदिर

मंदिर के इतिहास को रामायण से जोड़कर भी देखा गया है. बताया जाता है कि जब रावण ने मां सीता का हरण किया था, तो जटायु ने उन्हें बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल दी थी और वो इसी स्थान पर गिरे थे. भगवान राम ने पीड़ा को समझते हुए जटायु को 'ले पाक्षी' कहा था, जिसका तेलुगू में मतलब है 'उठो, पक्षी'. मान्यता है कि इसी वजह से मंदिर को लेपाक्षी मंदिर भी कहते हैं.

मंदिर में मौजूद 1 खंभा हवा में झूलता है!

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श्री वीरभद्र स्वामी मंदिर रहस्यों से भरा मंदिर है. मंदिर में कुल 70 खंभे हैं और 1 खंभा हवा में तैरता है. खंभे का निचला सिरा जमीन को नहीं छूता है, बल्कि दोनों के बीच में एक गैप होता है, जिसके नीचे से कपड़े को आर-पार करके देखा जा सकता है. इसी वजह से मंदिर पर्यटन का विशेष केंद्र है. खंभों और जमीन के गैप को आंखों से देखा जा सकता है.

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