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तिरुपति बालाजी से आई हिंदुओं की आस्था से खिलवाड़ करने वाली तस्वीर !

अबकी बार मंदिर परिसर से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसे देख भक्तों में ग़ुस्से का उबाल है.10 मिनट के अंदर-अंदर ऐसा क्या हुआ है, जिसके चलते तिरुपति बालाजी का ये धाम पुनः चर्चा का विषय बन गया है ?

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तिरुमला में विद्यमान भगवान तिरुपति बालाजी का अलौलिक धाम हिंदुओं का सबसे बड़ा तीर्थस्थल है और आज उन्हीं की चौखट से एक बार फिर हिंदुओं की आस्था से खिलवाड़ हुआ है. प्रसाद में बीफ मिलाए जाने का प्रकरण आपको याद होगा, पिछले साल प्रसाद में गो मांस खिलाने का षड्यंत्र और तिरुमला की पवित्रता को कलंकित किये जाने की हिमाकत जो की गई थी, दुनिया के सामने उसका पर्दाफ़ाश हुआ और अब एक बार फिर तिरुमाला से ही हिंदुओं की आस्था को आहत किया गया है. अबकी बार मंदिर परिसर से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसे देख भक्तों में ग़ुस्से का उबाल है. 10 मिनट के अंदर-अंदर ऐसा क्या हुआ है, जिसके चलते तिरुपति बालाजी का ये धाम पुनः चर्चा का विषय बन गया है ? 

आज आपका ये जानना ज़रूरी है कि दुनिया का कोई ऐसा देश नहीं है, जहां धार्मिक आस्था को लेकर नियम ना बने हो. मक्का और मदीना में गैर मुस्लिमों का प्रवेश वर्जित है. अगर आप मालदीव जायेंगे, तो ये पायेंगे कि यहाँ ग़ैर मुस्लिमों को सार्वजनिक रूप से अपनी धार्मिक मान्यताओं का पालन करने की अनुमति नहीं है और ना ही यहाँ कोई हिंदू मंदिर है. दरअसल हर देश में हर धर्म के माननेवाले लोगों को अपने धर्मस्थल बनाने और पूजा-पाठ की अनुमति है, लेकिन दूसरे धर्म का व्यक्ति दूसरे के धर्मस्थल पर जाकर अपनी धार्मिक गतिविधियों का निर्वाहन करें, इसकी इजाज़त किसी भी देश का क़ानून नहीं देता है. भारत जो ख़ुद में विविधताओं में एकता का देश है, यहां इतनी मस्जिदें है, जितनी इस्लामिक दुनिया में आपको नहीं मिलेगी. फिर भी नमाज़ अदा करने के लिए हिंदुओं के सबसे बड़ी तीर्थ स्थल का चयन करना क्या उचित है. 

हिंदुओं का सबसे बड़ा तीर्थ स्थल, तिरुपति बालाजी मंदिर भगवान वेंकटेश्वर की इस दुनिया का रहस्य आज तक कोई सुलझा नहीं पाया. जितना रहस्यमय है, उतना चमत्कारी भी यहाँ भगवान वेंकटेश्वर की अलौलिक प्रतिमा इतनी चमत्कारी है, कि यहाँ वाले प्रत्येक शख़्स को यही प्रतीत होता है कि पूरी की पूरी प्रतिमा जीवंत है. मतलब ये कि आँखों देखी भगवान वेंकटेश्वर के साक्षात दर्शन होते हैं. बक़ायदा मंदिर का तापमान कम रखा जाता है क्योंकि प्रतीमा पर पसीने की बूंदे साफ़ नज़र आती है. प्रतिमा पर चंदन का लेप लगाने की जो परंपरा है, उसमें माँ लक्ष्मी का साक्षात दर्शन होते हैं. मंदिर की गर्भगृह में मौजूद एक दीपक हमेशा प्रज्वलित रहता है. ना ही इसमें  तेल डाला जाता है और ना कभी घी फिर भी सदैव प्रकाशमय रहता है.इतना चमत्कारी और पवित्र है कि प्रभु तिरुपति बालाजी की चौखट से कभी कोई भक्त ख़ाली हाथ नहीं जाता है और आज प्रभु के इसी रहस्यमय लोक में उनके भक्तों की आस्था के साथ खिलवाड़ किया गया है.

 दरअसल बीते दिनों तिरुमाला मंदिर परिसर से एक ऐसा वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें ग़ैर हिंदू नमाज़ अदा करता हुआ नज़र आ रहा है. तिरुपति में दूसरे धर्मों की प्रार्थना वर्जित है, बक़ायदा साल 1990 में आंध्र प्रदेश सरकार ने इसके लिए सरकारी आदेश जारी किया था। यहाँ पूरी तरह से हिंदू प्रार्थनाओं के अलावा अन्य धर्मों की पूजा-अर्चना करना प्रतिबंधित है, फिर भी एक नमाज़ी का दिखना ? क्या ये धार्मिक उन्माद फैलाना है. सोची समझी साज़िश है या फिर नासमझी का परिचय ? 

अब जो लोग ये कहेंगे कि मंदिर परिसर में नमाज़ पढ़ने से भला क्या नुकसान हो जाएगा, तो क्या उनसे ये पूछा जाए कि मक्का में महादेव भजन गाने से क्या हो जाएगा ? बहरहाल इस पूरे मामले की जाँच में जुटी पुलिस का कहना है कि इस धार्मिक उपद्रवी के खिलाफ FIR दर्ज हो चुकी है और नमाज़ पढ़ने वाले व्यक्ति की पहचान हो चुकी है, लेकिन आरोपी पुलिस की गिरफ़्त से अभी बाहर है.
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