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नास्त्रेदमस की भयावह भविष्यवाणी बता रही है किस देश का होने वाला है ख़ात्मा !

नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियों में एक ऐसे देश की तबाही लिखी है, जिसकी जड़े अमेरिका से जुड़ी हैं…मतलब ये कि युद्ध, महामारी और प्राकृतिक आपदाओं के सैलाब में एक देश की हस्ति हमेशा के लिए मिट जाएगी।

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फांसीसी भविष्यवक्ता नास्त्रेदमस के हवाले से की गई ऐसी कई भविष्यवाणियाँ हैं, जिन पर समय ने सत्यता की मुहर लगाई है और विश्व युद्ध को लेकर फ़्रांसीसी भविष्यवक्ता ने जो कुछ भी संकेत दिये, उसके अनुरूप आज की घटनाएँ हमारे सामने हैं। द सैंचुरी नाम की किताब में नास्त्रेदमस की अनगिनत भविष्यवाणियों का पिटारा है, इसी किताब के हवाले से ये कहा गया कि भविष्य में विश्व दो गुटों में बंटेगा, जिससे विश्व युद्ध के हालात पनपेंगे यानी महाविनाश की तारीख़ बता डाली थी। विश्व युद्ध को लेकर नास्त्रेदमस की कोडिड भविष्यवाणी कहती है। 

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युद्ध तह शुरु होगा, जब ऊँट महान और डेन्यूब का पानी पीएगा।और फिर रोना और लॉरा थरथराएँगे। लेकिन आल्पस में मुर्ग़ा उसे खत्म कर देगा।जो लोग नास्त्रेदमस की इस भविष्यवाणी को डिकोड करते हैं, वो ऊँट को इस्लामिक देशों से जोड़ते हैं। नास्त्रेदमस के हवाले से ये माना जाता है कि शुरुआत में धर्म के आधार पर दुनिया दो गुटों में बंट जाएगा, यूरोप पर इस्लामिक ताक़तें हमला करेंगी। यूरोपीय दुनिया इस्लामिक कट्टरपंथ की आग में जलेगी और इसी आग से भड़की चिंगारी विश्व युद्ध को अंजाम देगी, हालाँकि अंत समूचे विश्व पर सनातन का पताका लहराएगा। देखा जाए, तो नास्त्रेदमस ख़ुद जिस फ़्रांस से आते हैं, वही फ़्रांस आज भी इस्लामिक कट्टरता से जूझ रहा है, एक नहीं बल्कि कई ऐसे उदाहरण है, जो ये बताते हैं कि फ़्रांस ने जिन इस्लामिक शरणार्थियों को अपने यहां पनाह दी, आज उसी की कट्टरता उन्हें बर्बाद कर रही है। ख़ुद को इस्लाम का ख़लीफ़ा साबित करने में जुटा तुर्की, जिसकी भारत के प्रति द्वेष भावना किसी से छिपी नहीं है। ऊपर से तुर्की के पीछे खड़ा पाकिस्तान। ये सारी चीजें ये बताने के लिए काफ़ी है कि अब मुस्लिम देशों को एक जुटे किये जाने की कोशिशें शुरु हो चुकी है, ताकी यूरोप से लेकर भारत को नक़्शे से मिटाया जाये…लेकिन यहाँ इज़रायल की ढाल बने भारत की कितनी बड़ी भूमिका भविष्य में देखने को मिलेगी, ये तो आने वाला समय बताएगा लेकिन इन सबके बीच नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियों में एक ऐसे देश की तबाही लिखी है, जिसकी जड़े अमेरिका से जुड़ी हैं। मतलब ये कि युद्ध,  महामारी और प्राकृतिक आपदाओं के सैलाब में एक देश की हस्ति हमेशा के लिए मिट जाएगी।

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 नक़्शे पर मौजूद दक्षिण अमेरिका जिसे दुनिया का बगीचा कहा जाता है। इस धरा के सात महाद्वीपों में से एक है। 12 मुल्कों का अस्तित्व इसी दक्षिण अमेरिका से जुड़ा है। प्राचीन सभ्यताओं का केंद्र दक्षिण अमेरिका है..दुनिया का सबसे बड़ा जंगल हो या फिर नदी, सब यही मिलता है…और इसी दक्षिण अमेरिका को लेकर नास्त्रेदमस की ख़ौफ़नाक भविष्यवाणी यही कहती है कि जलवायु परिवर्तन से जुड़ी बाढ़ और संभावित ज्वालामुखी गतिविधि के चलते दक्षिण अमेरिका का अस्तित्व ख़तरे में आ जाएगा और मिटने के कगार पर आ जाएगा। 

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