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Pakistan और Turkey देखते रह गए और Islam का नामोनिशान मिटाने में जूटा चीन

इस्लाम के ख़िलाफ़ चीन की नई चालाकी खलीफा-मस्जिद से चिढ़ने वाले चीन की दिखी औक़ात उइगर मुस्लिमों को नहीं मनाने दी बकरीद। मुस्लिम गांवों के नामों का किया कम्युनिस्टीकरण। चीन के आगे भीगी बिल्ली बनकर बैठ पाकिस्तान-इटली ।देखिये सिर्फ़ धर्म ज्ञान पर

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पूरी दुनिया में  मुसलमान अगर सबसे ज़्यादा महफूस है। खुलकर अपने धर्म से जुड़े रिति-रिवाज निभा रहा है या फिर बक़रीद के मौक़े पर अपनों के संग नमाज़ अदा कर पा रहा है, तो वो देश हैं भारत क्योंकि अगर आप चीन चले जाएँगे, वो वहाँ आप उइगर मुसलमानों पर हो रहे अत्याचार को देख नहीं सकेंगे।  ख़लीफ़ा और मस्जिद से चिढ़ने वाले चीन ने अबकी बार मानवता की तमाम हदें पार करते हुए अपने ही मुल्क के मुसलमानों को ख़ुशी से बकदीर तक नहीं मनाने दी। फिर भी शातिर चीन के आगे ख़ुद को ख़लीफ़ा बताने वाला तुर्की और पाकिस्तान चूँ तक नहीं कर पाया, क्या है ये पूरा मामला आईये आपको बताते हैं।

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बीते दिनों दुनियाभर में ईद मनाई गई..ईद-अल-अजहा के मौक़े भारत में कितनी जगह  बकरे की क़ुर्बानी दी गई। ईदगाहों में नमाज़ पढ़ी गई ,मुस्लिम भाई हिंदुओं के गले-मिलते नज़र आए, आपस में ईद की बधाईयां दी गई। भारत का मुसलमान इस्लाम की परंपराओं को निभाते हुए दिखा लेकिन पड़ोसी मुल्क चीन में इसके उलट उइगर मुसलमान चाहकर भी खुले तौर पर बक़रीद नहीं मना पाया और इसके पीछे का कारण है, चीनी सरकार द्वारा उइगर मुसलमानों के ईद मनाने पर की गई सख्ती। ऐसा हम नहीं कह रहे हैं बल्कि ड्रैगन के घर से सेंटर फार उइगर स्टडीज ने इस बात का खुलासा किया है। उइगर मुसलमानों के हक़ में आवाज़ उठाने वाले सेंटर फार उइगर स्टडीज ने इस बार ये दावा किया है कि साल 2017 में उइगरों पर जो सख्त पाबंदियां लगाई गई थीं उनके कारण यह मुस्लिम समुदाय वहां ईद-अल-अजहा नहीं मना पाए।

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जिनपिंग सरकार की दमन कारी नीतियों के आगे ना किसी मुसलमान की हिम्मत होती है, खुलेआम नमाज़ पढ़ सके। किसी को गले लगाकर बधाई दे सके..इनकी मस्जिदों को मिट्टी में मिला दिया है। इनकी पारंपरिक इस्लामी पोशाक पर प्रतिबंध लगा रखे हैं। लंबी दाढ़ी नहीं रख सकते हैं, उग्रवाद का हवाला देते हुए इस्लामी ग्रंथों को सेंसर कर दिया है इतना ही नहीं, उइगर मुसलमानों की पहचान मिटाने के लिए अब जिनपिंग सरकार ने सैकड़ों धार्मिक उइगर गावों के नाम बदल दिये हैं। कम से कम 25 गांवों के नामों से "होजा" हटा दिया। 41 गांवों के नामों से "मज़ार" जैसे शब्द हटा दिये गये हैं। कुल मिलाकर देखा जाए, तो उइगर मुसलमानों की संस्कृति को मिटाने के लिए 630 क़स्बों और गावों के नाम बदल दिये गये हैं।चीनी सरकार पर गंभीर आरोप लगाने वाली सेंटर फार उइगर स्टडीज  का कहना है। मुल्क में या तो उइगर मुसलमानों को सलाख़ों के पीछे डाल देते है या फिर उनकी नस्ल बदलने की साजिश रची जाती है सौ बात की एक बात ये कि इस्लामिक देशों का हमदर्द बनने वाला तीन  ख़ुद के मुल्क में इस्लाम को मिटा रहा है। जिस पर तुर्की और पाकिस्तान जैसे देश भीगी बिल्ली बनकर आज भी बैठे हुए हैं। 


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