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कैकेयी ने श्री राम को नहीं भेजा था वनवास! Premanand Maharaj ने बताया वो सच जिसे जानकर दंग रह जाएंगे आप

आज तक कई लोग सोचते हैं कि श्रीराम के 14 वर्ष के वनवास जाने का कारण माता कैकेयी थीं. लेकिन इन दिनों प्रेमानंद महाराज जी का एक ऐसा वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें वो माता कैकेयी के ऐसे सच को उजागर करते हुए दिखाई दे रहे हैं जिसे सुनकर आप भी दंग रह जायेंगे.

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दुनिया को सही राह दिखाने वाले प्रेमानंद महाराज जी सादगी और भक्ति के लिए पूरी दुनिया में विख्यात हैं. दुनिया भर के भक्त महाराज जी को बहुत मानते हैं. उनकी कही बातों को अपने जीवन में अपनाते हैं. ऐसे में आये दिनों महाराज जी के प्रवचन देते हुए वीडियो भी भक्तों के बीच सुर्खियों में बने रहते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन दिनों महाराज जी का एक वीडियो खूब चर्चा में है. जिसमें वे माता कैकेयी के बारे में जानकारी दे रहे हैं. वायरल वीडियों में उन्होंने माता कैकेयी का एक ऐसा सच उजागर किया है जिसे शायद बहुत कम लोग जानते होंगे. चलिए आपको भी बताते हैं माता कैकेयी के उस सच के बारे में… 

कैकेयी जितना सामर्थ्य किसी और में नहीं!

प्रेमानंद महाराज वीडियो में माता कैकेयी के बारे में कहते नजर आ रहे हैं कि 'कभी भी माता को दोष मत देना क्योंकि जैसी प्रेमी माता थी शायद ही कोई और हो. उन्होंने भगवान श्रीराम के लिए पूरे अयोध्या वासियों की निंदा को सहा. भगवान रघुनाथजी का वियोग सहा, भरत जी का वियोग सहा, महाराजा दशरथ को खोया. सिर्फ भगवान राम की इच्छा पूर्ति के लिए. ये माता कैकेयी का प्यार ही था जिसमें इतना सामर्थ्य था. इतना प्यार अवध में कोई और कर ही नहीं सकता है'. 

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 क्या कैकेयी ने दिया था भगवान श्रीराम के लिए बलिदान? 

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प्रेमानंद महाराज जी ने आगे बताया कि 'एक बार भगवान श्रीराम ने माता से एकांत में कहा कि मां… मैंने देखा है पूरी अवध में कोई इतना प्यार नहीं करता जितना आप मुझसे करती हो. मेरे लिए निंदा, अपमान, पुत्र वियोग, पति वियोग, इतना दर्द सिर्फ आप ही सह सकती हैं. 

राम मैं तुम्हारे लिए अपने प्राण भी दे सकती हूं! 

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इसके बाद महाराज जी भक्तों को बताते हैं कि माता कैकेयी बहुत बहादुर थीं. वो इतनी बहादुर थीं कि देवासुर संग्राम में महाराज दशरथ के साथ गई थीं. माता कैकेयी ने ये सब कुछ भगवान श्रीराम के कहने पर ही किया था. एक बार भगवान राम ने माता से कहा कि मां मेरी बस एक इच्छा है. मां ने कहा बोलो राम… मैं तुम्हारे लिए अपने प्राण त्याग सकती हूं. तुम्हारे लिए सबकुछ कर सकती हूं. तुम बताओ मुझे कि क्या इच्छा है तुम्हारी? 

माता कैकेयी कैसे बनी राम जी के वनवास का कारण?  

तब भगवान श्री राम ने माता कैकेयी से एकांत में कहा… मां जिस लिए मेरा अवतार हुआ है, मैं संतों के सुख के लिए अवतरित हुआ हूं, मैं अभी अवध का राजा नहीं बनूंगा. आपको मुझे वनवास भेजना ही होगा. इसलिए माता कैकेयी ने श्रीराम की इच्छा पूर्ति के लिए भगवान श्रीराम की आज्ञा का पालन किया. इस दौरान माता का हृदय भगवान श्रीराम के प्रेम में डूबा रहा. लेकिन आज ये बातें शायद ही कोई जानता होगा. जिन्होंने पुत्र की इच्छा के लिए निंदा, अपमान और कई कष्ट सहे.  

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श्रीराम के वापस आने के बाद माता कैकेयी ने क्या इच्छा व्यक्त की? 

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महाराज जी ने आगे बताया कि जब भगवान श्रीराम अयोध्या वापस आये तब माता ने कहा कि मैं सब कुछ सह गई, निंदा, अपमान और पति का वियोग तक मैंने सहा लेकिन मैं एक बात नहीं सह सकती कि इन 14 सालों में भरत ने मुझे कभी मां नहीं कहा. मेरी बस एक इच्छा है कि भरत बस एक बार मुझे मां कह दें. इसके बाद जब भरत जी को सूचना मिली कि राम जी कैकेयी को मां कहलाने के लिए आ रहे हैं तब उनकी जो दशा हुई वो देखकर भगवान वापस हो गए. इसके बाद महाराज जी ने कहा कि कभी भी माता कैकेयी को बुरा मत कहना. उन्होंने जो श्रीराम के लिए किया वो शायद ही कोई कर पायेगा.

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