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रक्षाबंधन पर राहुकाल का साया... 9 अगस्त को राखी बांधने से पहले जान लें शुभ मुहूर्त और सावधानियां
रक्षाबंधन एक ऐसा त्योहार है जो भाई बहन के पावन रिश्ते को दिखाता है, जिसमें एक बहन अपने भाई को एक धागा बांधती है और भाई अपनी बहन को उसकी सुरक्षा और हमेशा उसके साथ खड़े रहने का वचन देता है. लेकिन क्या हो कि इस बार रक्षाबंधन के शुभ मुहूर्त पर भाई अपनी बहन को यह वचन न दे पाए? जी हां इस बार रक्षाबंधन पर एक समय ऐसा भी है जिसमें राखी बांधना आपको भारी पड़ सकता है.
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मैं हमेशा तुम्हारी रक्षा करूंगा." ये शब्द हर रक्षाबंधन पर एक भाई अपनी बहन से ज़रूर कहता है. लेकिन क्या हो अगर इस रक्षाबंधन पर ऐसा समय आए, जब भाई ये वादा कर ही न पाए? 2025 में रक्षाबंधन का त्योहार 9 अगस्त को मनाया जाएगा. मगर इस बार का रक्षाबंधन थोड़ा खास है, क्योंकि इस दिन एक ऐसा समय भी आएगा जब राखी बांधना अशुभ माना जा रहा है. तो सवाल उठता है कि इस बार रक्षाबंधन का शुभ मुहूर्त क्या है? किस समय राखी बांधने से बचना चाहिए? और रक्षाबंधन हर बार सावन में ही क्यों आता है? आइए जानते हैं इससे जुड़ी हर जरूरी जानकारी.
रक्षाबंधन का त्योहार हर साल सावन की पूर्णिमा को मनाया जाता है. यह त्योहार भाई-बहन के प्रेम, सुरक्षा और विश्वास का प्रतीक होता है. इसकी पौराणिक कथा भगवान श्रीकृष्ण और द्रौपदी से जुड़ी है. कथा के अनुसार, एक बार युद्ध के दौरान श्रीकृष्ण की उंगली कट गई थी. तब द्रौपदी ने अपनी साड़ी फाड़कर उनकी उंगली पर बांध दी थी. इस प्रेम और स्नेह से भावुक होकर श्रीकृष्ण ने उन्हें वचन दिया कि वह हर हाल में उनकी रक्षा करेंगे. बाद में जब द्रौपदी पर अपमान का संकट आया, तो श्रीकृष्ण ने उसी वचन को निभाते हुए उनकी लाज बचाई. इसी वचन और प्रेम के प्रतीक के रूप में रक्षाबंधन की परंपरा शुरू हुई. तभी से हर बहन अपने भाई को राखी बांधते हुए उसकी लंबी उम्र और मंगल की कामना करती है.
अब जानते हैं इस साल का शुभ मुहूर्त और राहुकाल
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2025 में रक्षाबंधन का शुभ मुहूर्त 9 अगस्त को सुबह 5:35 बजे से दोपहर 1:24 बजे तक रहेगा. यानी इस दौरान राखी बांधी जा सकती है. लेकिन ध्यान देने वाली बात ये है कि इसी समय के बीच राहुकाल भी आ रहा है. राहुकाल सुबह 9:07 से 10:47 तक रहेगा. ज्योतिष के अनुसार राहुकाल में कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता. राहु को भ्रम, क्लेश और दुर्भाग्य का प्रतीक माना जाता है. इसलिए इस समय भाई को राखी बांधने से बचना चाहिए.
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अब सवाल ये कि रक्षाबंधन हर बार सावन में ही क्यों आता है?
हिंदू पंचांग के अनुसार रक्षाबंधन हर साल सावन पूर्णिमा को मनाया जाता है. यह तिथि धार्मिक रूप से अत्यंत शुभ मानी जाती है. 2025 में पूर्णिमा तिथि 8 अगस्त रात 2:12 बजे से शुरू होकर 9 अगस्त रात 1:24 बजे तक रहेगी. इसी के साथ सावन माह का समापन भी होगा. इसलिए सावन की इस पावन पूर्णिमा पर रक्षाबंधन मनाया जाता है.
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रक्षाबंधन सिर्फ भारत ही नहीं, कई देशों में मनाया जाता है
- नेपाल: नेपाल में 81.19% आबादी हिंदू है. यहां रक्षाबंधन को सामाजिक और धार्मिक पर्व के रूप में मनाया जाता है. जैन समुदाय इसे जैन पूर्णिमा के रूप में भी मनाता है.
- ऑस्ट्रेलिया: 2021 की जनगणना के अनुसार वहां 2.7% हिंदू आबादी है. वहां भी भारत की तरह राखी बांधी जाती है. कुछ गैर-हिंदू भी इसे सांस्कृतिक प्रेम के प्रतीक के रूप में मनाते हैं.
- सऊदी अरब: भले ही यह एक इस्लामिक देश है, लेकिन यहां लगभग 30 लाख भारतीय कामगार रहते हैं. ये लोग निजी तौर पर रक्षाबंधन मनाते हैं. हालांकि आयोजन सार्वजनिक नहीं होते.
- अमेरिका: यहां 30 लाख से ज़्यादा हिंदू रहते हैं. जो भाई-बहन एक शहर में नहीं रहते, वे राखी कोरियर या डाक से भेजते हैं.
- कनाडा: यहां लगभग 2.3% आबादी हिंदू है. रक्षाबंधन पर बहनें भाइयों को राखी बांधती हैं और भाई उन्हें उपहार देते हैं.
इसके अलावा न्यूज़ीलैंड, यूएई, इंडोनेशिया, सिंगापुर, दक्षिण अफ्रीका, फिजी और मॉरिशस जैसे देशों में भी रक्षाबंधन मनाया जाता है. तो इस बार राखी बांधने से पहले शुभ मुहूर्त का ध्यान रखें और राहुकाल में राखी बांधने से बचें. रक्षाबंधन को सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि भाई-बहन के रिश्ते की ऊर्जा के रूप में मनाएं.