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बिजली गिरी या फिर कुछ और ? अचानक से बंद हुआ बिजली महादेव मंदिर

अबकी बार बिजली महादेव मंदिर के अचानक से बंद हो जाने के चलते कुल्लू घाटी में हलचल मच गई है. बंद मंदिर के पीछे की असल कहानी क्या है ? ये किसी को मालूम नहीं, जिस कारण अफ़वाहों के बाजार में शिवलिंग पर बिजली गिरने से लेकर किसी बड़ी अनहोनी के होने का ज़िक्र किया जा रहा है. क्या है ये पूरा मामला, आईये आपको बताते हैं.

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कुल्लू का बिजली महादेव मंदिर, कुल्लू घाटी के काशवरी गाँव में स्थित, जटाधारी का ये इकलौता ऐसा धाम है, जहां प्रत्येक 12 वर्ष बाद बिजली गिरती है. यहाँ आकर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ख़ुद को धन्य समझते हैं. समस्त जगत का ये इकलौता ऐसा स्थान है,  जहां शिवलिंग के टूटने और वापस अपने पूर्ण आकार में लौटने का चमत्कार प्रत्येक शिव भक्त देखता है. यूँ तो मंदिर पूरे 9 महीनों तक खुला रहता है, लेकिन अबकी बार मंदिर के अचानक से बंद हो जाने के चलते कुल्लू घाटी में हलचल मच गई है. बंद मंदिर के पीछे की असल कहानी क्या है ? ये किसी को मालूम नहीं, जिस कारण अफ़वाहों के बाजार में शिवलिंग पर बिजली गिरने से लेकर किसी बड़ी अनहोनी के होने का ज़िक्र किया जा रहा है. क्या है ये पूरा मामला, आईये आपको बताते हैं.

हिमाचल की वादियों में बसा जटाधारी का ये इकलौता ऐसा धाम है, जहां हर 12 साल बाद आसमानी बिजली गिरती है. यानी हर 12 साल बाद शंभूनाथ का ये धाम बिजली का प्रकोप झेलता है और जब-जब यहाँ बिजली गिरती है. शिवलिंग पूरी तरह से चकनाचूर हो जाता है. हैरानी की बात ये है कि यहाँ बिजली गिरने से चीजों का नुक़सान तो होता है, लेकिन शिव भक्त को एक खरोंच तक नहीं आती है. अब आप इसे शिव का चमत्कार कहें या फिर शिव भक्तों की भक्ति, बिजली गिरने के बाद भी बिजली महादेव का ये धाम बाबा के भक्तों से हमेशा पटा रहता है. आँखों देखी इस चमत्कार के आगे वैज्ञानिक भी हार मानते हैं. यहाँ शिवलिंग पर बिजली गिरते हुए पूरी दुनिया देखती है. खंड-खंड हो चुके शिवलिंग को खाद्य सामग्री और मक्खन के लेप से जोड़ा जाता है और फ़िर जो शिवलिंग टूट चुका होता है, वहीं शिवलिंग बाद में अपने आप जुड़कर अपने पुराने स्वरूप में आ जाता है. इसे कहते हैं बिजली महादेव का साक्षात चमत्कार मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा कहती है.

प्राचीन समय में एक कुलांत नामक दैत्य ने इस जगह का अपना निवास बना लिया था वह एक विशाल अजगर का रूप लेकर मंदी घोग्घरधार से होकर लाहौर स्पीती से मथाण गाँव तक आ गया था. अजगर रुपी दैत्य इस जगह को पानी में डुबोना चाहता था जिस कारण से उसने व्यास नदी के प्रवाह को रोक दिया. जससे वहां निवास करने वाले सभी जीव पानी में डूबकर मर जाएँ भगवान शिव के त्रिशूल से राक्षस का वध करने के बाद कुलांत राक्षस का बड़ा शरीर पहाड़ बन गया. इसके बाद शिवजी ने इंद्र को आदेशित किया कि हर 12 साल में एक बार इस जगह पर बिजली गिराएं. मान्यता है कि तभी से यह सिलसिला जारी है.

इन्हीं चमत्कारों के बीच बिजली महादेव मंदिर से एक ऐसी ख़बर सामने आई है, जिसके चलते शिव भक्तों में दुविधा का माहौल बना हुआ है. अमूमन मंदिर के कपाट सिर्फ़ 3 महीनों के लिए बद रहते हैं, हर साल 15 दिसंबर से 15 मार्च तक मंदिर को बंद किया जाता है, बाक़ी समय भक्त अपने आराध्य के दर्शन करते हैं. लेकिन इस बार अचानक से मंदिर के कपाट अनिश्चितकाल के लिए बंद हो गये हैं, आलम ये है कि मंदिर की तरफ़ आने के लिए श्रद्धालुओं को रोका गया है, मंदिर बंद होने के पोस्टर लगाए गये हैं. मंदिर कमेटी की मानें, तो गुप्त कारणों के चलते मंदिर को बंद किया गया है. गुप्त कार्य क्या है, कोई नहीं जानता है. जिस कारण क़यास लगाए जा रहे हैं कि शिवलिंग पर बिजली गिर जाने की वजह से ये फ़ैसला लिया होगा या फिर वर्तमान की गृह दशाओं को देखते हुए कपाट बंद किये होंगे. जो की हम सभी जानते हैं कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद से युद्ध विराम की रेखा भारत-पाकिस्तान के बीच खिंची गई है, लेकिन युद्ध पूरी तरह से समाप्त नहीं हुआ है. ऊपर से ग्रह-चाल को भाँपते हुए ज्योतिषों ने प्राकृतिक आपदा से लेकर भविष्य में किसी बड़ी अनहोनी का संकेत भी दिया है. गुरु का अतिचारी समय फिर आने वाले समय में बैक टू बैक ग्रहण और शनि की मीन राशि में मौजूदगी। इन सब परिस्थितियों को देखते हुए स्थानीय लोगों की मानें, तो मंदिर के बंद कपाट किसी बड़ी विपदा के आने का संकेत भी हो सकता है. जो कि ऐसा पहली बार हुआ है, जब अचानक से बिजली महादेव मंदिर को बंद किया गया है, ऐसे में वजह जो भी हो.लेकिन बिजली महादेव के भक्त चिंतित भी है और आतुर  भी है अपने आराध्य के दर्शनों के लिए.

बहरहाल बिजली महादेव मंदिर से पीएम मोदी की आस्था भी गहरी है, पार्टी की तरफ़ से बतौर प्रभारी जब एक लंबा समय पीएम मोदी का हिमाचल प्रदेश में गुजरा, तभी से बिजली महादेव के प्रति उनकी आस्था जागृत हुई. यहाँ आकर घटों बिजली महादेव की आराधना करना और मंदिर परिसर में बैठकर भक्ति में लीन हो जाना. उस समय को पीएम मोदी आज भी याद करते हैं, आज भी हिमाचल आकर अपनी जन सभाओं में बिजली महादेव का ज़िक्र करना कभी नहीं भूलते हैं.

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