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पीएम मोदी के सामने राहुल फेल! शंकराचार्य बोले- टक्कर देना आसान नहीं

ज्योर्तिमठ शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती आज जिस गद्दी पर आसीन हैं, उसकी अपनी एक गरिमा है और उसी गरिमा में रहकर वे आम जनमानस को आध्यात्म से साक्षात्कार करवा रहे हैं. संत समाज से जुड़ी एक ऐसी प्रभावशाली शख्सियत हैं, जिनके मार्गदर्शन में आम जनमानस भारत की परंपरा, संस्कृति और विरासत से अवगत होता है. उनकी कही गई प्रत्येक बात, दिए गए उपदेश और सांकेतिक भविष्यवाणियों को विदेशी तक कान लगाकर सुनते हैं.

पीएम मोदी के सामने राहुल फेल! शंकराचार्य बोले- टक्कर देना आसान नहीं
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कथावाचक मोरारी बापू को धर्मदंड की सज़ा सुनाने वाले शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती एक बार फिर मीडिया की सुर्खियों में हैं. अबकी बार चर्चा का विषय पीएम मोदी की बढ़ती ताकत के आगे राहुल गांधी का टिकना है. राजनीति के ये दो बड़े चेहरे, जनता के चहेते हैं और लोकतंत्र की राजनीति का मुख्य हिस्सा हैं. लेकिन किसकी ताकत में मज़बूती है? इसी को लेकर शंकराचार्य ने देश की जनता को आईना दिखाने का कार्य किया है.

ज्योर्तिमठ शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती आज जिस गद्दी पर आसीन हैं, उसकी अपनी एक गरिमा है और उसी गरिमा में रहकर वे आम जनमानस को आध्यात्म से साक्षात्कार करवा रहे हैं. संत समाज से जुड़ी एक ऐसी प्रभावशाली शख्सियत हैं, जिनके मार्गदर्शन में आम जनमानस भारत की परंपरा, संस्कृति और विरासत से अवगत होता है. उनकी कही गई प्रत्येक बात, दिए गए उपदेश और सांकेतिक भविष्यवाणियों को विदेशी तक कान लगाकर सुनते हैं. यही वजह है कि उनका नाम बड़े आदर और सम्मान के साथ लिया जाता है. शंकराचार्य कई दफ़ा विवादों में रहे हैं. लोगों ने उन्हें मोदी-योगी विरोधी कहा है, तो कभी उनके शंकराचार्य होने पर भी सवाल उठाए हैं. हालाँकि, अबकी बार शंकराचार्य ने राहुल गांधी की तुलना में पीएम मोदी की ताक़त पर जो सांकेतिक भविष्यवाणी की है, उसे सुनकर आप भी अचंभित रह जाएँगे. क्या है ये पूरा माजरा? देखिए हमारी आज की इस रिपोर्ट में.

2006 में स्वामी स्वरूपानंद से दीक्षा लेने के बाद, वर्ष 2022 में अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती शंकराचार्य के पद पर आसीन हुए. आज की तारीख में वे ज्योतिर्मठ पीठ के 46वें शंकराचार्य हैं. आपने इन्हें गाय को राष्ट्रीय माता का दर्जा दिलाने की माँग को लेकर सड़कों पर उतरते हुए देखा होगा. ज्ञानवापी परिसर में पूजा-पाठ की माँग को लेकर 108 घंटे तक अनशन पर बैठे हुए भी देखा होगा. 2019 के लोकसभा चुनाव में काशी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विरोध करते हुए भी इन्हें देखा गया था. श्री भगवान पाठक का नामांकन रद्द होने पर इन्होंने पीएम मोदी को तानाशाह तक कह दिया था.

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ये वहीं शंकराचार्य हैं, जिन्होंने रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा पर सवाल उठाए थे. उन्होंने कहा था कि अधूरे मंदिर में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा धर्म ग्रंथों के विरुद्ध है. अपने बयान में उन्होंने समझाया था कि मंदिर भगवान का शरीर होता है. उसके भीतर स्थापित मूर्ति आत्मा होती है. मंदिर का शिखर भगवान की आंखें हैं, कलश उनका सिर और मंदिर में फहराया गया ध्वज उनके बाल माने जाते हैं. ऐसे में बिना सिर या आंखों के शरीर में प्राण-प्रतिष्ठा करना शास्त्रों के विपरीत है. हालाँकि, 22 जनवरी से एक दिन पहले शंकराचार्य के सुर बदले-बदले नजर आए. उन्होंने खुद को पीएम मोदी का सबसे बड़ा प्रशंसक बताते हुए खुलकर समर्थन भी दिया.

