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स्कन्द षष्ठी 2026: व्रत विधि, शुभ मुहूर्त, पंचांग और विशेष योग-जानें संपूर्ण जानकारी
शुभ मुहूर्त और योग की बात करें तो 22 फरवरी को ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 12 मिनट से 6 बजकर 3 मिनट तक अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 12 मिनट से 12 बजकर 58 मिनट तक विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 29 मिनट से 3 बजकर 14 मिनट तक है.
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भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र भगवान स्कन्द, जिन्हें कार्तिकेय, मुरुगन, सुब्रह्मण्य भी कहा जाता है को समर्पित स्कन्द षष्ठी का पावन पर्व 22 फरवरी रविवार को है. यह व्रत विशेष रूप से संतान प्राप्ति, शत्रु नाश, बुद्धि और बल की प्राप्ति के लिए किया जाता है. स्कन्द षष्ठी को कंद षष्ठी के नाम से भी जाना जाता है.
तिथि और पंचांग विवरण
दृक पंचांग के अनुसार, 22 फरवरी को शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि सुबह 11 बजकर 9 मिनट तक रहेगी और उसके बाद षष्ठी तिथि शुरू होगी. सूर्योदय 6 बजकर 53 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 16 मिनट पर होगा. रविवार को नक्षत्र अश्विनी शाम 5 बजकर 54 मिनट तक रहेगा, उसके बाद भरणी शुरू होगा.
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स्कन्द षष्ठी व्रत विधि
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जब पंचमी समाप्त होकर षष्ठी तिथि प्रारंभ होती है, तो दोनों तिथियों का संयोग बनता है. ऐसे में स्कन्द षष्ठी का व्रत और पूजा पंचमी तिथि के दिन भी किया जा सकता है, लेकिन मुख्य रूप से षष्ठी तिथि पर ही महत्वपूर्ण माना जाता है. हालांकि, उदयातिथि के अनुसार पूरे दिन पंचमी तिथि का मान होगा.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान स्कन्द को पीला फूल, धूप, दीप, नैवेद्य खासकर कंदमूल जैसे आलू, शकरकंद और फल चढ़ाना फलदायी होता है. व्रत में फलाहार या एक समय भोजन करें. शाम को आरती के बाद व्रत पारण करें. स्कन्द षष्ठी का व्रत करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है.
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शुभ मुहूर्त और योग
शुभ मुहूर्त और योग की बात करें तो 22 फरवरी को ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 12 मिनट से 6 बजकर 3 मिनट तक अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 12 मिनट से 12 बजकर 58 मिनट तक विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 29 मिनट से 3 बजकर 14 मिनट तक है. वहीं, गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 14 मिनट से 6 बजकर 39 मिनट तक अमृत काल सुबह 11 बजकर 4 मिनट से दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक है.
22 फरवरी को सर्वार्थ सिद्धि योग भी है, जो सुबह 6 बजकर 53 मिनट से शाम 5 बजकर 54 मिनट तक और रवि योग शाम 5 बजकर 54 मिनट से 23 फरवरी की सुबह 6 बजकर 52 मिनट तक रहेगा. ये शुभ योग पूजा, व्रत और मंत्र जाप के साथ ही नए कार्य के लिए भी उत्तम माने जाते हैं.
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अशुभ समय
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अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल शाम 4 बजकर 51 मिनट से 6 बजकर 16 मिनट तक है. यमगंड दोपहर 12 बजकर 35 मिनट से 2 बजे तक है. गुलिक काल दोपहर 3 बजकर 25 मिनट से 4 बजकर 51 मिनट तक है. दुर्मुहूर्त शाम 4 बजकर 45 मिनट से 5 बजकर 31 मिनट तक है.