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गोपाष्टमी के अवसर पर सद्गुरु श्री ऋतेश्वर जी महाराज की पदयात्रा में उमड़ा भक्तों का सैलाब, श्रद्धा और भक्ति से गूँज उठा वातावरण!

गोपाष्टमी के इस पावन दिन पर सद्गुरु श्री ऋतेश्वर जी महाराज की पदयात्रा ने वृंदावन को भक्ति और आनंद से भर दिया. दीपों की रौशनी, हरिनाम की गूंज और गुरुदेव के दर्शन ने हर भक्त के हृदय में दिव्यता और शांति का भाव जगाया. ऐसे में यह दिन आस्था, प्रेम और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम भी रहा.

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गोपाष्टमी के शुभ अवसर पर आज वृंदावन में आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला. परम पूज्य सद्गुरु श्री ऋतेश्वर जी महाराज की नित्य पदयात्रा में हजारों नहीं, बल्कि लाखों श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा.

रोजाना शाम 6 बजे गुरुदेव देते हैं भक्तों को दर्शन

प्रत्येक सायं 6 बजे प्रारंभ होने वाली यह दिव्य यात्रा वराह घाट से परिक्रमा मार्ग होते हुए यमुना जी के पावन चीर घाट तक पहुंचती है, जहाँ भक्तों को गुरुदेव के दर्शन, दिव्य दीपदान और महाआरती का अलौकिक सौभाग्य प्राप्त होता है.

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गोपाष्टमी पर हरिनाम से गूंज उठा वृंदावन 

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गोपाष्टमी के इस पावन दिन पर संपूर्ण वातावरण भक्ति रस से सरोबार रहा. दीपों की ज्योति, हरिनाम की ध्वनि और गुरुदेव के दिव्य स्वरूप के दर्शन से वृंदावन आलोकित हो उठा. 

जानें गोपाष्टमी का महत्व

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गोपाष्टमी को भगवान श्रीकृष्ण और ब्रजवासियों से जोड़कर देखा जाता है, मान्यता है कि जब भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को इंद्र के प्रकोप से बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर उठाया तब पूरे सात दिनों तक निरंतर वर्षा चली. इस दौरान गोपाष्टमी के दिन ही इंद्र देव ने अपनी पराजय स्वीकार की थी.

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