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नवरात्रि विशेष: 48 मिनट का दिव्य संधिकाल, जब देवी चंडी ने किया था महिषासुर का वध, कोलकाता के साथ पश्चिम बंगाल में शुरू हुई तैयारी

संधि पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि शक्ति और आस्था का अद्भुत संगम है, 48 मिनट का यह दिव्य संधिकाल भक्तों को आत्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है, मान्याता है कि ये समय पूरे नवरात्रि में सबसे ज्यादा प्रभावशाली होता है. क्योंकि इसी समय देवी दुर्गा ने महिषासुर का वध कर बुराई पर अच्छाई की जीत हासिल की थी. वहीं 108 दीपों की रोशनी और मंत्रोच्चारण से पूरा वातावरण पवित्र हो उठता है.

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शारदीय दुर्गोत्सव का एक प्रमुख अनुष्ठान है संधि पूजा. यह पूजा विशेष रूप से अष्टमी और नवमी तिथियों के बीच के संधिकाल में की जाती है. संधि पूजा का समय कुल 48 मिनट का होता है, जो अष्टमी तिथि के अंतिम 24 मिनट और नवमी तिथि के पहले 24 मिनट मिलाकर बनता है. इसे धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जाता है क्योंकि पुराणों के अनुसार, इसी शुभ घड़ी में देवी चंडी ने महिषासुर का वध कर अधर्म पर धर्म की विजय हासिल की थी. इसलिए संधि पूजा को देवी की अपराजेय शक्ति का प्रतीक माना जाता है.

समय की गणना के अनुसार पूरे दिन में कुल तीस घड़ी होती हैं और एक घड़ी की अवधि 24 मिनट होती है. इस प्रकार दो घड़ी मिलाकर संधि पूजा का समय 48 मिनट का होता है. इस दो घड़ी में की गई पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है.

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देवी की आराधना के लिए 108 दीप क्यों हैं जरूरी?

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इस समय देवी की आराधना अत्यंत विधिवत 108 दीप प्रज्वलित कर की जाती है, जो प्रकाश और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक होता है. इसके साथ ही 108 कमल के पुष्प और 108 बेलपत्र भी देवी को अर्पित किए जाते हैं. यह संख्या पवित्र और शुभ मानी जाती है.

संधि पूजा में विशेष मंत्रोच्चारण से गूंज उठता है माहौल

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संधि पूजा के दौरान पूजा मंडपों में विशेष मंत्रोच्चारण होता है. ढाक की थाप और शंखध्वनि से पूरा माहौल गूंज उठता है, जिससे भक्तों का मन आध्यात्मिक अनुभव से भर जाता है. भक्तों का विश्वास है कि इस शुभ संधिकाल में की गई प्रार्थना से सभी बाधाएं, कष्ट और संकट दूर होते हैं और जीवन में सफलता और समृद्धि आती है.

कोलकाता के साथ पश्चिम बंगाल में शुरू हुई पूजा की तैयारी

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कोलकाता सहित पश्चिम बंगाल के नामी-गिरामी पूजा पंडालों में इस संधि पूजा की तैयारियां शुरू हो गई हैं. संधि पूजा के दौरान भारी भीड़ जमा होने की संभावना है. भीड़ को नियंत्रित करने और पूजा का सुव्यवस्थित संचालन सुनिश्चित करने के लिए समितियों ने विशेष सुरक्षा और प्रबंध किए हैं.

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