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सीकर के संत को देख भावुक हुए प्रेमानंद महाराज, आंखों से छलके आंसू, आसन पर बिठाकर खुद नीचे बैठे, Video Viral

राजस्थान के सीकर ज़िले से जुड़ी एक बेहद भावुक और आध्यात्मिक घटना इन दिनों लोगों के दिलों को छू रही है. रैवासा पीठाधीश्वर राजेंद्र दास महाराज, जब वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज से मिलने पहुंचे, तो वहाँ का दृश्य देखकर हर कोई भाव-विभोर हो गया.

Source: Premananda Maharaj (Social Media)
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राजस्थान के सीकर ज़िले से जुड़ी एक बेहद भावुक और आध्यात्मिक घटना इन दिनों लोगों के दिलों को छू रही है. रैवासा पीठाधीश्वर राजेंद्र दास महाराज, जब वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज से मिलने पहुंचे, तो वहाँ का दृश्य देखकर हर कोई भाव-विभोर हो गया. प्रेमानंद महाराज उस समय अस्वस्थ थे, फिर भी जब उन्होंने राजेंद्र दास को आते देखा, तो वे खुद उठकर दरवाज़े तक उन्हें लेने चले आए. उनकी आंखों में करुणा थी और पूरे मन से उन्होंने राजेंद्र दास महाराज को दंडवत प्रणाम किया. यह देखकर राजेंद्र दास महाराज भी खुद को रोक नहीं पाए और उन्होंने भी प्रेमानंद जी को दंडवत किया. दोनों संतों की इस आपसी विनम्रता और प्रेम को देखकर वहां मौजूद हर भक्त की आंखें नम हो गईं. यह साबित करता है कि सच्चे संतों का तेज उनके चेहरे या वस्त्रों में नहीं, उनके व्यवहार और भावनाओं में होता है.

पदों में बही श्रद्धा की धारा

इस पावन भेंट के दौरान दोनों संतों के बीच भक्ति, सम्मान और गुरु वंदना का सुंदर आदान-प्रदान हुआ. प्रेमानंद महाराज ने खुद अपने प्रिय संत को अपने आसन पर बिठाया और राजेंद्र दास महाराज के चरण धोकर उनका सम्मान किया. इसके बाद उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास की लिखी विनय पत्रिका से कुछ पद सुनाए.
राजेंद्र दास महाराज की मुस्कान में जहां ममता और कोमलता झलक रही थी, वहीं प्रेमानंद महाराज की आंखों में विनम्रता के आंसू थे. राजेंद्र दास महाराज ने भी प्रेमानंद जी के अनुरोध पर ‘प्यारी तेरे नैना’ जैसे पद सुनाए, जिसे सुनते समय प्रेमानंद महाराज ज़मीन पर नीचे बैठकर हाथ जोड़कर श्रद्धा से सुनते रहे. यह दृश्य वहां मौजूद भक्तों के लिए एक आध्यात्मिक अनुभव बन गया.

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वीडियो वायरल, लाखों लोगों के मन को छुआ

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इस संत मिलन का वीडियो प्रेमानंद महाराज के यूट्यूब चैनल ‘भजन मार्ग’ पर भी साझा किया गया. वीडियो ने लोगों के दिलों को इतना छुआ कि महज़ एक दिन में ही इसे 10 लाख से अधिक लोगों ने देख लिया. अब तक ये वीडियो 14 लाख से ज़्यादा बार देखा जा चुका है, और हर जगह लोग इन दोनों संतों की सरलता और भक्ति की सराहना कर रहे हैं. इतना ही नहीं, इस मिलन की रील इंस्टाग्राम पर भी जमकर वायरल हो रही है. लोग कमेंट में लिख रहे हैं कि ऐसे संतों को देखकर ही समाज में प्रेम, विनम्रता और सच्ची भक्ति की सीख मिलती है.

सच्ची भक्ति दिखावे में नहीं, विनम्रता में होती है

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यह घटना हमें सिखाती है कि सच्चे संतों की महिमा उनके कपड़ों, पद या प्रचार में नहीं, बल्कि उनकी नम्रता, करुणा और प्रेम में होती है. जब दो बड़े संत इस तरह एक-दूसरे के सामने झुकते हैं, तो यह केवल एक दिखावा नहीं, बल्कि सच्ची आत्मा की पहचान होती है. यही भक्ति की असली परिभाषा है, दूसरे को अपने से बड़ा मानना, और उसमें भी आनंद पाना.

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