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चंद्रग्रहण से पहले और शनि मंदिर पर बिजली गिरना… क्या ये है किसी बड़े संकट का संकेत?

साल का अंतिम चंद्रग्रहण और वो भी दंडाधिकारी शनि की राशि में, जो भारत में साफ दिखाई देगा. लेकिन ग्रहण से ठीक पहले शनि मंदिर पर बिजली का गिरना और मंदिर का क्षतिग्रस्त हो जाना सवाल खड़े कर रहा है. क्या यह खतरे की घंटी है या फिर अनहोनी से बचने के आसार.

Image: Meta AI
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साल का अंतिम चंद्रग्रहण और वो भी दंडाधिकारी शनि की राशि में, जो भारत में साफ दिखाई देगा. लेकिन ग्रहण से ठीक पहले शनि मंदिर पर बिजली का गिरना और मंदिर का क्षतिग्रस्त हो जाना क्या ये खतरे की घंटी है या फिर अनहोनी से बचने के आसार. शनि मंदिर पर बिजली का कहर और 82 मिनट का चंद्रग्रहण, देखिए इस पर हमारी ये खास रिपोर्ट.

धर्म ग्रंथों में ग्रहण का साया कभी भी शुभ नहीं माना गया. हमेशा ग्रहण का प्रभाव देखा गया है कि ग्रहण की वजह से तबाही मची है. ऐसे इसलिए क्योंकि ज्योतिष दुनिया में सूर्य पिता कहलाए गए और चंद्रमा माँ के समान माने गए. और जब-जब ग्रहण के साये में सूर्य और चंद्रमा आए, दुनिया ने कंपन महसूस किया. प्राकृतिक आपदाओं ने कोहराम मचाया और देखते ही देखते ग्रहण के साये में मानवजाति का नुकसान हुआ.

विज्ञान भले ही ग्रहण को एक खगोलीय घटना के चश्मे से देखे, लेकिन धर्म ग्रंथों से लेकर ज्योतिष विद्या में ग्रहण को अशुभता से जोड़ा गया है. यही कारण है कि साल के अंतिम चंद्रग्रहण से दुनिया अभी से भयभीत है. क्योंकि अबकी बार चंद्रमा पर लगने वाला ग्रहण भारत में दिखेगा और ग्रहण जिस राशि में पड़ेगा, उसके स्वामी स्वयं दंडाधिकारी शनि हैं. जिनके मंदिर पर हाल ही में बिजली गिरी, जिसके चलते स्थानीय लोग किसी बड़ी अनहोनी के होने की संभावना जता रहे हैं. क्या है ये पूरा मामला, आइए आपको बताते हैं.

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उत्तर प्रदेश का बागपत जिला और इसी ज़िले में मौजूद लचौड़ा गांव, जहां से एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने लोगों को भयभीत कर दिया. गांव में स्थित गणेश मंदिर और शनिदेव मंदिर पर बिजली क्या गिरी, पूरे इलाके में सनसनी मच गई. तेज बारिश के बीच आसमानी गड़गड़ाहट में जैसे ही बिजली गिरी, मंदिर परिसर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया. भले ही जनहानि नहीं हुई, लेकिन बिजली गिरने से धमाके की आवाज इतनी तेज थी कि स्थानीय लोगों को लगा जैसे जमीन फट गई हो. लोगों ने जमीन में कंपन महसूस की और जब कुछ समय बाद हालात सामान्य हुए, तो घरों से बाहर आकर मंदिर को देखा. चारों तरफ तबाही नजर आई. मंदिर शिखर से लेकर मंदिर में रखा सामान टूटकर बिखर गया. सौ बात की एक बात ये कि आसमानी आफत कहर बनकर शनि धाम पर गिरी और अब इसी विनाश में लोग अपना भविष्य देख रहे हैं. क्योंकि 7 सितंबर को पड़ने वाला साल का आखिरी चंद्रग्रहण शनि की राशि मीन में लगेगा.

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आपको यह जानकर हैरानी होगी कि इसी सितंबर महीने में चंद्रग्रहण और सूर्यग्रहण, दोनों लगेंगे. साल का यह अंतिम पूर्ण चंद्रग्रहण दिखने में लाल तांबे की तरह होगा, जिस कारण इसे ब्लड मून कहा जा रहा है. लेकिन यही ब्लड मून 82 मिनट तक रहेगा. इस चंद्रग्रहण को न सिर्फ भारत, बल्कि एशियाई देशों के साथ-साथ अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया भी देख पाएंगे. ज्योतिषों की मानें तो ग्रहण पूर्ण भाद्रपद नक्षत्र और कुंभ राशि में लगेगा, यानी शनि के घर में ग्रहण का साया रहेगा. इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए ज्योतिष शनि की ढैया और साढ़ेसाती से पीड़ित राशियों को सचेत रहने की सलाह दे रहे हैं. साथ ही, ग्रहण के प्रभाव को लेकर सत्ता में उथल-पुथल, भूकंप, भारी बारिश और किसी बड़ी दुर्घटना की भी आशंका जताई जा रही है.

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