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Navratri 2024: किस दिन कौन सा रंग पहनें और क्यों?

नवरात्रि, जो देवी दुर्गा की आराधना के लिए समर्पित है, इस वर्ष 3 अक्टूबर 2024 से शुरू होकर 12 अक्टूबर 2024 को दशहरा के साथ समाप्त होगी। नवरात्रि के प्रत्येक दिन एक विशेष रंग से जुड़ा होता है, जो देवी के विभिन्न रूपों की ऊर्जा और गुणों का प्रतीक है। इन रंगों को धारण करने से भक्त देवी की शक्तियों से जुड़ते हैं और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करते हैं। आइए जानते हैं इस नवरात्रि के 9 रंगों और उनके पीछे छिपे महत्व के बारे में।

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नवरात्रि में हर दिन देवी के अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है और उनके अनुरूप एक विशेष रंग पहना जाता है। यह रंग देवी के गुणों और उनकी शक्तियों का प्रतीक होता है। हर रंग को एक खास दिन पर धारण करने से देवी की कृपा प्राप्त होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। आइए जानते हैं  नवरात्रि के किस दिन कौन सा रंग क्यों पहना जाता है।

1. पहला दिन (शैलपुत्री) – नारंगी
नारंगी रंग ऊर्जा और उत्साह का प्रतीक है, जो देवी शैलपुत्री की शक्ति और साहस का प्रतिनिधित्व करता है। यह रंग नवरात्र के पहले दिन पहनने से आपको नए उत्साह और सकारात्मकता की अनुभूति होती है, जो नवरात्रि की शुरुआत को शुभ बनाता है।

2. दूसरा दिन (ब्रह्मचारिणी) – हरा
हरा रंग प्रकृति, शांति और उर्वरता का प्रतीक है। यह देवी ब्रह्मचारिणी के संयम और तपस्या का प्रतिनिधित्व करता है। हरा रंग धारण करने से आंतरिक शांति और विकास की भावना उत्पन्न होती है।

3. तीसरा दिन (चंद्रघंटा) – ग्रे
धूसर रंग यानी ग्रे कलर संघर्ष और संयम का प्रतीक है। देवी चंद्रघंटा का यह दिन शक्ति और साहस को दर्शाता है। धूसर रंग पहनने से व्यक्ति अपने जीवन में आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए मानसिक और भावनात्मक रूप से तैयार होता है।

4. चौथा दिन (कूष्मांडा) – नारंगी
नारंगी रंग सृजन और ऊर्जा का प्रतीक है। देवी कूष्मांडा ब्रह्मांड की सृजनकर्ता मानी जाती हैं, और यह रंग उनकी रचनात्मकता को दर्शाता है। यह रंग पहनने से सृजनात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सकारात्मक बदलाव आते हैं।

5. पांचवा दिन (स्कंदमाता) – सफेद
सफेद रंग शुद्धता और शांति का प्रतीक है। देवी स्कंदमाता की पूजा इस दिन की जाती है। यह रंग पहनने से जीवन में शांति, शुद्धता और सद्भाव का अनुभव होता है।

6. छठा दिन (कात्यायनी) – लाल
लाल रंग शक्ति और उग्रता का प्रतीक है, और यह दिन देवी कात्यायनी, जो क्रोध और साहस की देवी हैं, उन्ही को समर्पित है। लाल रंग पहनने से साहस, जोश और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।

7. सातवां दिन (कालरात्रि) – शाही नीला
शाही नीला रंग शक्ति, धैर्य और शांति का प्रतीक है। देवी कालरात्रि, जो विनाश की देवी मानी जाती हैं,  सातवां दिन उन्ही को समर्पित दिन है। यह रंग पहनने से व्यक्ति में स्थिरता और नियंत्रण की भावना आती है।

8. आठवां दिन (महागौरी) – गुलाबी
गुलाबी रंग प्रेम, स्नेह और करुणा का प्रतीक है। देवी महागौरी की पूजा इस दिन होती है। गुलाबी रंग धारण करने से स्नेह, प्रेम और दया का संचार होता है।

9. नौवां दिन (सिद्धिदात्री) – बैंगनी
बैंगनी रंग भव्यता, आध्यात्मिकता और वैभव का प्रतीक है। देवी सिद्धिदात्री, जो सिद्धियों और आशीर्वाद की देवी मानी जाती हैं, उनकी पूजा नवरात्र के नौवें दिन होती है। यह रंग पहनने से मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति का अनुभव होता है।

इन नौ दिनों में रंगों का चयन देवी के अलग-अलग रूपों और उनकी शक्तियों का प्रतीक है। हर रंग न केवल देवी की पूजा में एक गहरा अर्थ रखता है, बल्कि यह भक्तों के जीवन में भी सकारात्मकता और शुभता लाता है। इन रंगों को पहनने से हम देवी की कृपा प्राप्त करते हैं और जीवन में शक्ति, शांति और समृद्धि का अनुभव कर सकते हैं।

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