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भविष्यवाणी : नीच राशि में मंगल के आते ही युद्ध की चिंगारी कितने मुल्कों को भस्म कर देगी ? भविष्यवाणी

भविष्यवाणी : थर्ड वर्ल्ड वॉर का आग़ाज़ ! अब गरजेंगी तोपें मचेगी तबाही ! कितने मुल्कों का नक़्शा मिट जाएगा ? अब कितनों का अमंगल होगा ? देखिये सिर्फ़ धर्म ज्ञान पर

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भविष्यवाणी :  अब गरजेंगी तोपें और मचेगी तबाही , आप कहेंगे इसमें नया क्या है? ये तो हो रहा है लेकिन अब इसी विध्वंसकारी पिक्चर में कितने ही देश ऐसे हैं, जिनका अस्तित्व मिटने वाला है। ग्रह-चाल में ग्रहों के सेनापति मंगल का नीच राशि में गोचर, तबाही का संकेत लेकर आ रहा है। यानी की तृतीय विश्व युद्ध की घंटी किसी भी वक़्त बज सकती है। इज़रायल युद्ध की समाप्ति का ऐलान कर चुका है, लेकिन क्या समास उसकी शर्तों के आगे घुटने टेकेगा। युद्ध के मुहाने पर खड़ी समूची दुनिया को अब क्या मंगल की चाल मौत के मुँह में ढकेलेगी। मंगल के नीच राशि में गोचर से विश्व शक्तियाँ भयभीत क्यों है?

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भूमि पुत्र मंगल जिन्हें शास्त्रों में पराक्रम, स्फूर्ति, साहस, आत्मविश्वास, धैर्य, देश प्रेम, बल, रक्त, महत्वकांक्षा एवं शस्त्र विद्या से जोड़ा गया है। ग्रहों के सेनापति मंगल की ताक़त ऐसी है कि चाहे तो सभी प्राणियों को जीवन शक्ति दे,,नहीं तो सब कुछ तबाह कर दे। यही कारण है कि मंगल की अशुभता में अग्नि कांड, भूकंप, गैस दुर्घटना और वायुयान दुर्घटना की संभावना अत्याधिक होती है। बार्डर पर तनाव की स्थिति बन जाती है। राजनीतिक माहौल में उथल-पुथल मचती है। गृह युद्ध जैसे हालात बन जाते हैं।ऊपर से मंगल-शनि के षडाष्टक योग में दुर्घटनाएं, आगजनी, आतंक और तनाव बढ़ जाता है। दुनियाभर में आंदोलन धरना प्रदर्शन दुर्घटना बढ़ जाती है। आप कहेंगे, मंगल से जुड़ी अमंगल घटनाओं का ज़िक्र क्यों ? इसके पीछे की वजह है 20 अक्टूबर से मंगल का अपनी नीच राशि कर्क में महा राशि परिवर्तन । ज्योतिष की दुनिया में , जब-जब मंगल अपनी नीच राशि में प्रवेश करते हैं, तो इसका विध्वंसकारी परिणाम पूरी दुनिया को भुगतना पड़ता है।

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दरअसल इज़रायल-हमास और रुस-यूक्रेन के बीच छिड़ी जंग रुकने का नाम नहीं ले रही है। ना सिर्फ़ भारत, बल्कि कितने ही देश अपनी शांतिदूत वाली भूमिका निभा चुके है लेकिन हर कोई इस युद्ध को रोकने में नाकाम रहा। यूक्रेन के अस्तित्व को मिटाने पर अड़े रूस के साथ नार्थ कोरिया की सेना भी युद्ध के मैदान में उतर चुकी है। अब तक सनकी तानाशाह किम जोंग उन हथियार, गोला बारूद के सहारे रूस की मदद कर रहा था, लेकिन अब उसकी ढाल बनकर ख़ुद की सेना जंग के मैदान में उतार दी है। दूसरी तरफ़ चारों तरफ़ से दुश्मनों से घिरा इज़रायल है, जो युद्ध विराम का ऐलान कर चुका है, लेकिन शर्तों के साथ ख़ुद सामने आकर इज़रायली पीएम बेंजामिन नेत्नयाहू ने इस बात की शर्त रखी है कि हमास उसके बंधकों को रिहा कर दे। जो कि हमास के क़ब्ज़े में 102 लोग हैं, जो ना सिर्फ़ इज़रायल के नागरिक है बल्कि अन्य देशों से भी हैं। ऐसे में क्या हमास इज़रायल के शर्तों पर इस युद्ध को विराम देगा ? हालाँकि इसकी सँभावना ना के बराबर है, क्योंकि इज़रायल पहले ही हमास को पूरी तरह से बर्बाद कर चुका है। इन्हीं हालातों के बीच भीषण युद्ध की चिंगारी धधक रही है। जैसे ही इस चिंगारी को हवा लगेगी। तृतीय विश्व युद्ध छिड़ जाएगा और ऐसा होने की 100 फ़ीसदी संभवतः मंगल के इसी राशि परिवर्तन में बताया जा रहा है।

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ज्योतिषों की माने, तो 20 अक्तूबर को मंगल कर्क राशि जो कि उनकी नीच राशि है, उसमें प्रवेश कर जाएँगे। जिसके बाद से 21 जनवरी तक का समय समूचे विश्व के लिए ख़तरे से कम नहीं होगा। युद्ध के हालात और बेहाल हो जाएँगे आलम ये है कि कितने ही देशों का अस्तित्व ख़तरे में भी आ सकता है। जो की नवग्रहों में मंगल ही भूमि का प्रतिनिधित्व करते हैं। स्वयम् में भूमि पुत्र है, इस कारण नीच राशि में उनकी मौजूदगी तबाही की पिक्चर ज़रूर दिखाएगी और ना सिर्फ़ इसका असर युद्ध के मैदान पर दिखेगा..बल्कि भूकंप जैसी प्रकृतिक आपदाओं के आने की भी पूरी सँभावना है..यही कारण है कि अभी से मंगल की शांति के लिए हनुमान जी की पूजा करने का उपाय बताया जा रहा है। वैदिक ज्योतिष अनुसार, ग्रह-चाल में होने वाले यही परिवर्तन क्या विश्व पटल पर अन्य देशों को भी प्रभावित करते हैं, क्या आप भी इस पर यक़ीन करते हैं। 

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