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नवरात्रि स्पेशल: झील के बीचों-बीच बना है ताल बराही मंदिर; दर्शन मात्र से शत्रुओं का अंत करती है मां दुर्गा

इस मंदिर का निर्माण राजा कुलमंदन शाह ने अपने स्वप्न के फलस्वरूप करवाया था. राजा कुलमंदन शाह के मां वराही देवी ने दर्शन कर मंदिर के निर्माण का आदेश दिया था. मंदिर का निर्माण पारंपरिक पैगोडा शैली में किया गया है.

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 भारत देश में मां दुर्गा को समर्पित कई शक्तिपीठ और सिद्धपीठ मंदिर हैं, जहां मां के अलग-अलग अवतारों की पूजा होती है. हमारे देश के अलावा, नेपाल की भूमि पर भी मां दुर्गा को समर्पित कई मंदिर मौजूद हैं, जहां नवरात्रि के मौके पर विशेष पूजा और अनुष्ठान होते हैं. नेपाल में झीलों के बीचो-बीच मां दुर्गा के उग्र रूप की पूजा की जाती है, जहां तक पहुंचने के लिए भक्तों को नाव का सहारा लेना पड़ता है. हम बात कर रहे हैं वराह देवी मंदिर (ताल बराही मंदिर) की. नवरात्रि के समय इस मंदिर में भक्तों की भारी संख्या में भीड़ देखने को मिलती है. 

मां के दर्शन मात्र से ही शत्रुओं का नाश हो जाता है

नेपाल में मां दुर्गा के उग्र रूप वराह देवी का प्रसिद्ध मंदिर है.  माना जाता है कि मां के दर्शन मात्र से ही शत्रुओं का नाश हो जाता है. मंदिर पोखरा की फेवा झील में स्थित एक छोटे से द्वीप पर बना है और प्राचीन समय से भक्तों की मनोकामनाओं को पूरा कर रहा है. 

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मंदिर सिर्फ हिंदुओं की आस्था का ही प्रतीक नहीं है

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मंदिर के हर दरवाजों पर मन्नतों के धागे बंधे हैं, जिससे भक्तों की अटूट विश्वास का पता चलता है. खास बात यह है कि मंदिर सिर्फ हिंदुओं की आस्था का ही प्रतीक नहीं है, बल्कि बौद्ध धर्म से जुड़े लोग भी मंदिर में अनुष्ठान करने आते हैं और खासतौर पर नवरात्रि के समय मंदिर में भक्तों की अच्छी खासी भीड़ देखने को मिलती है. 

किसने कराया था इस मंदिर का निर्माण?

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कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण राजा कुलमंदन शाह ने अपने स्वप्न के फलस्वरूप करवाया था. राजा कुलमंदन शाह के मां वराही देवी ने दर्शन कर मंदिर के निर्माण का आदेश दिया था. मंदिर का निर्माण पारंपरिक पैगोडा शैली में किया गया है, जिसमें लकड़ी, ईंट और विशाल पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है. मंदिर का परिसर इतना बड़ा है कि इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु आ सकते हैं. फेवा झील की यात्रा के दौरान भक्त नौका विहार और मंदिर भ्रमण दोनों का आनंद लेते हैं.

नेपाल में ये इकलौता ऐसा मंदिर है

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दुर्गा पूजा के दौरान और शनिवार को हजारों पोखरा निवासी देवी की पूजा करने के लिए ताल बराही मंदिर आते हैं. यह मंदिर नेपाल में अपनी तरह का इकलौता मंदिर है, क्योंकि यह पूरी तरह से एक झील के भीतर बना है और इसमें कोई भूमि मार्ग नहीं है. मंदिर तक पहुंचने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ता है.

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