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मोदी के हाथ चीन की गर्दन आते ही शुरु हुई कैलाश मानसरोवर यात्रा

अब जाकर भारत-चीन के रिश्तों पर जमी बर्फ़ पिघलने लगी हैं। तभी तो दोनों मुल्कों के डिप्लोमेटिक रिश्ते के 75 साल पूरे होने पर चीन ने चार साल से बंद बड़ी कैलाश मानसरोवर यात्रा को फिर से शुरु किये जाने को लेकर बड़ा कदम उठाया है। यानी की पिछले चार साल से यात्रा में अडंगा डाल रहा है चीन अब ख़ुद से कैलाश मानसरोवर के मार्ग पर रेड कार्पेट बिछाएगा।

मोदी के हाथ चीन की गर्दन आते ही शुरु हुई कैलाश मानसरोवर यात्रा
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भारत की सरहदों से सटा चीन एक ऐसा देश है, जिसकी विस्तारवादी नीतियों से दुनियाभर के देश सबसे ज़्यादा त्रस्त हैं। चीन का बस चले, तो पड़ोसी देशों पर अपना कब्जा करके दुनिया का नक़्शा ही बदल दे। चालाक चीन की नीयत को परखने से पहले आप ये जान ले कि जमीन से लेकर समंदर तक भारत ही नहीं, दुनिया के 17 देशों के साथ है चीन का सीमा विवाद है। विश्व का नक़्शा उठाकर देखेंगे , तो ये पायेंगे कि चीन की 14 देशों के साथ करीबन 22 हजार किलोमीटर लंबी सीमा लगती है, लेकिन उसके डेढ़ दर्जन देशों के साथ सीमा विवाद हैं। दक्षिण चीन सागर को लेकर फिलिपिंस और वियतनाम के साथ विवाद है। तिब्बत को शातिर ड्रैगन पहले ही निगल गया है। शातिक चाइना ताइवान को भी हड़पने की फ़िराक़ में है। चीन को कोई देश सबक़ सिखा पाए या नहीं , बल्कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ड्रैगन का अकल ठिकाने लगा दी है। पीएम मोदी के आगे देर से ही सही, लेकिन चीन को ना चाहकर भी घुटने टेकने पड़े है। या फिर यूँ कहे कि अब जाकर भारत-चीन के रिश्तों पर जमी बर्फ़ पिघलने लगी हैं। तभी तो दोनों मुल्कों के डिप्लोमेटिक रिश्ते के 75 साल पूरे होने पर चीन ने चार साल से बंद बड़ी कैलाश मानसरोवर यात्रा को फिर से शुरु किये जाने को लेकर बड़ा कदम उठाया है। यानी की पिछले चार साल से यात्रा में अडंगा डाल रहा है चीन अब ख़ुद से कैलाश मानसरोवर के मार्ग पर रेड कार्पेट बिछाएगा। 

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भारत को चोट पहुँचाने में चीन कभी पीछे नहीं रहा। 62 साल पुराना 1962 का युद्ध सबके सामने हैं और समय-समय पर हिंदुओं की आस्था से भी चीन खिलवाड़ करता आया है। आपको ये जानकर ताझुभ होगा कि पिछले 5 सालों से कैलाश मानसरोवर यात्रा बंद पड़ी है, जिसे अब खोलने की तैयारी है लेकिन क्या आप जानते हैं, छोटे देशों को हड़पने में लगा चीन चाहकर भी कैलाश पर्वत का बाल भी बाँका नहीं कर सकता है बल्कि भीगी बिल्ली बन जाता है। रहस्यों से भरी कैलाश पर्वत की दुनिया ऐसी है कि , यहाँ कदम रखने से भी चीन कतराता है। कैलाश पर्वत के चारों तरफ़ एक ऐसी अलौकिक ऊर्जा है , जिसमें से निकलने वाली ऊं की ध्वनी पूरी दुनिया को अपनी ओर खिंचती है। धर्म ग्रंथों में जिस ज्ञानगंज शहर का ज़िक्र है, वो कही और नहीं बल्कि कैलाश पर्वत पर ही बसा हुआ है, जहां चीन चाहकर भी अपनी बुरी नज़र आज तक नहीं डाल पाया। बहरहाल अब जब कैलाश मानसरोवर यात्रा पुनः शुरु हो रही है, तो इसके पीछे का कारण मोदी की कूटनीतिक चाल है। 

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अतीत में चीन ने मानसरोवर यात्रा पर उस वक़्त अड़ंगा डाला, जब दुनिया कोरोना से त्रस्त थी। साल 2020 के बाद जब खुलने की उम्मीद दिखी, पूर्वी लद्दाख को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव गहरा गया। इस बीच चालाक चिनपिंग सरकार ने अपनी नापाक साज़िशों के चलते मोदी सरकार को झुकाने की कोशिश की, लेकिन पीएम मोदी टम से मस नहीं हुए। जिसका नतीजा ये रहा कि आज चाइना ख़ुद से कैलाश मानसरोवर यात्रा को पुनः शुरु करने जा रहा है..इसको लेकर 18 दिसंबर को स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव की बैठक में भारत के विदेश सचिव और  चीन के उप विदेश मंत्री के बीत बातचीत हुई। और इसी बैठक में ये फ़ैसला लिया गया कि 2025 के गर्मियों में कैलाश मानसरोवर यात्रा को फिर से शुरू किया जाए।हर साल जून से सितंबर के बीच होने वाली मानसरोवर यात्रा 5 साल बाद इन गर्मियों में होगी। इन गर्मियों में मानसरोवर यात्रा का रास्ता खुल जाएगा। इन गर्मियों में हर-हर महादेव के नारों से कैलाश नगरी गूंजगी और इन गर्मियों से भारत-चीन के रिश्तों का एक नया अध्याय लिखा जाएगा। 

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