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भगवाधारी योगी ने दिखाई शिव महापुराण की सबसे बड़ी ताक़त

बटेंगे-कटेंगे का नारा देने वाले योगी बाबा को आख़िर अब ये क्यों कहना पड़ रहा है कि अब ना ही हम आपस में बंटे हैं। ना ही जातिवाद में बंटे हैं और ना ही उपासना विधि का विवाद है। इसके पीछे की वजह क्या है ? कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा की कथा से योगी बाबा ऐसा क्या बोले हैं, जिसे पूरी दुनिया काम लगाकर सुन रही है। शिव महापुराण की किस शक्ति को योगी बाबा ने दुनिया के सामने उजागर किया है?ये जानने के लिए देखिये धर्म ज्ञान

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भिक्षा यात्रा हो या फिर हिंदू एकता यात्रा दीपंकर महाराज हो या फिर आचार्य धीरेंद्र शास्त्री देश के संत समाज ने ठाना है,  हिंदुओं को एकजुट करना है। हिंदू तीर्थों की पवित्रता पर कोई आँच ना आए। जिहादी ताक़तों पर लगाम लग सके। सनातन पर कुठाराघात करने वाली ताक़तों का अंत हो सके और भारत हिंदू राष्ट्र घोषित किया जाए। इसके लिए देश का संत समाज आज सड़कों पर है।मोदी राज में भगवा की लहर चल पड़ी है…इसी कड़ी में मठाधीश से मुख्यमंत्री बने योगी बाबा ने शिव महापुराण की जिस शक्ति का बखान किया है, उसके आग जातियों में बंटा हिंदू भी एक हो जाता है। बटेंगे-कटेंगे का नारा देने वाले योगी बाबा को आख़िर अब ये क्यों कहना पड़ रहा है कि अब ना ही हम आपस में बंटे हैं, ना ही जातिवाद में बंटे हैं और ना ही उपासना विधि का विवाद है। इसके पीछे की वजह क्या है ? कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा की कथा से योगी बाबा ऐसा क्या बोले हैं, जिसे पूरी दुनिया काम लगाकर सुन रही है। शिव महापुराण की किस शक्ति को योगी बाबा ने दुनिया के सामने उजागर किया है? ये जानने के लिए देखिये धर्म ज्ञान 

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जटाधारी भगवान शिव की महिमा को जिसने जाना, उसने ख़ुद को धन्य माना इस धरा के कण-कण में बसे भगवान शिव, देवों में महादेव हैं। इनकी महिमा ऐसी है कि देवता ही नहीं, राक्षस और संसार के अन्य प्राणियों ने इन्हें पूजा और इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह सभी प्राणियों के प्रति भगवान शिव का एक समान भाव रखना। त्रिकालधारी की जीवन शैली हो या उनका कोई भी अवतार, उन्होंने अपने हर रूप में मानव को जीवन जीने का तरीक़ा सिखाया है…जो कोई भी ख़ुद को शिव की भक्ति से जोड़ता है, उसे जीवन जीने की सीख भी मिलती है। जैसे बाहरी सुंदरता की जगह गुणों को चुनना, जीवन के हर रूप को खुलकर जीना, नकारात्मकता में सकारात्मक बने रहना और अपनी प्राथमिकताओं को समझना ख़ुद में शिव को ढूँढने के लिए हमेशा से धर्मग्रंथों का सहारा लिया गया। शिव महापुराण है, मुख्यरूप से एक ऐसा पुराण है, जिसमें शिव के जीवन विवाह, संतान, रहन-सहन आदि के बारे में विस्तार से बताया गया है और किस प्रकार से भगवान शिव की गाथा आज भी लोगों में एकता की पाठ पढ़ा रही है, यही समझाना के लिए योगी बाबा सामने आए। दरअसल वाराणसी में आयोजित पंडित प्रदीप मिश्रा की कथा में योगी बाबा उपस्थित रहे…इस मौक़े पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिव महापुराण की असल शक्ति से सनातनियों का साक्षात्कार कराया मंच से योगी बाबा ने कहा "कौन कहता है कि हम आपस में बंटे हैं? कहां जातिवाद है, कहां उपासना विधि का विवाद है? यह कथा इस बात का प्रमाण है कि हम सभी मिलकर राष्ट्रवाद के लिए समर्पित हैं। एक धर्म योद्धा के रूप में यह कथा हमारे सांस्कृतिक एकता और राष्ट्र निर्माण का संदेश देती है।"

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योगी बाबा के इसी बयान का मतलब ये है कि शिव महापुराण की गाथा को सुनने के लिए आया व्यक्ति जिस भी जाती का हो जिस भी पंथ का हो जिस भी उपासना विधि का अनुयायी हो जब सबकी एकजुटका दिखती है, तो ये सांस्कृतिक एकता और राष्ट्र निर्माण का संदेश देती है। बहरहाल शिव महापुराण को लेकर योगी बाबा की यही मैसेज कट्टरपंथी ताक़तों के कानों ने चुभ रहा है योगी जी के इन विचारों से आप कितने सहमत है, कमेंट करके ज़रूर बताइयेगा। 

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