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तिरुमला की पवित्रता हुई कलंकित, बालाजी के प्रसाद में जानवर की चर्बी

या सच में तिरुमला की पवित्रता को कलंकित किया गया है ? सुबह-शाम भगवान तिरुपति बालाजी को क्या इन्हीं मिलावटी लड्डुयों का भोग लगाया जा रहा था? नायडू सरकार के आरोपों में अगर सच्चाई है, तो क्या इसका दंड पूरी मानवजाति को भुगतना पड़ेगा ? देखिये इस पर हमारी ये ख़ास रिपोर्ट

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तिरुमला में विद्यमान भगवान तिरुपति बालाजी का अलौलिक धाम हिंदुओं का सबसे बड़ा तीर्थस्थल है और आज उन्हीं की चौखट से एक ऐसी ख़बर सामने आई, जिसने भक्तों की आस्था को कुचलकर रख दिया। भगवान तिरुपति के जिस लड्डू प्रसादम को ग्रहण करके उनके भक्त ख़ुद को धन्य समझते थे, उसी प्रसाद में जानवर की चर्बी मिले होने की बात सामने आई। या फिर यूँ कहें कि प्रसाद के नाम पर बीफ़ खिलाया जा रहा था। और इस बात का खुलासा जैसे ही प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने किया, तिरुमला पर्वत से लेकर पूरी दुनिया में कोहराम मच गया।

सत्ता के गलियारे में सियासी बवाल मचा हुआ है क्योंकि नायडू सरकार की तरफ़ से गुनहगार के कटघरे में पूर्व सीएम जगनमोहन रेड्डी को खड़ा किया गया है। क्या सच में शुद्ध घी की जगह जानवरों की चर्बी मिलाई जा रही थी? क्या सच में तिरुमला की पवित्रता को कलंकित किया गया है? सुबह-शाम भगवान तिरुपति बालाजी को क्या इन्हीं मिलावटी लड्डूयों का भोग लगाया जा रहा था? नायडू सरकार के आरोपों में अगर सच्चाई है, तो क्या इसका दंड पूरी मानवजाति को भुगतना पड़ेगा? देखिये इस पर हमारी ये ख़ास रिपोर्ट।

हिंदुओं का सबसे बड़ा तीर्थ स्थल तिरुपति बालाजी मंदिर है। भगवान वेंकटेश्वर की इस दुनिया का रहस्य आज तक कोई सुलझा नहीं पाया। जितना रहस्यमय है, उतना चमत्कारी भी। यहाँ भगवान वेंकटेश्वर की अलौलिक प्रतिमा इतनी चमत्कारी है कि यहाँ वाले प्रत्येक शख़्स को यही प्रतीत होता है कि पूरी की पूरी प्रतिमा जीवंत है। मतलब ये कि आँखों देखी भगवान वेंकटेश्वर के साक्षात दर्शन होते हैं। बक़ायदा मंदिर का तापमान कम रखा जाता है क्योंकि प्रतिमा पर पसीने की बूंदें साफ़ नज़र आती हैं। प्रतिमा पर चंदन का लेप लगाने की जो परंपरा है, उसमें माँ लक्ष्मी का साक्षात दर्शन होता है। मंदिर की गर्भगृह में मौजूद एक दीपक हमेशा प्रज्वलित रहता है। ना ही इसमें तेल डाला जाता है और ना कभी घी, फिर भी सदैव प्रकाशमय रहता है। इतना चमत्कारी और पवित्र है कि प्रभु तिरुपति बालाजी की चौखट से कभी कोई भक्त ख़ाली हाथ नहीं जाता है। और आज प्रभु के इसी रहस्यमय लोक में उन्हीं के भक्तों को ठगा गया है। ना सिर्फ़ मंदिर की पवित्रता को खंडित किया गया है, बल्कि भक्तों की श्रद्धाओं को भी कुचला गया है। बीते दिनों मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने एनडीए विधायक दल की बैठक बुलाई और इसी बैठक में सनसनीख़ेज़ खुलासा करते हुए मंदिर के प्रसाद में animal fat यानी जानवर की चर्बी मिलाए जाने की बात कही।

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सीएम चंद्रबाबू नायडू इस बात का दावा किया है- 

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पिछले 5 सालों में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने तिरुमला की पवित्रता को कलंकित किया है।क्योंकि इन्हीं की सरकार में श्री वेंकटेश्वर मंदिर द्वारा प्रसाद के रूप में दिए जाने वाले लड्डू बनाने के लिए शुद्ध घी की जगह जानवरों की चर्बी का उपयोग किया गया था। प्रसाद के रूप में वितरित किए जाने वाले लड्डू बनाने के लिए गोमांस की चर्बी, मछली के तेल और ताड़ के तेल का इस्तेमाल किया जा रहा था।एक बार फिर यह साबित हो गया है कि राजनीति के लिए चंद्रबाबू नायडू कुछ भी गलत करने से नहीं हिचकिचाएंगे।

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अब जो कि मंदिर का संचालन टीटीडी यानी तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम करता है, जिसमें सरकारी अधिकारी होते हैं, और साफ़ सी बात है। जिसकी सरकार, उसी के हाथों में मंदिर की देखरेख। इन आरोपों के बीच जैसे ही जाँच के सैंपल भेजे गए, उसमें मछली का तेल मिले होने की बात सामने आई है, यानी कि जानवरों की चर्बी जिसमें बीफ़ के होने की पुष्टि अब तक नहीं हुई है। अब जो कि नायडू सरकार इस मामले में रेड्डी पर हमलावर है, तो ख़ुद को पाक साफ़ दिखाने के लिए गुनहगारों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई करने का आश्वासन भी दे रही है और साथ ही साथ शुद्ध घी से प्रसादम बनाए जाने की बात भी कह रही है। कहा तो ये भी जा रहा है कि मंदिर में हर चीज को सैनिटाइज किया गया है। फ़िलहाल मुख्यमंत्री के इन आरोपों को वाईएसआर पार्टी सिर से नकार रही है, इसे दुर्भाग्यपूर्ण बता रही है। इन आरोप-प्रत्यारोप के बीच सबसे बड़ा सवाल ये है कि जानवरों की चर्बी से बनाए जा रहे लड्डू अगर भगवान तिरुपति बालाजी के समक्ष भी रखा जा रहा था। उन्हें इसका भोले लगाया जा रहा है, तो इस पाप का भागी कौन होगा? क्या पूरी दुनिया को अब इसका भयंकर अंजाम भुगतना पड़ेगा? 

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