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Shri Prasanna Veeranjaneyaswamy Temple: भय, बाधा और नकारात्मकता से मुक्ति, दर्शन मात्र से मिलती कृपा
महालक्ष्मीपुर के पास पहाड़ी पर श्री प्रसन्नास वीरंजनेयस्वामी मंदिर है. इस मंदिर में स्थापित हनुमान की प्रतिमा अद्भुत है. प्रतिमा के चेहरे पर बड़ी सी मुस्कान देखने को मिलती है. यह प्रतिमा हनुमान के वीर और प्रसन्न रूप को दिखाती है, जो भारत के किसी अन्य हिस्से में देखने को नहीं मिलती है.
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देश में कई चमत्कारी मंदिर मौजूद हैं, जिनकी अपनी मान्यता और इतिहास है. पवनपुत्र हनुमान जी के देशभर में कई चमत्कारी मंदिर हैं, जो भूत-प्रेत बाधा से छुटकारा दिलाते हैं.
कहां है ये मंदिर
कर्नाटक के बेंगलुरु में एक ऐसा मंदिर है, जहां हनुमान अपने अद्भुत रूप से नवग्रह की परेशानी से छुटकारा दिलाने में मदद करते हैं. मंदिर की मान्यता इतनी है कि यहां देश के कोने-कोने से भक्त नवग्रह पूजा कराने के लिए आते हैं.
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किस लिए जाना जाता है ये मंदिर
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महालक्ष्मीपुर के पास पहाड़ी पर श्री प्रसन्नास वीरंजनेयस्वामी मंदिर है. इस मंदिर में स्थापित हनुमान की प्रतिमा अद्भुत है. प्रतिमा के चेहरे पर बड़ी सी मुस्कान देखने को मिलती है. यह प्रतिमा हनुमान के वीर और प्रसन्न रूप को दिखाती है, जो भारत के किसी अन्य हिस्से में देखने को नहीं मिलती है. यह मंदिर भय, बाधा और नकारात्मकता को दूर करने के लिए जाना जाता है.
जानें क्या है मंदिर की ख़ासियत
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माना जाता है कि इस मंदिर में इतनी शक्ति है कि यह नौ ग्रहों की स्थिति को सुधार सकती है. यह आस्था भक्तों में इस वजह से है क्योंकि प्रतिमा बहुत प्राचीन है और इसे स्वयंभू माना जाता है.
गर्भवती महिलाओं के लिए बेहद अहम मंदिर
भक्तों का यह भी मानना है कि इस मंदिर में दर्शन मात्र से गर्भवती महिला को प्रसव संबंधी समस्याओं से राहत मिलती है और बच्चे के जन्म में परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता.
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कब हुआ था मंदिर का निर्माण
बताया जाता है कि वर्तमान मंदिर का निर्माण 1976 में शुरू हुआ था. मंदिर का निर्माण किसी राजा-महाराजा या शासक ने नहीं बल्कि आम लोगों ने कराया था. स्थानीय लोगों का मानना है कि नवग्रह संबंधी समस्याओं से निजात पाने के लिए यह स्थल चमत्कारी है. यहां हनुमान को प्रसन्न करने के लिए खास अनुष्ठान भी किए जाते हैं.
किस दिन ख़ास पूजा और अनुष्ठान किए जाते हैं?
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मंदिर में हनुमान जयंती और मंगलवार को खास पूजा और अनुष्ठान किए जाते हैं. इस अवसर पर भक्तों की भीड़ लगती है. मंगलवार और शनिवार को भक्त अपनी इच्छापूर्ति के लिए विशेष तौर पर मंदिर में आते हैं और अभिषेक कराते हैं. मंदिर को लेकर कोई पौराणिक कथा मौजूद नहीं है. लेकिन, इसकी भक्तों के बीच बहुत मान्यता है.