Advertisement

Loading Ad...

हिंगलाज माता के आगे दिखी Pak की नई करतूत, बलूचिस्तान को बना डाला खुला कैदखाना !

पाकिस्तान अपनी नापाक हरकतों से ना कभी बाज आने वाला है और ना कभी सुधरने वाला है….पाकिस्तानी हुकूमत और पाकिस्तानी आर्मी, अबकी बार दोनों ने अपनी औक़ात दिखा दी है…आतंक विरोधी क़ानून के नाम पर शहबाज़ सरकार ने बलूचिस्तान को खुली जेल बनाने का जो षड्यंत्र रचा है, क्या उसमें माँ हिंगलाज शक्तिपीठ को कैद कर पाना मुमकिन है ?इस पूरे मामले की संपूर्ण जानकारी के लिए , देखिये धर्म ज्ञान की ये ख़ास रिपोर्ट.

Loading Ad...

पाकिस्तान अपनी नापाक हरकतों से ना कभी बाज आने वाला है और ना कभी सुधरने वाला है….पाकिस्तानी हुकूमत और पाकिस्तानी आर्मी, अबकी बार दोनों ने अपनी औक़ात दिखा दी है…आतंक विरोधी क़ानून के नाम पर शहबाज़ सरकार ने बलूचिस्तान को खुली जेल बनाने का जो षड्यंत्र रचा है, क्या उसमें माँ हिंगलाज शक्तिपीठ को कैद कर पाना मुमकिन है ?इस पूरे मामले की संपूर्ण जानकारी के लिए , देखिये धर्म ज्ञान की ये ख़ास रिपोर्ट.

ना ही बलूचिस्तान हिंदू बहुल क्षेत्र है और ना ही बलूचिस्तान का रहन सहन हिंदुओं जैसा है….फिर भी बलूचियों के लिए उनकी माता कोई और नहीं, बल्कि माँ हिगंलाज शक्ति पीठ है….बलूच लोगों के लिए हिंगलाज शक्ति पीठ क्या मायने रखती है, इसका अंदाज़ा इसी से लगाइये…शक्ति उपासना में लिखा गया है, हिंगलाज में तुम्हीं भवानी, महिमा अमित न जात बखानी…यहाँ माँ हिंगलाज भवानी के दर्शन करने की परंपरा आदिकाल से चली आ रही है, यहीं पर मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम पहुँचे.यहीं पर भगवान परशुराम के पिता ने घोर तप किया और यही पर गुरु गोरखनाथ से लेकर दादा मखान और गुरु नानक ने तप साधना की , जो कि यहाँ शक्ति का जागृत रूप स्थापित है, जिस कारण कट्टरपंथी ताकते भी इस मंदिर को चोट पहुँचाने से कतराते हैं..यहाँ के बलोच जो धर्म से मुस्लिम हैं , लेकिन ख़ुद को माँ के भक्त भी मानते हैं, इसी के चलते बलूच लोग माँ हिंगलाज शक्तिपीठ को बलूचिस्तान की रक्षक देवी मानते हैं. जो स्वयम् में शक्तिशाली होकर बलूचिस्तान का रक्षक कवच है, क्या उन्हीं के भक्तों को बंदिशों में रखा जा सकता है ? ..आज ये सवाल इसलिए क्योंकि पाकिस्तान हुकूमत और आर्मी, दोनों ने बलूचिस्तान को खुली जेल बनाने का षड्यंत्र रचा है. आतंकवाद विरोधी कानून के नाम पर एक नया क़ानून पारित किया है, जिसमें बलूच लोगों के लिए दर्द के सिवा कुछ नहीं है. बलूचिस्तान के अस्तित्व को जड़ से ख़त्म करने के लिए जिस नये क़ानून को पारित किया गया है, उसमें पाकिस्तानी सेना को बलूच लोगों पर अत्याचार करने की खुली छूट दी है. पाकिस्तानी सेना को बेहिसाब ताकत देकर समूचे बलूचिस्तान को खुली जेल बना दी है.

Loading Ad...

यह भी पढ़ें

दरअसल बलूचिस्तान की विधानसभा में नया आतंकवाद विरोधी कानून पारित किया गया, जिसमें सैन्य और खुफिया एजेंसियों को बिना किसी आरोप के 90 दिनों तक हिरासत में रखने का अधिकार दिया गया है. मतलब ये कि केवल शक के आधार पर ही बलूच लोगों को 90 दिनों तक हिरासत में रखा जा सकता है …जो पूरी तरह से मानवाधिकार कानून का उल्लंघन है, जिसकी कड़ी आलोचना करते हुए मानवाधिकार समूह और बलूच सिविल सोसाइटी ने ख़तरनाक बताया है. इनका कहना है कि यह कानून बलूचिस्तान को एक कानूनी जेल में बदल देता है. देखा जाए, तो एक लंबे समय से बलूचिस्तान ख़ुद के लिए आज़ादी की माँग कर रहा है, उन पर होने वाले ज़ुल्मों के बीच बलूच लोगों गायब हो रहे हैं. पहले सुरक्षा बलों द्नारा उनका अपहरण होता है फिर बाद में उनके शव बरामद होते हैं, तो कभी शव तक भी नहीं मिलते हैं. अपनों की खोज में हाथ में तख़्तियाँ लिये पूरा का पूरा बलूचिस्तान खड़ा है. और अब जब बिना किसी आरोप के 90 दिनों तक जेल में डाल देने की ताक़त सेना को मिलेगी, फिर तो पूरा का पूरा बलूचिस्तान एक खुली जेल बन जाएगा और इसी खुली जेल में माँ हिंगलाज शक्ति पीठ विद्यमान है…जो ऑपरेशन सिंदूर के बाद पूरी तरह जागृत हो चुकी है, ऐसे में  क्या इसी शक्ति को बंदिशों में बांध कर रखा जा सकता है . आज का पाकिस्तान शातिर चीन की देखा देखी अगर बलूचिस्तान को खुली जेल बना भी रहा है, तो क्या उसकी खुद की सलाख़े इतनी मज़बूत है कि शक्ति को बांध कर रख सके. हालाँकि इस कदम पर रोक लगाने के लिए बलूचिस्तान संयुक्त राष्ट्र के आगे गुहार लगा चुका है, विश्व की लोकतांत्रिक सरकारों से इस मसले में हस्तक्षेप करने की माँग कर रहा है, लेकिन क्या विश्व शक्तियाँ बलूचिस्तान की मदद करती हुई दिखेंगी , इस पर आप क्या सोचते हैं, कमेंट करके ज़रूर बताइयेगा.

LIVE
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...