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नरक चतुर्दशी 2024: जानें कब और कैसे मनाएं नरक चतुर्दशी, तिथि-विधि से लेकर जानें सब कुछ
Narak Chaturdashi 2024: नरक चतुर्दशी 2024: इसे छोटी दिवाली भी कहा जाता है और यह 31 अक्टूबर 2024 को मनाई जाएगी। हर साल यह पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को आता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर राक्षस का वध कर 16,000 महिलाओं को उसकी कैद से मुक्त कराया था। इसे रूप चौदस और काली चतुर्थी भी कहते हैं।
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नरक चतुर्दशी 2024 कब है? नरक चतुर्दशी, जिसे छोटी दिवाली के नाम से भी जाना जाता है, इस साल 31 अक्टूबर 2024 को मनाई जाएगी। यह पर्व हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को आता है और इसे रूप चौदस या काली चौदस भी कहा जाता है। इस दिन को लेकर हिंदू धर्म में खास मान्यताएँ हैं, जिनमें मुख्य रूप से भगवान श्री कृष्ण द्वारा नरकासुर राक्षस का वध और 16,000 महिलाओं को उसके कैद से मुक्त कराना शामिल है। इस दिन को बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है।
पंचांग के अनुसार तिथि और समय
इस साल कार्तिक मास की चतुर्दशी तिथि 30 अक्टूबर 2024 को दोपहर 1:15 बजे से शुरू होकर 31 अक्टूबर दोपहर 3:52 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के अनुसार, नरक चतुर्दशी का पर्व 31 अक्टूबर को ही मनाया जाएगा। इस दिन यमराज की पूजा और दीप जलाने की परंपरा होती है, ताकि अकाल मृत्यु का भय समाप्त हो और घर में सुख-समृद्धि बनी रहे।
नरक चतुर्दशी पर करें ये काम
स्नान और तिलक: इस दिन सूर्योदय से पहले स्नान करना बेहद शुभ माना जाता है। इसके बाद माथे पर तिलक जरूर लगाएं। ऐसा करने से शारीरिक और मानसिक शुद्धि प्राप्त होती है।
यम का दीप: नरक चतुर्दशी पर यमराज के नाम से दीप जलाने की परंपरा है। मान्यता है कि ऐसा करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और जीवन में समृद्धि आती है।
तेल मालिश: इस दिन पूरे शरीर में तेल मालिश करें और फिर स्नान करें। कहा जाता है कि इस दिन तेल में लक्ष्मी जी का वास होता है, जिससे घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है।
भगवान श्री कृष्ण की पूजा: इस दिन भगवान श्री कृष्ण की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह सभी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए किया जाता है।
14 दिये जलाएं: नरक चतुर्दशी पर 14 दीपक जलाकर घर के विभिन्न स्थानों पर रखें। इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में सकारात्मकता आती है।
नरक चतुर्दशी पर ना करें ये काम
जीवहत्या: इस दिन यमराज की पूजा होती है, इसलिए किसी भी जीव को मारना निषिद्ध माना जाता है। ऐसा करने से पुण्य का नाश होता है।
दक्षिण दिशा साफ रखें: इस दिन घर की दक्षिण दिशा को गंदा न रखें, क्योंकि यह दिशा यमराज की मानी जाती है। इस दिशा में साफ-सफाई से यमराज की कृपा प्राप्त होती है।
तेल का दान न करें: नरक चतुर्दशी पर तेल का दान नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से देवी लक्ष्मी नाराज हो सकती हैं, जिससे घर में दरिद्रता का वास हो सकता है।
मांसाहार से बचें: इस दिन मांसाहारी भोजन का सेवन करना अशुभ माना जाता है। शुद्ध और सात्विक भोजन का सेवन ही उचित होता है।
देर तक न सोएं: मान्यता है कि इस दिन देर तक सोने से मां लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं और घर में दरिद्रता का वास होता है। इसलिए, इस दिन सुबह जल्दी उठना और धार्मिक कार्यों में ध्यान देना शुभ होता है।
नरक चतुर्दशी की धार्मिक मान्यता
नरक चतुर्दशी को लेकर एक महत्वपूर्ण कथा यह भी है कि इस दिन भगवान कृष्ण ने नरकासुर का वध किया और पृथ्वी को उसके आतंक से मुक्त कराया। इस दिन विशेष रूप से यमराज और भगवान कृष्ण की पूजा का महत्व है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन यमराज की पूजा करने से मृत्यु का भय दूर होता है और जीवन में सुख, समृद्धि और लंबी आयु का आशीर्वाद मिलता है।
नरक चतुर्दशी का पर्व न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह हमें जीवन में स्वच्छता, शुद्धता और सकारात्मकता बनाए रखने का संदेश भी देता है। इस दिन की गई पूजा और साधनाएं हमारे जीवन को नई दिशा और ऊर्जा प्रदान करती हैं।
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