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चुनाव के बीच PM Modi के गढ़ से बाहर निकल आए शिव के ‘नाग’ राज!
गुजरात के कच्छ की कोयला खदान में वैज्ञानिकों को 27 बड़े-बड़े कंकाल के टुकड़े मिले हैं. पहले इन्हें मगरमच्छ का कंकाल समझा जा रहा था लेकिन बाद में पता चला कि यह एक नाग के जीवाश्म हैं. वैज्ञानिकों के अनुसार इस सांप की आकृति बेहद विशाल थी जैसे कि आजकल के अजगर होते हैं लेकिन यह विषैला नहीं रहा होगा.
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सनातन धर्म दुनिया का एकमात्र ऐसा धर्म है जिसकी शुरूआत कहां से हुई इसके बारे में कोई नहीं जानता | जैसा कि हमारे धर्मग्रंथों में लिखा है कि भगवान विष्णु ने इस संसार की रचना की है, भगवान ब्रह्मा इसका पालन करते हैं और भगवान शिव संहारक की भूमिका निभाते हैं | इन तीनों भगवानों के काम में देवता इनकी सहायता करते हैं | हालांकि ऐसे लोगों की कमी नहीं है जो बात-बात में हिंदू धर्म का मजाक उड़ाते हैं | ऐसे लोग विज्ञान का सहारा लेकर हमेशा हिंदू धर्म को नीचा दिखाने की कोशिश में लगे रहते हैं | लेकिन समय-समय पर विज्ञान से ही इन्हें मुंहतोड़ जवाब भी मिलता है | अब ऐसा ही जवाब वासुकी नाग को लेकर भी मिला है | विज्ञान ने भी वासुकी नाग के अस्तित्व पर मुहर लगा दी है। दरअसल गुजरात में मिले 5 करोड़ साल पुराने जीवाश्म को वैज्ञानिकों ने वासुकी नाम दिया है | वासुकी नाग का हमारे धर्मग्रंथों में बड़े ही महत्वपूर्ण अक्षरों में वर्णन मिलता है। धर्म ग्रंथों के अनुसार, वासुकी नाग को ही मेरु पर्वत से बांधकर देवताओं और दानवों ने समुद्र मंथन किया था | इस काम में वासुकी पूरी तरह लहु लुहान हो गए थे और इसी से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपने गले में स्थान दिया था |
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गुजरात के कच्छ की कोयला खदान में वैज्ञानिकों को 27 बड़े-बड़े कंकाल के टुकड़े मिले हैं | पहले इन्हें मगरमच्छ का कंकाल समझा जा रहा था लेकिन बाद में पता चला कि यह एक नाग के जीवाश्म हैं | वैज्ञानिकों के अनुसार इस सांप की आकृति बेहद विशाल थी जैसे कि आजकल के अजगर होते हैं लेकिन यह विषैला नहीं रहा होगा | इसका वजन 1 हजार किलो तक रहने का अनुमान है | वैज्ञानिक अभी यह पता नहीं कर पाए हैं कि वासुकी नाग क्या खाता था लेकिन इसका विशाल आकार देखकर लगता है कि यह विशालकाय मगरमच्छों को खाता होगा। वैज्ञानिकों की इस खोज पर आपकी क्या राय है, कमेंट करके ज़रूर बताइयेगा।