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रूसी ज़मीन पर मोदी दिखाएँगे सनातन की शक्ति अबू धाबी के बाद आई मॉस्को की बारी

रूसी ज़मीन पर बजेगा सनातन का डंका अब रूस के लिए पीएम मोदी भरेंगे उड़ान। अबू धाबी के बाद आई मॉस्को की बारी ,रूस में दिखेगी हिंदू मंदिर की भव्यता। देखिये सिर्फ़ धर्म ज्ञान पर

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भारत और रूस की दशकों पुरानी दोस्ती ऐसी है कि ज़रूरत पड़ने पर हमेशा एक दूसरे के काम आई। भले ही ये रिश्ता शक्तिशाली देशों की नज़रों में रहता हो, लेकिन दुनिया की कोई ताक़त इस रिश्ते का बाल भी बाँका नहीं कर पाई। मुश्किल समय में ना कभी भारत ने रूस का साथ छोड़ा और ना कभी रूस ने धोखा दिया। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जब-जब  भारत किसी मुद्दे पर घिरा है, रूस की वीटो पॉवर ने ढाल बनकर अपना काम किया। भारत के समर्थन में रूस अबतक 4 बार अपनी वीटो पॉवर का इस्तेमाल कर चुका है। फिर चाहे 1957 में कश्मीर का मुद्दा हो 1961 में गोवा का मुद्दा हो। 

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1961 में भारत-पाकिस्तान युद्ध हो या फिर 1971 में पाकिस्तान द्वारा कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनाने की कोशिश हो। हर मुश्किल घड़ी में रूस भारत की ताक़त बना और ऐसा नहीं है कि ये दोस्ती एक तरफ़ा है। भारत भी कई मौक़ों पर रूस के पाले में नज़र आया है। पिछले दो सालों से यूक्रेन के ख़िलाफ़ रूस की जंग जारी है। ना ही रूस रुकने को तैयार हैं और ना ही यूक्रेन झुकने। विश्व में रूस को कूटनीति तौर पर अलग-अलग करने की साज़िशें रची जा रही है और इन्हीं साज़िशों को नाकाम करते हुए भारत डे वन से रूस के साथ उसकी सबसे बड़ी ताक़त बनकर खड़ा है। तभी तो तीसरी बार देश की सत्ता सँभालते ही पीएम मोदी ने एक दिवसीय ही सही, लेकिन रूस जाने का फ़ैसला किया है और सबसे दिलचस्प बात ये कि पीएम मोदी के इसी रूसी दौरे में सनातन का डंका बजता हुआ पूरी दुनिया देख सकती है। रूस जाकर पीएम मोदी हिंदुओं की आस्था से जुड़े किस कार्य को पूर्ण कर सकते हैं ? क्या है ये पूरा मामला, आईये आपको बताते हैं। 

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रूस और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की दोस्ती देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए क्या मायने रखती है, इसका अंदाज़ा इसी से लगाइये यूरोप और पश्चिमी देशों के दबाव के बावजूद भारत ने रूस से तेल ख़रीदना बंद नहीं किया। दोनों मुल्कों के बीच का 10 अरब डॉलर का व्यापार आज की डेट में 70 अरब डॉलर तक पहुँच गया है और सबसे बड़ी बात ये कि तीसरी बार देश की सत्ता सँभाल रहे पीएम मोदी सबसे पहले रूस दौरे पर ज़ा रहे हैं। एक हफ़्ते बाद 8 जुलाई को पीएम मोदी रूस के लिए रवाना हो जाएँगे..मुल्क के कज़ान शहर में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में दोनों देशों के राष्ट्रध्यक्ष आपने-सामने होंगे। कई महत्वपूर्ण मसलों पर बातचीत होगी..कूटनीतिक और व्यापारिक दृष्टि से ऐतिहासिक फ़ैसले लिये जाएँगे। इन सबके बीच रूस में प्रवासी हिंदुओं की एक बड़ी डिमांड सामने आई है। पीएम मोदी के आने पर मॉस्को में हिंदू मंदिर निर्माण की मांग तेज हो गई है। ऐसा नहीं है कि रूस में कही कोई हिंदू मंदिर नहीं हैं। मंदिरों की मौजूदगी है, लेकिन इनका निर्माण सादे भवन के तौर पर है।मॉस्को और सेंट पीटर्सबर्ग में कई Iskon मंदिर हैं, लेकिन साधारण भवनों के तौर पर लेकिन अब सनातन परंपरा के अनुरूप मंदिर की भव्य संचरना की माँग उठने लगी है। रिपोर्ट की मानें, तो इंडियन बिज़नेस अलायंस के अध्यक्ष स्वामी कोटवानी ने पुतिन सरकार से मॉस्को में पहली हिंदू इमारत तैयार करने की इच्छा जाहिर की है। लोगों को उम्मीद है कि अबू धाबी के बाद अब मॉस्को की बारी आई है। 

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अब जो कि पाँचवीं बार भी देश की सत्ता व्लादीमिर पुतिन के हाथों में है, इसलिए नामुमिकन कुछ भी नहीं है। 90 के दौर से रूसी ज़मीन पर सनातन धर्म का प्रचार प्रसार वर्तमान में पीएम मोदी का रूस दौरा मॉस्को में भव्य हिंदू मंदिर की माँग और ऊपर से पुतिन की सरकार मंदिर रूपी संचरना का निर्माण होता हुआ तो दिख रहा है, बस इसका श्री गणेश कब होगा। ये देखना दिलचस्प होगा।

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