Advertisement

Loading Ad...

शनि की दस्तक से दुनिया में हाहाकार , 2025 से 2028 तक की बड़ी घटनाएँ ?

अतीत में जब शनि मीन में आए, तब क्या-क्या हुआ और अब जब मीन में प्रवेश करेंगे, तो 2025 से 2028 में होने वाली घटनाएँ किस प्रकार से दुनिया का नक़्शा बदल सकती है। इसी को लेकर वैदिक ज्योतिष और प्राचीन ग्रंथों की वाणी क्या कहती है ?

Loading Ad...

अब जब 30 साल दंडाधिकारी शनि देवगुरु बृहस्पति की राशि में दस्तक देंगे, दुनिया में खलबली ना मचे, ऐसा इम्पोसिबल है। कर्मफल दाता का काम ही ना सिर्फ़ कर्मों का हिसाब-किताब करना है, बल्कि समय रहते दंड देना भी उनके अधिकार में आता है..यही कारण 29 मार्च वाले शनि गोचर से दुनिया भयभीत है क्योंकि इतिहास गवाह है जब-जब शनि मीन राशि में आए, दुनिया में हाहाकार मचा है. 1903,1933, 1963, 1993 और अब 2025 अतीत में जब शनि मीन में आए, तब क्या-क्या हुआ और अब जब मीन में प्रवेश करेंगे, तो 2025 से 2028 में होने वाली घटनाएँ किस प्रकार से दुनिया का नक़्शा बदल सकती है। इसी को लेकर वैदिक ज्योतिष और प्राचीन ग्रंथों की वाणी क्या कहती है ? 

Loading Ad...

जैसी कर्णी, वैसी भरणी पर यक़ीन करने वाले दंडाधिकारी शनि की दृष्टि से बच पाना असंभव है। उनके न्याय चक्र से क्या देव-दानव और क्या इंसान। हर किसी को ना चाहकर भी गुजरना पड़ता है, तभी तो प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवनकाल में शनि की ढैया-साढ़ैसाती के प्रभाव में रहता है। हालाँकि कर्मफल दाता जब अपने संहारक रूप में होते हैं, तो धरती , आकाश, पाताल में हाहाकार मच जाता है। अतीत में जब-जब शनि मीन राशि में आए, विश्व शक्तियों में अफरा-तफरी मची है…

Loading Ad...



Loading Ad...

शनि के मीन में आने की विध्वंसकारी घटनाएं 

1903-1905 इस समय जब शनि मीन में मौजूद रहे, तब रूस-जापान का युद्ध हुआ और रूसी क्रांति की शुरुआत हुई। 1933-1935…इस समय शनि पुनः गुरु के प्रभाव वाली मीन राशि में आए, तब इटली का तानाशाह हिटलर की सत्ता का उदय हुआ और फिर इटली के इथियोपिया पर हमला हुआ।1963 से 1966 का समय, शनि की ग्रह चाल में मीन राशि थी, उस वक़्त अमेरिका में राष्ट्रपति केनेडी की हत्या हुई।वियतनाम युद्ध में अमेरिका की निर्णायक भूमिका रही और सबसे बड़ी घटना भारत-पाकिस्तान के बीच छिड़ा युद्ध। इसके बाद 1993 से 1996 तक, शनि पुनः मीन राशि में आए, तभी रवांडा नरसंहार हुआ।


बृहत् संहिता, फलदीपिका, लघु पराशरी, इन्हीं प्राचीन धर्म ग्रंथों में ग्रह गोचर के प्रभाव को बताते हुए ये बताया गया कि जब शनि जल तत्व राशि (कर्क, वृश्चिक, मीन) में प्रवेश करता है, तो समुद्री और जलीय आपदाएं, व्यापार में अस्थिरता, और वैश्विक सत्ता परिवर्तन होते हैं।वैश्विक न्याय व्यवस्था, प्रशासनिक सुधार और आध्यात्मिक गतिविधियों में वृद्धि होती है। और तो और, न्याय और प्रशासन में बड़े बदलाव आते हैं, सत्ता परिवर्तन होता है, और भ्रष्टाचार बढ़ सकता है। इसी कड़ी में वैदिक ज्योतिष का हवाला देते हुए भारत के संदर्भ में 2025 से 2028 तक की बड़ी घटनाओं में ये कहा जा रहा है कि आर्थिक मंदी का ख़तरा बढ़ सकता है।तकनीकी वित्तीय सुधारों को जन्म दे सकता है।बैंकिंग और वित्तीय घोटाले सामने आ सकते हैं। सत्ता परिवर्तन, अमेरिका, रूस, चीन और भारत में राजनीतिक अस्थिरता संभव है।बायोटेक और फार्मा इंडस्ट्री में नए आविष्कार, चिकित्सा क्षेत्र में नई दवाइयों और इलाज की खोज होगी।न्यायिक और प्रशासनिक सुधार होंगे। जलवायु परिवर्तन के कारण चक्रवात और भूकंप बढ़ जाएँगे। देश की राजनीति में एक नया नेतृत्व उभर सकता है। 

Loading Ad...


यह भी पढ़ें

शनि गोचर को लेकर तमाम तरह की संभावना जताई जा रही है। जो कि 30 साल बाद शनि की चाल में परिवर्तन होगा और स्वाभाविक सी बात है। विश्व ख़ुद में इस परिवर्तन को महसूस करेगा लेकिन इसी परिवर्तन में चीजें कितनी बदल जाएँगी। अब ये तो वक़्त बताएगा।

LIVE
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...