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न्यू बाबा वेंगा की बड़ी भविष्यवाणी, जापान में मचने वाली तबाही में क्या लुप्त हो जाएंगे बद्रीनाथ-केदारनाथ ?

न्यू बाबा वेंगा की भविष्यवाणी, 5 जुलाई का दिन , 15 दिनों का समय और बद्रीनाथ-केदारनाथ धाम का लुप्त होना? इनका आपस में क्या संबंध है, इसके लिए जापान की न्यू बाबा वेंगा की भविष्यवाणी को जानना बहुत ज़रूरी है. इन दिनों जापान जाने में दुनिया डर रही है, फ़्लाइट बुकिंग कैंसिल की जा रही है और तो और, ख़ुद को 5 जुलाई के लिए तैयार किया जा रहा है. लेकिन इन सबके बीच हिंदुओं के सबसे बड़ी तीर्थ बद्रीनाथ-केदारनाथ भी क्या ख़तरे में है?

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इनका आपस में क्या संबंध है? इसके लिए जापान की "न्यू बाबा वेंगा" कही जाने वाली भविष्यवक्ता रयो तातसुकी की भविष्यवाणी को जानना बेहद ज़रूरी है. इन दिनों जापान जाने से दुनिया डर रही है, फ़्लाइट बुकिंग रद्द की जा रही है, और लोग खुद को 5 जुलाई के लिए मानसिक रूप से तैयार कर रहे हैं. लेकिन इन सबके बीच सवाल उठ रहा है कि क्या हिंदुओं के सबसे बड़े तीर्थ—बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम—भी ख़तरे में हैं?

बुल्गारिया की बाबा वेंगा और उनकी 5079 तक की भविष्यवाणियां आज भी आम जनमानस की ज़ुबान पर हैं. लेकिन अब जापान की "बाबा वेंगा" कही जाने वाली रयो तातसुकी की भविष्यवाणी पूरी दुनिया के कानों में गूंज रही है. साल 2011 में जापान में आए विनाशकारी भूकंप और सुनामी की भविष्यवाणी उन्होंने पहले ही कर दी थी, और अब एक और भयावह सुनामी की चेतावनी उन्होंने दी है.

रयो तातसुकी का दावा है कि जुलाई माह में समुद्र में बड़ी हलचल होगी और 5 जुलाई को जापान और फिलीपींस के बीच समुद्र में एक बड़ी दरार बनेगी, जिससे 2011 की तोहोकू सुनामी से तीन गुना ज़्यादा ऊंची लहरें उठेंगी. इस भविष्यवाणी का असर ऐसा है कि अंतरराष्ट्रीय पर्यटक अपनी जापान यात्रा की बुकिंग रद्द करवा रहे हैं. ट्रैवल एजेंसियों के मुताबिक, हजारों बुकिंग्स रद्द हो चुकी हैं.

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इस भविष्यवाणी को लोग हल्के में नहीं ले रहे हैं, और इसका कारण है रयो तातसुकी की पहले की सफल भविष्यवाणियां, 2011 का जापान भूकंप और कोविड महामारी. उन्होंने अपनी किताब "The Future I Saw" में ये घटनाएं पहले ही लिख दी थीं.

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अब इस भयावह भविष्यवाणी के साथ सोशल मीडिया पर एक और प्रश्न तैर रहा है ,क्या बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम भी लुप्त हो जाएंगे? दरअसल, स्कंद पुराण में इस बात का उल्लेख मिलता है कि एक समय ऐसा आएगा जब ये दोनों पवित्र धाम अदृश्य हो जाएंगे.

बद्रीनाथ, जो नर-नारायण पर्वतों के बीच स्थित है, और केदारनाथ, जो केदार घाटी में स्थित है — दोनों ही हिंदुओं के सबसे पवित्र तीर्थस्थल हैं और चारधाम यात्रा का हिस्सा हैं. इस साल अब तक 32 लाख से अधिक श्रद्धालु इन तीर्थों के दर्शन कर चुके हैं. लेकिन हाल के वर्षों में आई प्राकृतिक आपदाओं ने इन क्षेत्रों को बार-बार झकझोरा है. स्कंद पुराण के अनुसार, जब नर और नारायण पर्वत आपस में मिल जाएंगे, तब ये धाम सदैव के लिए लुप्त हो जाएंगे. साथ ही गंगा नदी भी धरती से लुप्त होकर वापस शिव की जटाओं और ब्रह्मा के कमंडल में लौट जाएगी.

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इससे पहले कुछ संकेत दिखाई देंगे.

जोशीमठ में स्थित भगवान नरसिंह के विग्रह का हाथ स्वतः अलग हो जाएगा.

तीर्थ यात्रा मार्ग हमेशा के लिए बंद हो जाएंगे.

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प्रकृति बार-बार आपदा के रूप में संकेत देगी.

हालांकि, यह भी स्पष्ट है कि इन तीर्थों के लुप्त होने में अभी समय है. लेकिन 2024 की शुरुआत से अब तक जो आपदाएं घट चुकी हैं —

जनवरी: महाकुंभ में भगदड़

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फरवरी: दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़

मार्च: गुजरात पटाखा फैक्ट्री में अग्निकांड

अप्रैल: पहलगाम में आतंकी हमला

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मई: बेंगलुरु में IPL के दौरान भगदड़

जून: अहमदाबाद प्लेन क्रैश

इन सबने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या अब तीर्थों का लुप्त होना भी शुरू हो जाएगा? लेकिन क्या सच में ऐसा होना है? या यह भी एक डर है, जो अफवाहों, ग्रंथों की अर्धजटिल व्याख्या और सोशल मीडिया की सनसनी से जन्मा है?

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