सच्चाई यह है कि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद हिंदुओं का स्वाभिमान जाग उठा है. यह कोई छोटी बात नहीं है. हमने कई बार सार्वजनिक मंचों से यह कहा है कि हम मोदी विरोधी नहीं, बल्कि उनके प्रशंसक हैं. हम उनकी इसलिए प्रशंसा करते हैं क्योंकि स्वतंत्र भारत के इतिहास में शायद ही कोई ऐसा प्रधानमंत्री रहा हो जो इतनी दृढ़ता से हिंदू भावनाओं के साथ खड़ा हुआ हो. हम किसी की आलोचना नहीं कर रहे, लेकिन सच यही है कि नरेंद्र मोदी पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने खुलकर हिंदुओं की चिंता की और उनके सम्मान की रक्षा की.

सौ बात की एक बात यही है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने जो कुछ भी शास्त्र आधारित कहा, उसे कई लोगों ने अपने-अपने अनुसार तोड़-मरोड़कर पेश किया. उनके विरोधी हों या प्रशंसक, उनकी बातों को संदर्भ से काटकर प्रस्तुत करने का प्रयास करते रहे हैं. लेकिन अब, जब उन्होंने राहुल गांधी और नरेंद्र मोदी की ताक़त की तुलना करते हुए बयान दिया, तो हर कोई चौंक गया. बीते दिनों देश के तमाम धार्मिक, राजनीतिक और वैश्विक मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखने वाले शंकराचार्य ने इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बढ़ती ताक़त का ज़िक्र किया. उन्होंने स्पष्ट कहा कि राहुल गांधी पीएम मोदी को टक्कर देने की कोशिश तो कर रहे हैं, लेकिन जिस मजबूती के साथ नरेंद्र मोदी आज खड़े हैं, उन्हें वहाँ से हिला पाना आसान नहीं है. इसका सीधा मतलब यही है कि वे यह मानते हैं कि राहुल गांधी की तुलना में पीएम मोदी कहीं अधिक शक्तिशाली, स्थिर और जनविश्वास से भरपूर नेता हैं.

“राहुल गांधी, पीएम मोदी को टक्कर देने के लिए प्रयासरत हैं. लेकिन टक्कर देना आसान नहीं है. लोग कोशिश तो कर रहे हैं, लेकिन अब तक पीएम मोदी को कोई हिला नहीं पाया है. वे जहां खड़े हैं, मजबूती से खड़े हैं. आज तक कोई उन्हें उस स्थान से डिगा नहीं सका है. यह विश्लेषण का विषय है कि वैश्विक राजनीति में वे कितनी बड़ी ताकत बन चुके हैं. हमने देखा है कि अपनी पार्टी में वे सबसे ताक़तवर हैं. जो नियम वे बनाते हैं, वही चलते हैं और सभी को उनका पालन करना पड़ता है. भले ही हम विदेश न गए हों, लेकिन देश में साफ़ देखा है कि उनकी पार्टी में उनसे अधिक ताक़तवर कोई नहीं है.” ये शब्द हैं ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज के, जिन्होंने हाल ही में राहुल गांधी और नरेंद्र मोदी की ताक़त की तुलना करते हुए पीएम मोदी की स्थिरता और नेतृत्व क्षमता की खुलकर सराहना की. यह बयान उस समय आया है जब विपक्ष बार-बार मोदी को घेरने की कोशिश करता रहा है, लेकिन हर बार उन्हें असफलता ही हाथ लगी है.

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अतीत इस बात का गवाह है कि पीएम मोदी पर विरोधियों और विपक्षी शक्तियों की जितनी भी भविष्यवाणियाँ हुईं, वे ज़्यादातर फेल हुई हैं. कभी कहा गया कि एक चाय बेचने वाला प्रधानमंत्री नहीं बन सकता. लेकिन देश की जनता ने उन्हें 2014 में पहली बार प्रधानमंत्री बनाया. फिर 2019 में कहा गया कि अबकी बार सत्ता में वापसी नहीं होगी, लेकिन मोदी दोबारा प्रधानमंत्री बने. और 2024 के चुनाव से पहले यह शिगूफ़ा छोड़ा गया कि अगर सरकार बनी भी, तो छह महीने से ज़्यादा नहीं टिकेगी. मगर आज मोदी 3.0 सरकार पूरी ताक़त के साथ सत्ता में डटी हुई है.इन घटनाओं से यह साफ़ होता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी न केवल देश के भीतर एक मज़बूत नेतृत्व का चेहरा हैं, बल्कि वैश्विक मंच पर भी एक स्थिर और निर्णायक नेता के रूप में देखे जाते हैं. उनके ख़िलाफ़ बनाई गई राजनीतिक रणनीतियाँ और घोषणाएँ बार-बार धराशायी होती रही हैं. यह भी एक तरह से जनता के उस अटूट भरोसे का प्रमाण है, जो वह बार-बार मोदी पर जताती रही है. इस संदर्भ में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का यह बयान केवल एक धार्मिक नेता का राजनीतिक विश्लेषण नहीं, बल्कि उन तमाम विरोधियों के लिए एक आईना है, जो हर बार मोदी के ख़िलाफ़ खड़े होते हैं, मगर हर बार पराजित हो जाते हैं.

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